तेजा सिंह समुंदरी की 100वीं पुण्यतिथि पर GNDU में मंचित हुआ ‘सेवा संघर्ष दा राह’, संघर्ष और सुधारों की विरासत को किया याद

अकालीन नेता और SGPC के संस्थापक सदस्य के जीवन पर आधारित नाटक में दिखा गुरुद्वारा सुधार आंदोलन का इतिहास; तरनजीत सिंह संधू ने युवाओं से इतिहास पढ़ने की अपील की

On

प्रमुख सिख सुधारक, अकाली नेता और SGPC के संस्थापक सदस्य रहे तेजा सिंह समुंदरी की मृत्यु के 100 वर्ष पूरे होने पर GNDU में उनके जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में उनके योगदान और सिख सुधार आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया गया।

 

प्रमुख सिख सुधारक, अकाली नेता और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे तेजा सिंह समुंदरी की विरासत को उनकी 100वीं पुण्यतिथि के अवसर पर याद किया गया। सोमवार को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) में उनके जीवन और संघर्ष पर आधारित विशेष नाट्य प्रस्तुति आयोजित की गई।

सेवा संघर्ष दा राह’ नामक इस नाटक का निर्देशन जाने-माने रंगकर्मी केवल धालीवाल ने किया, जबकि इसका मंचन मंच रंगमंच के कलाकारों ने किया। नाटक के माध्यम से तेजा सिंह समुंदरी के जीवन, सामाजिक योगदान और सिख सुधार आंदोलन में उनकी भूमिका को सामने रखा गया।

सैन्य सेवा से सिख सुधार आंदोलन तक का सफर

नाटक में तेजा सिंह समुंदरी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रस्तुत किया गया। उनका जन्म 20 फरवरी 1882 को अमृतसर के राय का बुर्ज में हुआ था।

उन्होंने सैन्य सेवा से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में सिख सुधार आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। उन्होंने लोगों को संगठित कर गुरुद्वारों पर ब्रिटिश नियंत्रण समाप्त करने के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

SGPC के गठन में निभाई अहम भूमिका

तेजा सिंह समुंदरी ने गुरुद्वारा प्रबंधन और प्रशासन में सुधार के लिए संघर्ष किया। उनके योगदान को SGPC के गठन और कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना से भी जोड़ा जाता है।

कार्यक्रम में मौजूद उनके पौत्र और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि 1920 से 1926 का दौर पंजाब और सिख नेतृत्व के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रहा।

1920 से 1926 का दौर क्यों था खास?

तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि इस अवधि में धार्मिक सुधारों से लेकर सामाजिक बदलाव और स्वतंत्रता आंदोलन तक कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं।

उन्होंने इस दौर की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी समय:

  • 1920 में SGPC की स्थापना हुई।
  • गुरुद्वारा सुधार और धार्मिक सुधार आंदोलनों को गति मिली।
  • जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज मजबूत हुई।
  • 1921 में ननकाना साहिब हत्याकांड हुआ, जिसमें 156 सिखों की जान गई।
  • चाबियां दा मोर्चा, गुरु का बाग मोर्चा और जैतो मोर्चा जैसे आंदोलन हुए।
  • सिख गुरुद्वारा अधिनियम अस्तित्व में आया।
  • कई वरिष्ठ अकाली नेता जननेताओं के रूप में उभरे।

संधू ने कहा कि ब्रिटिश अधिकारियों ने भी उस दौर में उभर रहे जननेताओं के प्रभाव को स्वीकार किया था।

अमृतसर बना सामाजिक और सामुदायिक एकता का केंद्र

तरनजीत सिंह संधू के अनुसार, यह वह दौर भी था जब अमृतसर सामुदायिक एकता और शक्ति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा।

उन्होंने कहा कि उस समय लोगों में मौजूद असंतोष धीरे-धीरे ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी भावना में बदल गया। आंदोलन के नेताओं ने अपने विचारों और सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास किया।

1926 में महिलाओं को मिला मतदान का अधिकार

संधू ने कहा कि SGPC के 1926 के पहले चुनावों में महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया गया था। उन्होंने इसे उस समय के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अहिंसक तरीके से आंदोलन चलाना और सामाजिक-धार्मिक सुधारों को आगे बढ़ाना आसान नहीं था।

युवाओं से इतिहास से प्रेरणा लेने की अपील

तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि तेजा सिंह समुंदरी द्वारा शिक्षा, समानता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को दिए गए महत्व की आज भी प्रासंगिकता है।

उन्होंने युवाओं से इतिहास को गंभीरता से पढ़ने और अतीत के संघर्षों से भविष्य के लिए प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

संधू ने कहा कि तेजा सिंह समुंदरी, मास्टर तारा सिंह, भाई वीर सिंह और रुचि राम साहनी जैसे नेताओं की राजनीतिक और सामाजिक विरासत को युवाओं तक पहुंचाना जरूरी है।

विश्वविद्यालयों में शोध बढ़ाने पर जोर

उन्होंने विश्वविद्यालयों से ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर अधिक शोध करने और शोध सामग्री को विद्यार्थियों तक आसानी से उपलब्ध कराने की अपील की।

