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हरियाणा के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन और ब्लास्टिंग पर रोक लगाने की मांग, किसान सभा ने सुप्रीम कोर्ट की समिति को सौंपा ज्ञापन
भिवानी और चरखी दादरी में पहाड़ियों को नुकसान, भूजल स्तर गिरने और प्रदूषण के आरोप; नियम तोड़ने वाली खनन कंपनियों के पट्टे रद्द करने की मांग
हरियाणा के भिवानी और चरखी दादरी जिलों में अरावली पहाड़ियों में कथित अवैध खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ अखिल भारतीय किसान सभा ने आवाज उठाई है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति से खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने, नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के पट्टे रद्द करने और प्रभावित किसानों व ग्रामीणों को मुआवजा देने की मांग की है।
अरावली में खनन रोकने के लिए किसान सभा की मांग
हरियाणा के भिवानी और चरखी दादरी जिलों में अरावली पहाड़ियों में कथित अवैध खनन और ब्लास्टिंग को लेकर विवाद बढ़ गया है। अखिल भारतीय किसान सभा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति से मांग की है कि नियमों के विरुद्ध हो रहे खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए और निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाली खनन कंपनियों के पट्टे रद्द किए जाएं।
किसान सभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने भिवानी जिले के रामलवास गांव में समिति के दौरे के दौरान अपनी मांगें रखीं। संगठन ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों से पहाड़ियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही भूजल स्तर में गिरावट, पानी के दूषित होने, कृषि भूमि प्रभावित होने और खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर खतरे को लेकर चिंता जताई गई।
दस वर्षों से जारी खनन पर उठाए सवाल
भिवानी में किसान सभा के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक दशक में बड़े पैमाने पर खनन के कारण दोनों जिलों की अरावली पर्वतमाला गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है।
प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि कुछ खनन गतिविधियों में निर्धारित नियमों की अनदेखी की जा रही है। इसमें विस्फोटों के इस्तेमाल और भूजल स्तर से नीचे तक खनन किए जाने के आरोप भी शामिल हैं।
किसान सभा ने समिति से आग्रह किया कि खनन गतिविधियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि नियमों के पालन और पर्यावरणीय नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन हो सके।
डाडम और रामलवास में गहरी खुदाई का दावा
किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने खनन की गहराई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। संगठन के अनुसार, भिवानी जिले के डाडम क्षेत्र में लगभग 800 फीट और रामलवास में करीब 400 फीट तक खनन किए जाने का दावा किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रभावित गांवों में कुछ कुओं के सूखने और भूजल दूषित होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा खनन से जुड़े हादसों तथा ब्लास्टिंग के कारण आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई गई।
हालांकि, खनन की बताई गई गहराई, नियमों के उल्लंघन और पर्यावरणीय नुकसान से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
भूजल, खेती और ग्रामीण जीवन पर खतरे की आशंका
किसान सभा ने कहा कि अरावली पर्वतमाला भूजल के पुनर्भरण, वर्षा के पैटर्न, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। संगठन के मुताबिक, पहाड़ियों के नष्ट होने से खेती, पेयजल की उपलब्धता और ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने खनन क्षेत्रों में उड़ने वाली धूल और प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई। किसान सभा का आरोप है कि खनन के आसपास रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले श्रमिकों को सिलिकोसिस, टीबी और अन्य सांस संबंधी बीमारियों का खतरा हो सकता है।
संगठन ने इन आशंकाओं के मद्देनजर पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का भी आकलन कराने की मांग की है।
प्रभावित किसानों और परिवारों को मुआवजा देने की मांग
किसान सभा ने समिति से आग्रह किया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में मकानों, कृषि भूमि, पशुधन, पेयजल स्रोतों और भूजल को हुए नुकसान का निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए।
संगठन ने कहा कि जांच में जिन किसानों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि हो, उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाली खनन कंपनियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और अवैध गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
प्रतिनिधिमंडल में चरखी दादरी जिला अध्यक्ष रणधीर कुंगर, सुमेर सांगवान, जय सिंह सिहाग, राजेंद्र सिंह डोहकी और सीटू नेता कमलेश भैरवी भी शामिल थे।
Key Highlights
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अखिल भारतीय किसान सभा ने अरावली में कथित अवैध खनन और ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
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भिवानी और चरखी दादरी जिलों में खनन कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए।
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डाडम में लगभग 800 फीट और रामलवास में 400 फीट तक खनन होने का दावा किया गया।
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किसान सभा ने भूजल की कमी, पानी के दूषित होने और कृषि भूमि को नुकसान की आशंका जताई।
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खनन से प्रभावित मकानों, खेतों, पशुधन और पेयजल स्रोतों का निष्पक्ष आकलन कराने की मांग।
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प्रभावित किसानों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की अपील।
FAQ Section
1. अरावली में खनन को लेकर किसान सभा ने क्या मांग की है?
किसान सभा ने कथित अवैध खनन और ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खनन पट्टे रद्द करने की मांग की है।
2. किन जिलों में खनन को लेकर चिंता जताई गई है?
यह मामला हरियाणा के भिवानी और चरखी दादरी जिलों की अरावली पहाड़ियों से जुड़ा है।
3. डाडम और रामलवास में कितनी गहराई तक खनन होने का दावा है?
किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, डाडम में लगभग 800 फीट और रामलवास में करीब 400 फीट तक खनन होने का दावा किया गया है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
4. खनन से पर्यावरण पर क्या असर पड़ने की आशंका जताई गई है?
किसान सभा ने पहाड़ियों के क्षरण, भूजल पुनर्भरण पर असर, पानी के दूषित होने, कृषि भूमि को नुकसान और धूल-प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई है।
5. प्रभावित लोगों के लिए क्या मांग की गई है?
संगठन ने मकानों, खेतों, पशुधन और पेयजल स्रोतों को हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर प्रभावित किसानों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है।
Conclusion
भिवानी और चरखी दादरी में अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर उठे सवालों ने पर्यावरण संरक्षण, भूजल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा है। अखिल भारतीय किसान सभा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति से तत्काल कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। अब मामले में आगे की कार्रवाई और खनन संबंधी आरोपों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

