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हरियाणा के युवक की ‘GripX Hand’ को ₹30 लाख की फंडिंग, सस्ती कृत्रिम हाथ तकनीक में बड़ी सफलता
FICCI–Mercedes-Benz ने मुनिश कुमार के स्टार्टअप को चुना, दिव्यांगों के लिए किफायती बायोनिक हाथ बनाने पर जोर
भिवानी के सिवाड़ा गांव के मुनिश कुमार की विकसित ‘GripX Hand’ को ₹30 लाख की फंडिंग मिली है। यह तकनीक महंगे आयातित कृत्रिम हाथों का सस्ता और प्रभावी विकल्प है, जो दिव्यांगों के जीवन को आसान बनाएगी।
भिवानी जिले के सिवाड़ा गांव के एक युवक के आविष्कार से प्रभावित होकर FICCI–Mercedes-Benz India ने उसके प्रोडक्ट ‘GripX Hand’ को ₹30 लाख की फंडिंग के लिए चुना है। यह नवाचार उन्नत कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेटिक्स) को भारतीय मरीजों के लिए सस्ता और सुलभ बनाने पर केंद्रित है।
यह फंडिंग ‘भारत इनोवेशन एंड बिजनेस आइडियाज चैलेंज 2026’ नामक राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और नवाचारों को बढ़ावा देना है।
मुनिश कुमार, जिन्होंने गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (GJUST) से एमटेक और पीएचडी पूरी की है, ने इस कृत्रिम हाथ को विकसित किया और इसे केंद्र सरकार से पेटेंट भी कराया है।
अब Mercedes-Benz ने उनके डीप-टेक स्टार्टअप ‘Exobot Dynamics’ को ₹30 लाख की फंडिंग देने की पेशकश की है। इस कंपनी ने 20 दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान की है, जिन्हें यह डिवाइस मुफ्त में प्रदान किया जाएगा, ताकि उनका जीवन आसान हो सके।
मुनिश कुमार ने बताया कि उनके पिता ने 2013 में एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए थे। उस समय वह छात्र थे और अपने पिता की कठिनाइयों को देखकर उन्होंने एक ऐसा उपकरण बनाने का निर्णय लिया, जो प्रभावी होने के साथ-साथ किफायती भी हो।
उन्होंने कहा, “मैंने 2019 में GJUST में पीएचडी करते समय इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। बाद में इसे पेटेंट मिला और कई स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटरों ने इसे मान्यता दी।”
यह प्रोजेक्ट IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर, I-Hub Foundation for Cobotics (IHFC), SACC और COEP के भाऊ इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों द्वारा समर्थित रहा है। इसके अलावा इसे BIRAC, DST-NIDHI, NCPEDP और MeitY जैसे संगठनों का भी सहयोग मिला।
मुनिश कुमार ने बताया कि उनका स्टार्टअप FICCI-Mercedes-Benz Bharat Innovation and Business Ideas Challenge 2026 के विजेताओं में शामिल हुआ है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाले नवाचारों को पहचानता है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने एक बड़ी समस्या का समाधान किया है—महंगे और सीमित पहुंच वाले बायोनिक हाथ। जहां आयातित बायोनिक हाथों की कीमत ₹8 लाख से ₹50 लाख तक होती है, वहीं Exobot का ‘GripX’ डिवाइस मांसपेशियों के संकेतों (myoelectric technology) के जरिए काम करता है और काफी सस्ता है।
उन्होंने बताया कि यह डिवाइस हल्का है, इसमें उंगलियों और कलाई की उन्नत मूवमेंट्स, बेहतर बैटरी बैकअप और बेहतर फिटिंग की सुविधा है। यह विदेशी उपकरणों की तुलना में लगभग दो गुना सस्ता है।
