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हरियाणा का ‘बास्केटबॉल गांव’ आहर: 200 से ज्यादा राष्ट्रीय खिलाड़ी, 60 से अधिक को खेल कोटे से मिली सरकारी नौकरी
1968 में शुरू हुआ बास्केटबॉल का सफर आज गांव की पहचान बन चुका है; लड़कियों ने भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम
पानीपत जिले के इसराना विधानसभा क्षेत्र का आहर गांव बास्केटबॉल की नर्सरी के रूप में पहचान बना चुका है। गांव ने 200 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं, जिनमें करीब 20 लड़कियां शामिल हैं। 60 से अधिक खिलाड़ियों को खेल प्रदर्शन के आधार पर सरकारी नौकरी भी मिली है।
हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित आहर गांव ने खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर इसराना विधानसभा क्षेत्र का यह गांव बास्केटबॉल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है।
गांव से अब तक 200 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी निकल चुके हैं। इनमें करीब 20 लड़कियां भी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने देश और प्रदेश के विभिन्न स्तरों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर गांव का नाम रोशन किया है।
खास बात यह है कि 60 से अधिक खिलाड़ियों को बास्केटबॉल में शानदार प्रदर्शन के आधार पर सरकारी नौकरी भी हासिल हुई है। यानी गांव में खेल सिर्फ पहचान और सम्मान का माध्यम नहीं रहा, बल्कि कई परिवारों के लिए रोजगार और बेहतर भविष्य का जरिया भी बना है।1968 में शुरू हुआ बास्केटबॉल का सफर
आहर में बास्केटबॉल की शुरुआत वर्ष 1968 में हुई थी। गांव के बास्केटबॉल कोच और निवासी दीपक शर्मा के अनुसार, उस समय करनाल जिले के पोपड़ा गांव के PTI सेवा राम की तैनाती आहर के स्कूल में हुई थी।
उन्होंने स्कूल के मैदान में बास्केटबॉल शुरू कराया। इसके बाद वर्ष 1970 में अलूपुर गांव के PTI मंगल राम भी गांव से जुड़े। उन्होंने करीब दो दशक तक मैदान और खिलाड़ियों की देखरेख की।
गांव की मिट्टी से निकले पहले राष्ट्रीय खिलाड़ी
जयपाल सिंह आहर के पहले राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी माने जाते हैं। उन्होंने गांव के कच्चे मैदान पर अभ्यास करते हुए अपनी पहचान बनाई।
इसके बाद खिलाड़ियों की एक लंबी श्रृंखला तैयार होती गई। अत्तर सिंह ने आठ राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लिया, जबकि वेद प्रकाश ने सात राष्ट्रीय खेलों में राज्य और देश का प्रतिनिधित्व किया।
खेल के दम पर मिली सरकारी नौकरी
आहर के कई खिलाड़ियों ने बास्केटबॉल में अपनी उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवाओं में स्थान बनाया।
गांव के खिलाड़ियों की उपलब्धियों में:
- वेद प्रकाश SAI कोच बने और राज राइफल्स से हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में जुड़े।
- दलीप सिंह BSF में शामिल हुए और इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
- चांद राम SSB में भर्ती हुए और Assistant Sub-Inspector के पद से रिटायर हुए।
- रणजीत कटारिया ने 12 राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेले और SSB में चयनित हुए। वे इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए।
- राम चंदर बास्केटबॉल उपलब्धियों के आधार पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए और इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए।
दलीप सिंह अब गांव में लड़कियों को बास्केटबॉल का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
1972 के बाद चरम पर पहुंचा खेल
दीपक शर्मा के अनुसार, वर्ष 1972 के बाद आहर और पूरे हरियाणा में बास्केटबॉल का प्रभाव काफी बढ़ा। गांव में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ती गई और मैदान पर रोजाना अभ्यास का सिलसिला मजबूत हुआ।
हालांकि, 1998 से 2008 के बीच इस खेल को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। PTI मंगल राम के सेवानिवृत्त होने के बाद मैदान की देखभाल और खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण देने वाला कोई नहीं रहा। इसके चलते गांव में बास्केटबॉल धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा।
2005 में फिर शुरू हुई नई कहानी
गांव में बास्केटबॉल को दोबारा मजबूत करने में खुशविंदर खैंची उर्फ मस्ता खैंची और अनूप खैंची की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दीपक शर्मा के अनुसार, वर्ष 2005 में यूनिवर्सिटी मेडलिस्ट मस्ता खैंची और उस समय 11वीं कक्षा में पढ़ रहे अनूप खैंची ने गांव के मैदान को फिर से सक्रिय किया।
