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आरडीजी समाप्ति के साये में हिमाचल का बजट 2026-27, बढ़ेगा वित्तीय दबाव
20 मार्च को विधानसभा में बजट पेश करेंगे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने की सिफारिश के बीच Sukhvinder Singh Sukhu 20 मार्च को हिमाचल प्रदेश का बजट 2026-27 पेश करेंगे। इस कदम से राज्य को सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है।
राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) की संभावित समाप्ति के बीच Himachal Pradesh आने वाले समय में हाल के वर्षों का सबसे चुनौतीपूर्ण बजट पेश करने जा रहा है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu, जो वित्त विभाग भी संभाल रहे हैं, 20 मार्च को विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेंगे।
वित्त विभाग मुख्यमंत्री सुक्खू के चौथे बजट की तैयारियों के अंतिम चरण में है। हालांकि, यह बजट 16वें वित्त आयोग की उस सिफारिश की पृष्ठभूमि में तैयार हो रहा है, जिसमें राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने की बात कही गई है।
यदि यह अनुदान बंद होता है तो पर्वतीय राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। सीमित राजस्व स्रोतों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आधारभूत संरचना बनाए रखने की ऊंची लागत के कारण यह अनुदान हिमाचल के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण सहारा रहा है।
आरडीजी की संभावित समाप्ति से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है। संसाधन जुटाने के लिए नए कर लगाने या मौजूदा करों/शुल्कों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, सरकार गैर-जरूरी खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन सख्त करने पर भी ध्यान केंद्रित कर सकती है, ताकि संभावित घाटे से निपटा जा सके।
उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री Harshwardhan Chauhan ने पुष्टि की कि बजट सत्र का दूसरा चरण 18 मार्च से शुरू होगा। बजट पर 23 से 25 मार्च तक तीन दिनों तक चर्चा होगी। इसके बाद 27 और 28 मार्च को कट मोशन पर चर्चा और मतदान होगा। बजट 28 मार्च को पारित किए जाने की संभावना है।
सत्र का पहला चरण 16 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू हुआ था, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष Kuldeep Singh Pathania ने सदन को स्थगित कर दिया था। धन्यवाद प्रस्ताव पर 18 और 19 मार्च को चर्चा होगी, जिसके बाद मुख्यमंत्री उसका उत्तर देंगे।
