पंजाब में ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत, किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी की सेहत सुधारने का संदेश

संगरूर से अभियान का शुभारंभ, स्वयं सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों को दी गई वैज्ञानिक खेती की जानकारी

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पंजाब में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया गया है। संगरूर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में किसानों और स्वयं सहायता समूहों को वैज्ञानिक खेती और मृदा संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

पंजाब में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ

धान और गेहूं की खेती के दौरान उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के लिए जाने जाने वाले पंजाब में किसानों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को संगरूर से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना, खेती की लागत कम करना और मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखना है।

किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए जागरूकता कार्यक्रम

पंजाब सरकार के सहयोग से Punjab Agricultural University के अंतर्गत संचालित Krishi Vigyan Kendra Sangrur द्वारा एक दिवसीय जागरूकता एवं क्षमता निर्माण सेमिनार आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में जिले के 100 से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उर्वरक प्रबंधन और मृदा संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

अत्यधिक उर्वरक उपयोग से मिट्टी की सेहत पर असर

कृषि विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के प्रभारी Mandeep Singh ने कहा कि जिले के कई किसान विभिन्न फसलों में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि:

  • अत्यधिक उर्वरक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित होती है।
  • खेती की लागत बढ़ जाती है।
  • लंबे समय में फसल उत्पादन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उर्वरक उपयोग करने की सलाह दी।

मिट्टी परीक्षण और सही उर्वरक प्रबंधन की दी जानकारी

वैज्ञानिक खेती पर रहा जोर

सेमिनार के दौरान किसानों और स्वयं सहायता समूहों को खेतों की मिट्टी की जांच (Soil Testing) के महत्व के बारे में बताया गया।

विशेषज्ञों ने किसानों को सिखाया कि:

  • मिट्टी का सही नमूना कैसे लिया जाए।
  • मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों का चयन कैसे किया जाए।
  • विभिन्न फसलों के लिए अनुशंसित उर्वरक मात्रा क्या है।
  • उर्वरक डालने का सही समय और सही तरीका कौन-सा है।

यह जानकारी पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों के अनुसार साझा की गई।

जैविक और हरित खेती को बढ़ावा

मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष फोकस

कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए वैकल्पिक और टिकाऊ कृषि उपायों के बारे में भी जागरूक किया गया।

विशेष रूप से निम्नलिखित उपायों पर जोर दिया गया:

  • हरित खाद (Green Manuring) का उपयोग
  • जैविक उर्वरकों को अपनाना
  • फसल अवशेषों का खेत में समावेशन
  • प्राकृतिक पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देना
  • दीर्घकालिक मृदा संरक्षण तकनीकों को अपनाना

विशेषज्ञों ने बताया कि इन उपायों से मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती के सिद्धांतों को अपनाते हैं तो खेती अधिक लाभदायक और टिकाऊ बन सकती है।

‘खेत बचाओ अभियान’ को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण और कृषि भूमि दोनों की सुरक्षा में सहायक होगा।


Key Highlights:

  • संगरूर से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत।
  • उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर।
  • 100 से अधिक किसानों और SHG सदस्यों ने लिया भाग।
  • मिट्टी परीक्षण और उर्वरक प्रबंधन की दी गई जानकारी।
  • अत्यधिक उर्वरक उपयोग से होने वाले नुकसान बताए गए।
  • हरित खाद और जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने की अपील।
  • मिट्टी की उर्वरता और खेती की लागत पर हुई चर्चा।

FAQ Section:

‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य क्या है?

इस अभियान का उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मिट्टी की सेहत सुधारने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है।

अभियान की शुरुआत कहां से हुई?

अभियान की शुरुआत पंजाब के संगरूर जिले से की गई।

कार्यक्रम में किन लोगों ने भाग लिया?

स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के सदस्य और प्रगतिशील किसान कार्यक्रम में शामिल हुए।

मिट्टी परीक्षण क्यों जरूरी है?

मिट्टी परीक्षण से खेत की पोषक तत्व स्थिति का पता चलता है, जिससे सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है।

किसानों को किन वैकल्पिक उपायों की जानकारी दी गई?

हरित खाद, जैविक उर्वरक, फसल अवशेष प्रबंधन और मृदा संरक्षण तकनीकों की जानकारी दी गई।


Conclusion:

पंजाब में शुरू किया गया ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करेगी, बल्कि खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। यदि किसान इन सुझावों को अपनाते हैं, तो राज्य में कृषि अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है।Screenshot_2078

Edited By: Karan Singh

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