दीपक शर्मा भी 2008 में उनके साथ जुड़े और मस्ता व अनूप से बास्केटबॉल सीखना शुरू किया। उन्होंने कहा कि दोनों के योगदान को गांव में बास्केटबॉल को पुनर्जीवित करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
मस्ता बाद में भारतीय सेना में शामिल हुए, जबकि अनूप 2008 में अपनी खेल उपलब्धियों के आधार पर ऑस्ट्रेलिया चले गए।
सिर्फ बास्केटबॉल नहीं, कई खेलों में पहचान
आहर की खेल पहचान केवल बास्केटबॉल तक सीमित नहीं है। गांव में कबड्डी, सर्कल कबड्डी और ग्रीको-रोमन कुश्ती में भी खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई है।
लड़कों ने बास्केटबॉल और कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है, वहीं गांव की लड़कियों ने भी हैंडबॉल और बास्केटबॉल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
खेल मैदान से रोजगार तक पहुंचा सफर
गांव के लोगों के मुताबिक, खेल ने आहर को सिर्फ पहचान नहीं दी बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी भूमिका निभाई है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों ने खेल के साथ शिक्षा और सरकारी सेवाओं में भी उपलब्धियां हासिल की हैं।
गांव में आज भी शाम होते ही बच्चे, युवा और बड़े खेल मैदान की ओर पहुंच जाते हैं। बास्केटबॉल के प्रति लोगों का जुनून इस गांव की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
Key Highlights:
- आहर गांव को बास्केटबॉल की नर्सरी के रूप में पहचान मिली है।
- गांव से 200 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकले हैं।
- करीब 20 लड़कियों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
- 60 से अधिक खिलाड़ियों को खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी नौकरी मिली।
- आहर में बास्केटबॉल की शुरुआत 1968 में हुई थी।
- PTI सेवा राम ने स्कूल के मैदान से खेल की शुरुआत कराई।
- 1970 में PTI मंगल राम ने प्रशिक्षण और मैदान की जिम्मेदारी संभाली।
- जयपाल सिंह गांव के पहले राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बने।
- 1998 से 2008 के बीच बास्केटबॉल को मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा।
- 2005 में मस्ता खैंची और अनूप खैंची ने खेल को दोबारा मजबूत किया।
- गांव में कबड्डी, सर्कल कबड्डी और ग्रीको-रोमन कुश्ती में भी प्रतिभाएं सामने आईं।
- लड़कियों ने हैंडबॉल और बास्केटबॉल में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं।
FAQ Section:
Q1. आहर गांव किस खेल के लिए प्रसिद्ध है?
Ans: पानीपत जिले का आहर गांव मुख्य रूप से बास्केटबॉल के लिए प्रसिद्ध है और इसे बास्केटबॉल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है।
Q2. आहर गांव से कितने राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकले हैं?
Ans: गांव से 200 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल चुके हैं, जिनमें करीब 20 लड़कियां भी शामिल हैं।
Q3. कितने खिलाड़ियों को खेल के आधार पर सरकारी नौकरी मिली?
Ans: गांव के 60 से अधिक खिलाड़ियों को बास्केटबॉल में प्रदर्शन के आधार पर सरकारी नौकरी मिली है।
Q4. आहर में बास्केटबॉल की शुरुआत कब हुई?
Ans: आहर में बास्केटबॉल की शुरुआत 1968 में हुई थी। स्कूल में तैनात PTI सेवा राम ने खेल की शुरुआत कराई थी।
Q5. आहर में बास्केटबॉल को दोबारा किसने मजबूत किया?
Ans: वर्ष 2005 में खुशविंदर खैंची उर्फ मस्ता खैंची और अनूप खैंची ने गांव के बास्केटबॉल मैदान और खेल गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Q6. आहर के खिलाड़ी किन अन्य खेलों में भी आगे हैं?
Ans: आहर में कबड्डी, सर्कल कबड्डी और ग्रीको-रोमन कुश्ती में भी खिलाड़ी अपनी पहचान बना चुके हैं। लड़कियों ने हैंडबॉल और बास्केटबॉल में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया है।
Conclusion:
पानीपत का आहर गांव इस बात की मिसाल है कि मजबूत खेल संस्कृति और लगातार मेहनत किस तरह एक छोटे से गांव को राष्ट्रीय पहचान दिला सकती है। 1968 में स्कूल के मैदान से शुरू हुआ बास्केटबॉल का सफर आज 200 से अधिक राष्ट्रीय खिलाड़ियों और 60 से ज्यादा सरकारी नौकरियों तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि गांव की बेटियां भी खेल के मैदान में बराबरी से आगे बढ़ रही हैं। आहर की कहानी ग्रामीण भारत में खेल प्रतिभाओं को सही अवसर मिलने की ताकत को दिखाती है।