संधू के मुताबिक, अपनी ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए जरूरी है कि शोध को केवल अकादमिक दायरे तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे छात्रों और आम लोगों तक भी पहुंचाया जाए।

उच्च शिक्षा में कौशल आधारित प्रशिक्षण की जरूरत

कार्यक्रम के दौरान संधू ने उच्च शिक्षा में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों के लिए बेहतर मेंटॉरशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता भी बताई, ताकि शिक्षा युवाओं को रोजगार और भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर सके।

Key Highlights:

  • तेजा सिंह समुंदरी की मृत्यु के 100 वर्ष पूरे होने पर GNDU में विशेष कार्यक्रम।
  • उनके जीवन पर आधारित ‘सेवा संघर्ष दा राह’ नाटक प्रस्तुत किया गया।
  • नाटक का निर्देशन रंगकर्मी केवल धालीवाल ने किया।
  • मंच रंगमंच के कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
  • तेजा सिंह समुंदरी का जन्म 20 फरवरी 1882 को अमृतसर के राय का बुर्ज में हुआ था।
  • उन्होंने सिख गुरुद्वारा सुधार आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • SGPC के गठन और गुरुद्वारा प्रशासन में सुधारों से उनका नाम जुड़ा रहा।
  • तरनजीत सिंह संधू ने 1920-1926 के दौर को पंजाब के इतिहास का महत्वपूर्ण काल बताया।
  • ननकाना साहिब हत्याकांड, चाबियां दा मोर्चा, गुरु का बाग और जैतो मोर्चा जैसे आंदोलनों का उल्लेख किया गया।
  • 1926 के SGPC चुनावों में महिलाओं को मतदान अधिकार दिए जाने की बात कही गई।
  • युवाओं से इतिहास पढ़ने और उससे प्रेरणा लेने की अपील की गई।
  • उच्च शिक्षा में कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।

FAQ Section:

Q1. तेजा सिंह समुंदरी कौन थे?

Ans: तेजा सिंह समुंदरी प्रमुख सिख सुधारक, अकाली नेता और SGPC के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने गुरुद्वारा सुधार आंदोलन और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Q2. तेजा सिंह समुंदरी का जन्म कब हुआ था?

Ans: उनका जन्म 20 फरवरी 1882 को अमृतसर के राय का बुर्ज में हुआ था।

Q3. GNDU में कौन सा नाटक प्रस्तुत किया गया?

Ans: तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और संघर्ष पर आधारित ‘सेवा संघर्ष दा राह’ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसका निर्देशन केवल धालीवाल ने किया।

Q4. 1920 से 1926 का दौर क्यों महत्वपूर्ण था?

Ans: इस अवधि में SGPC का गठन, गुरुद्वारा सुधार आंदोलन, ननकाना साहिब हत्याकांड, चाबियां दा मोर्चा, गुरु का बाग और जैतो मोर्चा जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं।

Q5. तरनजीत सिंह संधू ने युवाओं से क्या अपील की?

Ans: उन्होंने युवाओं से इतिहास का अध्ययन करने, प्रमुख नेताओं की विरासत को समझने और उनके आदर्शों से भविष्य के लिए प्रेरणा लेने की अपील की।

Conclusion:

तेजा सिंह समुंदरी की 100वीं पुण्यतिथि पर GNDU में आयोजित नाट्य प्रस्तुति ने सिख सुधार आंदोलन के उस महत्वपूर्ण दौर को फिर से जीवंत किया, जिसने पंजाब के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक इतिहास को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम में उनकी सेवा, संघर्ष, शिक्षा और समानता की विचारधारा को याद करते हुए युवाओं को इतिहास से जुड़ने का संदेश दिया गया। साथ ही, विश्वविद्यालयों में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर शोध और उच्च शिक्षा में कौशल आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत भी रेखांकित की गई।Screenshot_661

Edited By: Atul Sharma

खबरें और भी हैं

पंजाब में तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी पहल, 15 बसें बुधवार को होंगी रवाना; खाटू श्याम से हरिद्वार-ऋषिकेश तक की यात्रा

Advertisement

नवीनतम

पंजाब में तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी पहल, 15 बसें बुधवार को होंगी रवाना; खाटू श्याम से हरिद्वार-ऋषिकेश तक की यात्रा पंजाब में तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी पहल, 15 बसें बुधवार को होंगी रवाना; खाटू श्याम से हरिद्वार-ऋषिकेश तक की यात्रा
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत पंजाब के विभिन्न जिलों से 15 बसें बुधवार को धार्मिक स्थलों के लिए रवाना...
पंजाब के सरकारी स्कूलों में छात्रों के लिए रोजाना 20 मिनट का ‘मेंटल हेल्थ पीरियड’, 31 अगस्त तक चलेगा कार्यक्रम
Junior Asia Cup 2026: पंजाब के चार खिलाड़ियों का भारतीय जूनियर हॉकी टीम में चयन, जालंधर के तीन खिलाड़ी शामिल
Gorakhpur Green City Road: CM योगी की बड़ी सौगात, ₹69.58 करोड़ की सड़क का लोकार्पण; जाम से मिलेगी राहत
चरखी दादरी में थाने के सामने दिनदहाड़े गैंगवार, SUV पर 30 से ज्यादा राउंड फायरिंग; 7 घायल
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software