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ICAR–NDRI करनाल की बड़ी सफलता: 100 गांवों में नस्ल सुधार मॉडल से डेयरी उत्पादन में बड़ा बदलाव
मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से 39,803 पशुओं पर काम, 16,200 गर्भधारण, ग्रामीण आय बढ़ाने में मिल रही मदद
ICAR–NDRI करनाल के वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में नस्ल सुधार का सफल मॉडल लागू किया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 100 गांवों में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से डेयरी उत्पादन और पशुपालन आय में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
डेयरी सेक्टर में वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR–NDRI), करनाल के वैज्ञानिकों ने पशुपालन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत विकसित नस्ल सुधार मॉडल को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के 100 गांवों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
इस मॉडल का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले पशुधन का विकास कर दूध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण किसानों की आय में सुधार करना है।
कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से 39,803 पशुओं पर काम
वैज्ञानिकों के अनुसार इस परियोजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाले ICAR–NDRI के सीमेन (वीर्य) का उपयोग कर कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination - AI) तकनीक अपनाई गई।इस अभियान में कुल 39,803 गायों और भैंसों पर AI किया गया, जिनमें से लगभग 16,200 पशु गर्भवती हुए और अधिकांश ने स्वस्थ बछड़ों को जन्म दिया।
बेहतर नस्ल और उत्पादन क्षमता में सुधार
वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक से पैदा हुए पशु न केवल बेहतर वृद्धि दिखा रहे हैं, बल्कि उनकी परिपक्वता भी अपेक्षाकृत जल्दी हो रही है।
इसके परिणामस्वरूप किसानों को बेहतर नस्ल के पशु कम लागत में उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे डेयरी व्यवसाय अधिक लाभकारी बन रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला मॉडल
ICAR–NDRI के निदेशक डॉ. दीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना वर्ष 2022 में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत शुरू की गई थी और हाल ही में सफलतापूर्वक पूरी की गई।
यह कार्य मुजफ्फरनगर के ललुकेरी गांव स्थित NDRI के किसान सेवा केंद्र के माध्यम से संचालित हुआ, जहां से 25 प्रशिक्षित AI कार्यकर्ताओं ने 100 गांवों में सेवाएं दीं।
इस परियोजना पर लगभग 3.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार
वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। इससे—
- दूध उत्पादन में वृद्धि होगी
- डेयरी उद्योग मजबूत होगा
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी
- किसानों की आय में सुधार होगा
राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने की संभावना
ICAR–NDRI का मानना है कि इस तरह की नस्ल सुधार परियोजनाओं को राज्य सरकारें अपने स्तर पर अपनाएं, तो पशुपालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव है।
यह मॉडल तकनीक, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण भारत में डेयरी उत्पादन को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है।
Key Highlights:
- ICAR–NDRI ने 100 गांवों में नस्ल सुधार मॉडल लागू किया।
- 39,803 पशुओं पर कृत्रिम गर्भाधान (AI) किया गया।
- 16,200 गायें और भैंसें गर्भवती हुईं।
- परियोजना पर ₹3.75 करोड़ खर्च हुए।
- ग्रामीण आय और दूध उत्पादन में सुधार के संकेत।
FAQ Section
Q1. यह परियोजना किसके तहत चलाई गई?
उत्तर: यह परियोजना राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत ICAR–NDRI द्वारा चलाई गई।
Q2. कितने गांवों में यह मॉडल लागू किया गया?
उत्तर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के 100 गांवों में।
Q3. कितने पशुओं पर AI किया गया?
उत्तर: कुल 39,803 गायों और भैंसों पर।
Q4. कितने पशु गर्भवती हुए?
उत्तर: लगभग 16,200 पशु गर्भवती हुए।
Q5. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: पशुओं की नस्ल सुधारकर दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना।
Conclusion
ICAR–NDRI करनाल का यह नस्ल सुधार मॉडल भारत के डेयरी सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ग्रामीण भागीदारी के संयोजन से यह परियोजना न केवल पशुपालन को लाभकारी बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।

