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महिलाओं के सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, समानता और भागीदारी पर जोर
करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में आयोजित सेमिनार में वित्तीय और राजनीतिक समावेशन पर हुई चर्चा
करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में महिलाओं के वित्तीय और राजनीतिक सशक्तिकरण पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने समानता और भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में गुरुवार को ‘महिलाओं का वित्तीय और राजनीतिक समावेशन: समानता, सुरक्षा और सशक्तिकरण के मार्ग’ विषय पर एक दिवसीय बहु-विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
इस संगोष्ठी का आयोजन इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC), महिला विकास केंद्र (WDC) और अर्थशास्त्र विभाग द्वारा हरियाणा के उच्च शिक्षा महानिदेशक के निर्देशों पर संयुक्त रूप से किया गया। इसमें क्षेत्र के प्रतिष्ठित शोधकर्ता, नौकरशाह, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
यह संगोष्ठी महिलाओं के वित्तीय और राजनीतिक क्षेत्रों में समग्र भागीदारी की आवश्यकता पर चर्चा का एक प्रभावी मंच बनी। इसे समानता और सशक्तिकरण के दो प्रमुख स्तंभों के रूप में पहचाना गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य प्रो. (डॉ.) आशिमा गाखर ने किया। उन्होंने कहा कि केवल प्रतीकात्मक भागीदारी से आगे बढ़कर वास्तविक और संरचनात्मक सशक्तिकरण की जरूरत है, जो सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं पर आधारित हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को जीवन के हर क्षेत्र में निर्णय लेने की शक्ति और अवसर मिलने चाहिए।
संगोष्ठी की विषय-वस्तु अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष और संयोजक डॉ. सारिका चौधरी ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण के लिए वित्तीय पहुंच, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक सम्मान का समन्वय आवश्यक है, जिसे संस्थागत और नीतिगत समर्थन मिलना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त, करनाल नगर निगम (KMC) ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि महिलाओं से संबंधित नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और संस्थागत तंत्र जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) नीरा वर्मा, चेयरपर्सन, अर्थशास्त्र विभाग और डीन (शैक्षणिक कार्य), गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और लोकतांत्रिक समावेशन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए।
उद्घाटन सत्र का एक महत्वपूर्ण आकर्षण ई-एब्सट्रैक्ट पुस्तक का विमोचन रहा, जिसमें देशभर से प्राप्त शोध पत्रों का संकलन शामिल था।
प्लेनरी सत्र में मुख्य अतिथि ज्योति मल्होत्रा, एडिटर-इन-चीफ, ट्रिब्यून समूह ने मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं से जुड़े मुद्दों को संतुलित और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करे। उन्होंने भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकारों की जानकारी देते हुए उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और निडर होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. (डॉ.) वनीता ढींगरा, निदेशक, महिला अध्ययन शोध केंद्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने नीतियों और प्रशासनिक ढांचे का विश्लेषण प्रस्तुत किया और भारतीय महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियों से छात्रों को प्रेरित किया।
समापन सत्र में प्राचार्य आशिमा गाखर ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया, जिससे यह संगोष्ठी शैक्षणिक रूप से समृद्ध और प्रभावशाली बनी।

