यूपी में 13 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों के दस्तावेज अब भी UMEED पोर्टल पर अपलोड नहीं, म्यूटवल्लियों पर कार्रवाई की चेतावनी

5 जून की समयसीमा से पहले हजारों वक्फ संस्थानों का डेटा अधूरा, वक्फ बोर्ड ने सरकार द्वारा कब्जे की अफवाहों को बताया गलत

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उत्तर प्रदेश में 13,500 से अधिक वक्फ संस्थानों के दस्तावेज अभी तक UMEED पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए हैं। वक्फ बोर्ड अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा का पालन न करने पर म्यूटवल्लियों पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन संपत्तियों का स्वरूप नहीं बदलेगा।

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया के बीच बड़ी संख्या में संस्थानों के दस्तावेज अभी भी UMEED पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाए हैं। 5 जून की निर्धारित समयसीमा से ठीक पहले सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 13 हजार से अधिक वक्फ संस्थानों का दस्तावेजीकरण कार्य अधूरा है।

हालांकि, वक्फ बोर्ड अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि दस्तावेज समय पर अपलोड न होने की स्थिति में संबंधित म्यूटवल्लियों (देखरेख करने वालों) पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन किसी भी वक्फ संपत्ति को सरकार द्वारा अपने कब्जे में लेने जैसी बातों में कोई सच्चाई नहीं है।

क्या है UMEED पोर्टल?

वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने की पहल

UMEED (Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development) पोर्टल को केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने जून 2025 में लॉन्च किया था।

इस पोर्टल का उद्देश्य देशभर की वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण, निगरानी और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। यह पहल वक्फ (संशोधन) अधिनियम के तहत लागू की गई है ताकि वक्फ संपत्तियों से जुड़ा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो सके।

1.31 लाख से अधिक संस्थानों का पंजीकरण पूरा

13,522 संस्थानों के दस्तावेज अभी लंबित

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, 3 जून 2026 तक राज्य के कुल 1,44,635 वक्फ संस्थानों में से 1,31,113 संस्थानों के दस्तावेज सफलतापूर्वक UMEED पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं।

हालांकि 13,522 वक्फ संस्थानों का पंजीकरण तो पूरा हो चुका है, लेकिन उनके आवश्यक दस्तावेज अभी तक पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए हैं।

क्या सरकार वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करेगी?

बोर्ड अधिकारियों ने अफवाहों का किया खंडन

हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि यदि निर्धारित समय तक वक्फ संपत्तियों के दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए तो सरकार उन संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले सकती है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ऐसी कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्तावेज अपलोड न होने से संपत्ति की वक्फ स्थिति समाप्त नहीं होगी।

अधिकारियों के मुताबिक, लापरवाही बरतने वाले म्यूटवल्लियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर वक्फ बोर्ड नए देखरेखकर्ता नियुक्त कर सकता है, जो बाद में आवश्यक दस्तावेज अपलोड करेंगे।

31 हजार दस्तावेज पहले हो चुके हैं रिजेक्ट

गलत अपलोडिंग के कारण दोबारा मांगे गए दस्तावेज

कुछ दिन पहले यह जानकारी सामने आई थी कि करीब 31,000 वक्फ संस्थानों के दस्तावेज UMEED पोर्टल पर गलत तरीके से अपलोड किए गए थे।

तकनीकी त्रुटियों और अधूरी जानकारी के कारण इन दस्तावेजों को अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बाद संबंधित म्यूटवल्लियों को 5 जून तक दस्तावेज दोबारा अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे।

तकनीकी समस्याओं के चलते मिली थी अतिरिक्त मोहलत

वक्फ ट्रिब्यूनल ने दिया था छह महीने का विस्तार

उत्तर प्रदेश राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल ने दिसंबर 2025 में म्यूटवल्लियों और वक्फ प्रशासकों को दस्तावेज अपलोड करने के लिए छह महीने की अतिरिक्त अवधि प्रदान की थी।

यह फैसला यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दायर याचिका के बाद लिया गया था, जिसमें पोर्टल पर लगातार तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया गया था। इसके बाद दस्तावेज अपलोड करने की समयसीमा बढ़ाई गई थी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और संपत्तियों से जुड़े विवादों को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, समयसीमा के भीतर सभी दस्तावेज अपलोड करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।


Key Highlights:

  • यूपी में 13,522 वक्फ संस्थानों के दस्तावेज अब भी UMEED पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए।
  • कुल 1,44,635 वक्फ संस्थानों में से 1,31,113 का दस्तावेजीकरण पूरा।
  • दस्तावेज अपलोड न करने पर म्यूटवल्लियों पर कार्रवाई संभव।
  • वक्फ बोर्ड ने सरकार द्वारा संपत्तियां कब्जाने की अफवाहों का खंडन किया।
  • लगभग 31,000 दस्तावेज गलत अपलोडिंग के कारण रिजेक्ट हुए थे।
  • तकनीकी समस्याओं के चलते पहले छह महीने की अतिरिक्त मोहलत दी गई थी।

FAQ Section

Q1. UMEED पोर्टल क्या है?

UMEED एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया है।

Q2. यूपी में कितनी वक्फ संपत्तियों के दस्तावेज लंबित हैं?

करीब 13,522 वक्फ संस्थानों के दस्तावेज अभी तक पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए हैं।

Q3. दस्तावेज समय पर अपलोड न होने पर क्या होगा?

वक्फ बोर्ड के अनुसार संबंधित म्यूटवल्लियों पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन संपत्ति की वक्फ स्थिति नहीं बदलेगी।

Q4. क्या सरकार वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर सकती है?

वक्फ बोर्ड अधिकारियों ने ऐसी सभी अफवाहों को खारिज किया है और कहा है कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

Q5. 31,000 दस्तावेज क्यों रिजेक्ट हुए थे?

गलत अपलोडिंग, अधूरी जानकारी और तकनीकी त्रुटियों के कारण दस्तावेज अस्वीकार किए गए थे।


Conclusion

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन हजारों संस्थानों के दस्तावेज अभी भी लंबित हैं। वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा का पालन न करने पर जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन संपत्तियों के स्वामित्व या स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में म्यूटवल्लियों के लिए निर्धारित समय के भीतर सभी दस्तावेज अपलोड करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।Screenshot_2083

Edited By: Karan Singh

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