हरियाणा में चाइल्ड केयर संस्थानों पर आर्थिक संकट, सरकारी ग्रांट में देरी से बढ़ी परेशानी

करीब 500 बच्चों की देखभाल प्रभावित, NGOs ने सरकार से जल्द फंड जारी करने की मांग की

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हरियाणा के चाइल्ड केयर संस्थान (CCI) सरकारी अनुदान में देरी के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जिससे बच्चों की देखभाल और संचालन प्रभावित हो रहा है।

हरियाणा में बच्चों की देखभाल करने वाले चाइल्ड केयर संस्थान (CCI), जो अनाथ, परित्यक्त और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों को आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और भावनात्मक सहयोग प्रदान करते हैं, इन दिनों आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

राज्य में ऐसे लगभग 22 संस्थान हैं, जिन्हें गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा संचालित किया जाता है। इन पर संकट की मुख्य वजह वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकारी अनुदान जारी होने में देरी है।

सरकारी ग्रांट क्यों जरूरी है?
CCI ऐसे संस्थान हैं जो कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को देखभाल, सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधा देते हैं। ये Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act के तहत संचालित होते हैं, जिसमें राज्य की जिम्मेदारी होती है कि बच्चों के समुचित विकास और देखभाल को सुनिश्चित किया जाए।

हरियाणा के कई CCI भले ही NGOs द्वारा चलाए जाते हैं, लेकिन उनके संचालन के लिए वे काफी हद तक सरकारी फंड पर निर्भर रहते हैं। ये 22 संस्थान मिलकर करीब 500 बच्चों की देखभाल कर रहे हैं।

सरकार द्वारा 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रति माह 3,000 रुपये और 18 से 21 वर्ष के बच्चों के लिए 4,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। संस्थानों के प्रबंधन के अनुसार, यह राशि भोजन, दूध, कपड़े और चिकित्सा जैसी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है।

क्या संस्थानों ने मुद्दा उठाया है?
इन संस्थानों के प्रतिनिधि संगठन Confederation of Non-Government Child Care Institutions ने इस मुद्दे को सक्रिय रूप से केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के सामने उठाया है।

उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini और विधानसभा अध्यक्ष Harvinder Kalyan से भी मुलाकात की है।

इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव और संयुक्त सचिव, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव और हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से भी अनुदान जारी करने की अपील की है, ताकि संस्थान बिना बाधा के चल सकें।

देरी से क्या समस्याएं आ रही हैं?
अनुदान में देरी के कारण संस्थानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे—

  • आवश्यक खाद्य सामग्री और राशन खरीदने में दिक्कत
  • बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच
  • बिजली, कर्मचारियों के वेतन और रखरखाव जैसे खर्चों को पूरा करने में परेशानी

सरकार की ओर से क्या आश्वासन मिला है?
शुरुआत में संस्थानों को आश्वासन दिया गया था कि 25 मार्च 2026 तक अनुदान जारी कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक राशि जारी नहीं हुई है।

अब अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार से फंड विभाग को मिल चुका है और महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक के अनुसार, यह राशि अगले कुछ दिनों में जारी कर दी जाएगी।

यह मामला बच्चों के कल्याण से जुड़ा होने के कारण गंभीर माना जा रहा है और जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है।Screenshot_1040

Edited By: Karan Singh

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