दोआबा रोइंग सेंटर बंद होने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, पूर्व प्रशिक्षुओं ने नेशनल चैंपियनशिप में जीते सिल्वर मेडल

तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह ने कोलकाता में रचा इतिहास, मोगा में मिली ट्रेनिंग और सहयोग ने दिलाई राष्ट्रीय स्तर पर सफलता

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दोराहा रोइंग सेंटर बंद होने के बाद प्रशिक्षण सुविधा के लिए भटकने वाले दो युवा खिलाड़ियों ने 27वीं नेशनल सब-जूनियर रोइंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर पंजाब का नाम रोशन किया। मोगा में पिछले तीन महीनों की ट्रेनिंग के बाद तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह ने यह उपलब्धि हासिल की।

 

दोराहा रोइंग सेंटर बंद होने के बाद प्रशिक्षण सुविधा के लिए संघर्ष करने वाले पंजाब के दो युवा खिलाड़ियों ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। दोराहा सेंटर के पूर्व प्रशिक्षु तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह ने पिछले सप्ताह कोलकाता में आयोजित 27वीं नेशनल सब-जूनियर रोइंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।

दोनों खिलाड़ियों ने सेंटर बंद होने के बाद अपना प्रशिक्षण आधार बदल लिया था। उन्हें लगातार अलग-अलग रोइंग सेंटरों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें निराशा हाथ लगी। आखिरकार पंजाब रोइंग एसोसिएशन के महासचिव जसवीर सिंह की मदद से उन्हें मोगा में प्रशिक्षण की सुविधा मिली।

इसी प्रतियोगिता में पंजाब के एकमजोत सिंह ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि सिमरन कौर और महकप्रीत कौर ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।

दोराहा सेंटर बंद हुआ तो खिलाड़ियों के सामने खड़ा हुआ संकट

तेजिंदर सिंह, दलजीत सिंह और अंकुश सिंह ने अपने रोइंग करियर की शुरुआत दोराहा सेंटर से की थी। सेंटर बंद होने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखने के लिए बठिंडा रोइंग सेंटर का रुख किया।

लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उपकरणों की कमी के कारण सेंटर बंद था। इसके बाद खिलाड़ियों ने फिरोजपुर रोइंग सेंटर से संपर्क किया, लेकिन वहां भी उन्हें इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा।

लगातार दो सेंटरों से निराशा मिलने के बाद खिलाड़ियों के सामने प्रशिक्षण जारी रखने का संकट पैदा हो गया।

जसवीर सिंह ने बढ़ाया मदद का हाथ

खिलाड़ियों की स्थिति की जानकारी पंजाब रोइंग एसोसिएशन के महासचिव जसवीर सिंह तक पहुंची। उन्होंने खिलाड़ियों को मोगा स्थित अपने सेंटर पर बुलाया और उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की।

तेजिंदर सिंह, दलजीत सिंह और अंकुश सिंह पिछले करीब तीन महीनों से मोगा में प्रशिक्षण ले रहे थे। जसवीर सिंह ने अपने निजी संसाधनों से खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, डाइट और रहने की व्यवस्था की।

जसवीर सिंह ने कहा कि सेंटर बंद होने की वजह से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का करियर खत्म होते हुए नहीं देखा जा सकता था। उनके अनुसार, दोराहा सेंटर बंद होने के बाद खिलाड़ी बिना किसी सुविधा के रह गए थे, इसलिए मोगा में उन्हें जरूरी प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध कराया गया।

मोगा की ट्रेनिंग ने दिलाया राष्ट्रीय मंच पर पदक

तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह ने मोगा में मिली सुविधाओं का भरपूर फायदा उठाया। तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद दोनों खिलाड़ियों ने कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल किया।

तेजिंदर और दलजीत ने अपनी सफलता का श्रेय जसवीर सिंह के सहयोग को दिया। खिलाड़ियों के मुताबिक, मोगा लाने के बाद उन्होंने उनकी ट्रेनिंग, भोजन और रहने की व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा। इसी सहयोग से वे राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर पदक जीत सके।

पंजाब में रोइंग सेंटरों की स्थिति पर सवाल

जसवीर सिंह ने पंजाब में रोइंग खेल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में फिलहाल केवल दो रोइंग सेंटर ही व्यावहारिक रूप से सक्रिय हैं—रोपड़ और मोगा।

उनके अनुसार, रोपड़ ही एकमात्र पूर्ण रूप से विकसित रोइंग सेंटर है, जबकि मोगा में भी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। खिलाड़ियों के लिए उपकरणों की व्यवस्था करने में स्थानीय लोगों और प्रवासी भारतीयों की मदद लेनी पड़ती है।

