सीएसके एचपीकेवी को ‘बोवाइन एंडोमेट्रियम साइटोटेपिंग कैथेटर’ के लिए पहली बार BIS प्रमाणन

पशु प्रजनन रोगों की सटीक पहचान के लिए विकसित स्वदेशी उपकरण को राष्ट्रीय मान्यता

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Chaudhary Sarwan Kumar Himachal Pradesh Krishi Vishvavidyalaya ने ‘बोवाइन एंडोमेट्रियम साइटोटेपिंग कैथेटर’ के लिए पहली बार Bureau of Indian Standards (BIS) प्रमाणन हासिल किया है, जो विश्वविद्यालय के अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

Chaudhary Sarwan Kumar Himachal Pradesh Krishi Vishvavidyalaya (सीएसके एचपीकेवी), पालमपुर ने ‘बोवाइन एंडोमेट्रियम साइटोटेपिंग कैथेटर’ नामक एक अभिनव डायग्नोस्टिक उपकरण के लिए पहली बार Bureau of Indian Standards (बीआईएस) से प्रमाणन प्राप्त किया है। यह विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

यह बीआईएस-प्रमाणित मानक डॉ. पंकज सूद और उनकी टीम द्वारा DGCN College of Veterinary and Animal Sciences, पालमपुर में विकसित किया गया। अनुसंधान दल में डॉ. अंकित आहूजा, डॉ. रोहित मंकोटिया और डॉ. विजेंदर नेगी शामिल हैं।

इस उपकरण का आगे सत्यापन Lala Lajpat Rai University of Veterinary and Animal Sciences, हिसार के वैज्ञानिकों — डॉ. ए.के. पांडे और डॉ. संदीप कुमार — के सहयोग से किया गया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. पांडा ने टीम को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बीआईएस मान्यता से इस तकनीक को राष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता मिलेगी और पशुपालकों के हित में इसके व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नवाचार मवेशियों के स्वास्थ्य और उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार लाएगा।

प्रो. पंकज सूद, जो पशु स्त्रीरोग एवं प्रसूति विज्ञान विभागाध्यक्ष तथा एसोसिएट डायरेक्टर (रिसर्च-वेटरनरी) हैं, ने बताया कि यह मानक फरवरी 2022 में बीआईएस को प्रस्तुत किया गया था। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद इसे मंजूरी दी गई।

‘बोवाइन एंडोमेट्रियम साइटोटेपिंग कैथेटर’ को गायों में उप-नैदानिक गर्भाशय संक्रमण (Subclinical Uterine Infections) की सटीक पहचान के लिए डिजाइन किया गया है। यह प्रजनन संबंधी विकार अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, जिससे प्रजनन क्षमता और गर्भधारण दर प्रभावित होती है।

अनुसंधान टीम के अनुसार, स्वदेशी रूप से विकसित यह उपकरण आयातित विकल्पों की तुलना में अधिक विश्वसनीय, पुन: प्रयोज्य (रीयूजेबल) और किफायती है, जिससे यह क्षेत्रीय स्तर पर पशु चिकित्सीय उपयोग के लिए अत्यंत उपयुक्त बनता है।Screenshot_1702

Edited By: Karan Singh

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