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गुरुग्राम की औद्योगिक कॉलोनी फिर जलमग्न, सेक्टर-16 की IDC में फैक्ट्रियों में घुसा पानी; कारोबार पर भारी असर
करीब 250 औद्योगिक इकाइयों पर संकट, सड़कें कई फीट पानी में डूबीं; GIA ने कहा- हर मानसून में दोहराती है यही समस्या
गुरुग्राम के सेक्टर-16 स्थित इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉलोनी (IDC) में पिछले कुछ दिनों की बारिश ने एक बार फिर जलभराव की समस्या उजागर कर दी है। सड़कों पर कई फीट पानी भरने से फैक्ट्रियों और गोदामों में पानी घुस गया, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ और उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-16 की इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉलोनी (IDC) एक बार फिर बारिश के बाद जलमग्न हो गई है। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश ने इलाके की कमजोर आधारभूत संरचना और खराब जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय उद्योगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर मानसून में वर्षों से इसी तरह दोहराती आ रही है।
इलाके की कई सड़कें कई फीट तक पानी में डूब गईं। जलभराव के कारण बारिश का पानी फैक्ट्रियों और गोदामों के अंदर तक पहुंच गया, जिससे औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। कई मौकों पर उत्पादन लगभग पूरी तरह ठप होने की स्थिति में पहुंच गया।
करीब 250 औद्योगिक इकाइयों पर असर
सेक्टर-16 की IDC में करीब 250 औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं, जहां हजारों कर्मचारी काम करते हैं। लगातार जलभराव के कारण इन इकाइयों के सामान्य कामकाज पर सीधा असर पड़ रहा है।फैक्ट्रियों में पानी घुसने से मशीनरी, तैयार माल और अन्य औद्योगिक सामग्री को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कर्मचारियों के आने-जाने और माल की आवाजाही में भी बाधा उत्पन्न होती है।
उत्पादन रुकने से आर्थिक नुकसान
उद्योग संगठनों के मुताबिक, जलभराव के कारण उत्पादन घंटों तक प्रभावित रहता है और कई बार लगभग पूरी तरह रुक जाता है। इससे उद्योगों को उत्पादन में नुकसान के साथ-साथ परिवहन और उपकरणों से जुड़े अतिरिक्त खर्च का भी सामना करना पड़ता है।
गुरुग्राम के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी ऐसे व्यवधानों से होने वाले वार्षिक नुकसान का अनुमान सैकड़ों करोड़ रुपये तक लगाया गया है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि हर साल यह आर्थिक बोझ उद्योगों को ही उठाना पड़ता है।
GIA ने जलभराव को बताया ‘पूरी तरह रोकी जा सकने वाली समस्या’
गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (GIA) का कहना है कि IDC में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या वर्षों से बनी हुई है। एसोसिएशन की ओर से कई बार संबंधित नागरिक एजेंसियों और विभागों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया।
औद्योगिक संगठनों का आरोप है कि मामूली बारिश के बाद भी क्षेत्र की स्थिति खराब हो जाती है। जर्जर और पानी से भरी सड़कों के साथ पर्याप्त ड्रेनेज और हाई-पावर पंपों की कमी समस्या को और गंभीर बना देती है।
मानसून से पहले आश्वासन, बारिश में फिर वही हाल
GIA और अन्य औद्योगिक संगठनों के मुताबिक, मानसून से पहले संबंधित विभागों को समस्या से अवगत कराया जाता है। हर बार कार्रवाई के आश्वासन मिलते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही वही जलभराव फिर सामने आ जाता है।
HSIIDC जैसे विभागों को भी पहले कई बार इस समस्या को लेकर प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है। उद्योग संगठनों का कहना है कि कागजों पर किए गए आश्वासन जमीनी स्तर पर जलभराव रोकने में नाकाम साबित हुए हैं।
‘यह प्राकृतिक आपदा नहीं, इंसानों की बनाई समस्या’
GIA के कार्यकारी सचिव कमल मेहता ने स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि हर मानसून में दोहराने वाली मानव निर्मित समस्या है।
उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को लिखित रूप से कई बार समस्या की जानकारी दी गई और हर बार कार्रवाई का आश्वासन मिला। लेकिन उनके अनुसार, कागजों पर किए गए वादे फैक्ट्रियों में घुसने वाले पानी को नहीं रोक सकते। उद्योग जगत को एक बार फिर आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
Key Highlights:
- गुरुग्राम के सेक्टर-16 स्थित IDC में बारिश के बाद फिर भारी जलभराव।
- कई सड़कें कई फीट तक पानी में डूबीं।
- फैक्ट्रियों और गोदामों में बारिश का पानी घुसने की शिकायत।
- करीब 250 औद्योगिक इकाइयों और हजारों कर्मचारियों पर असर।
- उत्पादन कई बार लगभग पूरी तरह ठप होने की स्थिति में पहुंचा।
- GIA ने सीवर ओवरफ्लो और खराब ड्रेनेज को लंबे समय से चली आ रही समस्या बताया।
- उद्योग संगठनों का दावा- मानसून से पहले शिकायत और आश्वासन, लेकिन स्थायी समाधान नहीं।
- पर्याप्त ड्रेनेज और हाई-पावर पंपों की कमी को भी समस्या की बड़ी वजह बताया गया।
- GIA के कार्यकारी सचिव कमल मेहता ने इसे बार-बार दोहराने वाली मानव निर्मित समस्या बताया।
FAQ Section:
गुरुग्राम की IDC में जलभराव कहां हुआ है?
जलभराव गुरुग्राम के सेक्टर-16 स्थित इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉलोनी (IDC) में हुआ है।
IDC में कितनी औद्योगिक इकाइयां हैं?
इलाके में करीब 250 औद्योगिक इकाइयां हैं और यहां हजारों लोग काम करते हैं।
जलभराव से उद्योगों पर क्या असर पड़ा?
पानी फैक्ट्रियों और गोदामों में घुसने से उत्पादन प्रभावित हुआ। कई मौकों पर औद्योगिक गतिविधियां लगभग पूरी तरह रुक गईं और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
जलभराव की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?
GIA के अनुसार, सीवर ओवरफ्लो, अपर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था और हाई-पावर पंपों की कमी लंबे समय से समस्या की प्रमुख वजह हैं।
क्या उद्योग संगठनों ने पहले भी शिकायत की है?
हां। GIA और अन्य औद्योगिक संगठनों का कहना है कि वे कई वर्षों से संबंधित विभागों के सामने यह समस्या उठाते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
Conclusion:
गुरुग्राम के सेक्टर-16 की IDC में बारिश के बाद दोबारा हुआ जलभराव औद्योगिक क्षेत्र की वर्षों पुरानी बुनियादी समस्याओं को सामने ले आया है। करीब 250 औद्योगिक इकाइयों वाले इस क्षेत्र में पानी भरने से उत्पादन, परिवहन और कारोबार प्रभावित हो रहा है। उद्योग संगठन अब केवल आश्वासन के बजाय स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था, पर्याप्त पंपिंग क्षमता और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