कई बार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और अन्य जरूरतों का खर्च भी निजी स्तर पर उठाना पड़ता है।

बठिंडा और फिरोजपुर सेंटर उपकरणों के अभाव में बंद

जसवीर सिंह के मुताबिक, बठिंडा और फिरोजपुर के रोइंग सेंटरों में पर्याप्त उपकरण नहीं हैं। इसी वजह से दोनों सेंटर फिलहाल प्रभावी रूप से काम नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अमृतसर का रोइंग सेंटर भी अभी शुरू नहीं हुआ है। उनका दावा है कि पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में पंजाब राष्ट्रीय स्तर पर पांचवें स्थान पर खिसक गया है।

उनके अनुसार, यदि खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण और उपकरण मिलें तो पंजाब आसानी से राष्ट्रीय स्तर पर पहले या दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है।

प्रतिभा की कमी नहीं, सुविधाओं की जरूरत

जसवीर सिंह ने कहा कि पंजाब में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। समस्या खिलाड़ियों को लगातार प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

दोराहा के खिलाड़ियों की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही सहयोग और प्रशिक्षण मिलने पर पंजाब के युवा राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।

Key Highlights:

  • दोराहा रोइंग सेंटर के पूर्व प्रशिक्षु तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह ने सिल्वर मेडल जीते।
  • दोनों ने 27वीं नेशनल सब-जूनियर रोइंग चैंपियनशिप में पदक हासिल किए।
  • प्रतियोगिता कोलकाता में आयोजित हुई।
  • एकमजोत सिंह ने पंजाब के लिए गोल्ड मेडल जीता।
  • सिमरन कौर और महकप्रीत कौर ने ब्रॉन्ज मेडल जीते।
  • दोराहा सेंटर बंद होने के बाद खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए परेशानी हुई।
  • बठिंडा और फिरोजपुर सेंटर उपकरणों की कमी के कारण बंद बताए गए।
  • जसवीर सिंह ने खिलाड़ियों को मोगा सेंटर में प्रशिक्षण की सुविधा दी।
  • खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, डाइट और रहने की व्यवस्था निजी संसाधनों से की गई।
  • पंजाब में रोपड़ और मोगा को ही सक्रिय रोइंग सेंटर बताया गया है।
  • अमृतसर का रोइंग सेंटर अभी शुरू नहीं हुआ है।

FAQ Section:

  1. तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह ने कौन सा पदक जीता?
    दोनों खिलाड़ियों ने 27वीं नेशनल सब-जूनियर रोइंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता।
  2. राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप कहां आयोजित हुई?
    प्रतियोगिता कोलकाता में आयोजित की गई थी।
  3. दोराहा सेंटर बंद होने के बाद खिलाड़ियों ने कहां प्रशिक्षण लिया?
    जसवीर सिंह की मदद से खिलाड़ियों ने पिछले करीब तीन महीनों से मोगा रोइंग सेंटर में प्रशिक्षण लिया।
  4. पंजाब के अन्य खिलाड़ियों ने कौन से पदक जीते?
    एकमजोत सिंह ने गोल्ड मेडल, जबकि सिमरन कौर और महकप्रीत कौर ने ब्रॉन्ज मेडल जीते।
  5. बठिंडा और फिरोजपुर रोइंग सेंटर क्यों बंद हैं?
    जसवीर सिंह के अनुसार, दोनों सेंटरों में पर्याप्त उपकरण नहीं होने के कारण वे प्रभावी रूप से काम नहीं कर रहे हैं।
  6. पंजाब में कितने रोइंग सेंटर फिलहाल सक्रिय बताए गए हैं?
    जसवीर सिंह के अनुसार, रोपड़ और मोगा ही व्यावहारिक रूप से सक्रिय सेंटर हैं, जबकि रोपड़ को एकमात्र पूर्ण रूप से विकसित सेंटर बताया गया है।

Conclusion:

दोराहा रोइंग सेंटर बंद होने के बाद सुविधाओं के लिए संघर्ष करने वाले तेजिंदर सिंह और दलजीत सिंह की राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल जीतने की उपलब्धि पंजाब की खेल प्रतिभा और खिलाड़ियों के जज्बे को दर्शाती है। मोगा में मिले प्रशिक्षण और निजी सहयोग ने दोनों खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के लिए तैयार किया। हालांकि, पंजाब के रोइंग सेंटरों में उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा अभी भी गंभीर है। यदि राज्य में प्रशिक्षण केंद्रों को पर्याप्त संसाधन और आधुनिक सुविधाएं मिलें, तो पंजाब के रोइंग खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

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Edited By: Atul Sharma

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