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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, कैथल में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का पुतला फूंका
BKU (चरुणी) के बैनर तले किसानों ने जताई नाराजगी, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
कैथल में भारतीय किसान यूनियन (चरुणी) के नेतृत्व में किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसानों ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का प्रतीकात्मक पुतला फूंककर केंद्र सरकार से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता वापस लेने की मांग की।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान
हरियाणा के कैथल में गुरुवार को Bharatiya Kisan Union (Charuni) के बैनर तले किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने व्यापार वार्ता के लिए भारत आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का प्रतीकात्मक पुतला जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के बाद किसानों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम एक ज्ञापन कैथल के नायब तहसीलदार के माध्यम से सौंपा और प्रस्तावित समझौते को तत्काल वापस लेने की मांग की।
हनुमान वाटिका में हुई जिला स्तरीय बैठक
प्रदर्शन से पहले जिला अध्यक्ष Gurnam Faral की अध्यक्षता में हनुमान वाटिका में एक जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई।बैठक में किसान संगठन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया। इसके बाद किसान नेताओं के नेतृत्व में रैली निकाली गई, जो सिर छोटू राम चौक तक पहुंची।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ नारेबाजी भी की।
किसानों ने जताई कृषि क्षेत्र को नुकसान की आशंका
छोटे किसानों पर पड़ सकता है बड़ा असर
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए BKU (चरुणी) के युवा प्रदेश अध्यक्ष Vikram Kasana ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों, श्रमिक यूनियनों, युवा एवं छात्र संगठनों, महिला संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता है।
उन्होंने दावा किया कि यह समझौता भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, छोटे कारोबारों, रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए चुनौती बन सकता है।
कसाना ने कहा कि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं, जबकि अमेरिका में कृषि बड़े व्यावसायिक स्तर पर की जाती है और वहां किसानों को सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है।
उनके अनुसार ऐसी परिस्थितियों में मुक्त व्यापार समझौता भारतीय किसानों और उपभोक्ताओं के हितों को प्रभावित कर सकता है।
व्यापक जन-परामर्श की मांग
हितधारकों की सहमति जरूरी
किसान नेताओं ने कहा कि कृषि, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़े किसी भी फैसले से पहले व्यापक जन-परामर्श और सभी हितधारकों की सहमति जरूरी है।
उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों और अन्य प्रभावित वर्गों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।
अमेरिकी कृषि उत्पादों को लेकर जताई चिंता
विक्रम कसाना ने कहा कि अमेरिकी नेताओं के हालिया बयानों के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में कम या शून्य सीमा शुल्क (Custom Duty) के साथ प्रवेश मिल सकता है।
उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा हुआ तो भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि प्रस्तावित समझौते के अंतिम प्रावधानों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Key Highlights:
- कैथल में BKU (चरुणी) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया।
- किसानों ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का प्रतीकात्मक पुतला फूंका।
- प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर समझौता वापस लेने की मांग की।
- किसानों ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका जताई।
- छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा की मांग।
- कृषि संबंधी फैसलों में व्यापक जन-परामर्श की अपील।
FAQ Section:
प्रदर्शन किस संगठन ने किया?
भारतीय किसान यूनियन (चरुणी) के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।
प्रदर्शन कहां हुआ?
हरियाणा के कैथल शहर में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया।
किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को वापस लेने की मांग की है।
किसानों को किस बात की चिंता है?
किसानों का कहना है कि समझौते से भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छोटे किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
ज्ञापन किसे सौंपा गया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार के माध्यम से सौंपा गया।
Conclusion:
कैथल में किसानों का यह प्रदर्शन प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। किसान संगठनों का मानना है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय में सभी हितधारकों की राय शामिल होनी चाहिए। अब निगाहें केंद्र सरकार की आगामी नीति और व्यापार वार्ताओं के परिणामों पर टिकी हैं।

