नूंह में अब सफेद मूली से आगे बढ़ने की तैयारी, किसान करेंगे जापानी-चीनी प्रीमियम किस्मों की खेती

सब्जी उत्पादन से बदली जिले की खेती की तस्वीर, किसान बेहतर बीज, तकनीकी मदद और प्रीमियम मूली की खेती के लिए विशेष सब्सिडी चाहते हैं

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नूंह के किसान पारंपरिक सफेद मूली के साथ अब जापानी, चीनी और रंगीन प्रीमियम किस्मों की खेती का प्रयोग करना चाहते हैं। किसानों का मानना है कि इन किस्मों से दिल्ली-NCR के प्रीमियम बाजारों तक पहुंच और बेहतर आमदनी के अवसर मिल सकते हैं।

 

नूंह: हरियाणा के नूंह जिले में सब्जियों की खेती ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों के फसल पैटर्न को बदलना शुरू किया है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले सब्जियों से बेहतर आमदनी की संभावनाओं को देखते हुए अब किसान एक कदम और आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। सफेद मूली की पारंपरिक खेती के बाद किसान अब जापानी, चीनी और अन्य प्रीमियम रंगीन मूली की किस्मों का उत्पादन आजमाना चाहते हैं।

किसानों की मांग है कि सरकार उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रदर्शन प्लॉट और प्रीमियम किस्मों की खेती के लिए विशेष सब्सिडी उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर सरकारी सहायता मिलने से नूंह के किसान नई किस्मों को सफलतापूर्वक बड़े स्तर पर अपना सकते हैं।

नूंह में मूली की खेती का बड़ा आधार

हरियाणा के बागवानी विभाग के 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, मेवात क्षेत्र में 3,540 हेक्टेयर में मूली की खेती हुई और इसका उत्पादन 32,497 मीट्रिक टन रहा। इसी अवधि में टमाटर की खेती 2,148 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जिससे 21,071 टन उत्पादन दर्ज किया गया।

जिले में सभी सब्जियों को मिलाकर करीब 31,824 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई और कुल उत्पादन 6.08 लाख टन से अधिक रहा। यही मजबूत सब्जी उत्पादन आधार अब किसानों को प्रीमियम और अलग-अलग किस्मों की ओर बढ़ने का आधार दे रहा है।

दिल्ली-NCR की मंडियों तक पहुंच रही नूंह की मूली

मूली उत्पादक किसान मुबीन के मुताबिक, वह जुलाई में अगेती मूली की बुवाई शुरू करते हैं और सितंबर के आसपास इसकी कटाई शुरू हो जाती है। नूंह से बड़ी मात्रा में मूली फरीदाबाद और दिल्ली की आजादपुर क्षेत्र से जुड़ी मंडी व्यवस्था के बजाय यहां दिए गए स्रोत के अनुसार दिल्ली की ओखला मंडी तक भी पहुंचती है।

मुबीन के अनुसार, मौजूदा समय में अच्छी गुणवत्ता वाली साफ मूली करीब 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। उनका कहना है कि अच्छी फसल से किसान को लगभग 1.25 लाख से 1.50 लाख रुपये प्रति एकड़ तक का रिटर्न मिल सकता है। ये आंकड़े किसान द्वारा बताए गए मौजूदा बाजार भाव और अनुमानित रिटर्न पर आधारित हैं।

अब रंगीन और विदेशी किस्मों पर नजर

किसानों की दिलचस्पी अब ऐसी मूली की किस्मों में बढ़ रही है जो पारंपरिक सफेद मूली से काफी अलग हैं। एशियाई किस्मों में लंबी सफेद डायकोन मूली प्रमुख है, जिसका संबंध जापान और चीन से जोड़ा जाता है।

कुछ चीनी किस्मों में हरे कंधे और गुलाबी या मैजेंटा रंग का अंदरूनी हिस्सा देखने को मिलता है। वहीं वॉटरमेलन रेडिश, जिसे Chinese Red Meat या Shinrimei भी कहा जाता है, बाहर से हल्के रंग की लेकिन अंदर से गहरे गुलाबी रंग की होती है।

भारतीय प्रीमियम किस्मों पर भी किसानों की नजर

नूंह के किसानों के लिए विविधीकरण का विकल्प केवल विदेशी किस्मों तक सीमित नहीं है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने भी दिल्ली-NCR की परिस्थितियों के लिए कई मूली की किस्में विकसित की हैं।

Pusa Jamuni और Pusa Gulabi

Pusa Jamuni बैंगनी रंग के गूदे वाली मूली की किस्म है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी उपज करीब 50 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है।

इसी तरह Pusa Gulabi पूरी तरह गुलाबी रंग के गूदे वाली किस्म है और इसकी रिपोर्टेड उपज करीब 60 टन प्रति हेक्टेयर है। दोनों किस्में दिल्ली-NCR की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं।

Pusa Chetki और Japanese White

IARI की सूची में Pusa Chetki भी शामिल है, जो करीब 40 से 50 दिनों में तैयार होने वाली किस्म है। वहीं Japanese White लंबी और बेलनाकार जड़ों वाली मूली है, जिसकी रिपोर्टेड उपज करीब 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

प्रीमियम बाजार किसानों के लिए खोल सकती हैं नई संभावनाएं

किसानों के लिए नई किस्मों की खेती का मकसद केवल मूली का रंग या आकार बदलना नहीं है। उनका लक्ष्य ऐसे बाजारों तक पहुंच बनाना है जहां प्रीमियम सब्जियों की मांग हो।

इन किस्मों के जरिए किसान पारंपरिक थोक मंडियों पर निर्भरता कम करते हुए ऑर्गेनाइज्ड रिटेल, रेस्तरां और शहरी उपभोक्ताओं को लक्षित कर सकते हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि बड़े स्तर पर यह बदलाव तभी संभव होगा जब उन्हें भरोसेमंद बीज, तकनीकी प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था मिले।

Key Highlights:

  • नूंह के किसान पारंपरिक सफेद मूली से आगे बढ़कर प्रीमियम किस्मों की खेती चाहते हैं।
  • किसान जापानी और चीनी मूली की किस्मों के ट्रायल की मांग कर रहे हैं।
  • 2024-25 में मेवात में 3,540 हेक्टेयर में मूली की खेती हुई।
  • इसी अवधि में मूली का उत्पादन 32,497 मीट्रिक टन दर्ज किया गया।
  • जिले में सभी सब्जियों का क्षेत्रफल 31,824 हेक्टेयर रहा।
  • Pusa Jamuni और Pusa Gulabi जैसी भारतीय किस्में भी किसानों के लिए विकल्प हैं।
  • किसान प्रमाणित बीज, तकनीकी प्रशिक्षण, सब्सिडी और बाजार से जुड़ाव चाहते हैं।
  • प्रीमियम मूली से संगठित रिटेल, रेस्तरां और शहरी बाजारों में नई संभावनाएं बन सकती हैं।

FAQ Section:

Q. नूंह के किसान अब किस तरह की मूली की खेती करना चाहते हैं?
किसान जापानी, चीनी और अन्य रंगीन एवं प्रीमियम मूली की किस्मों की खेती के ट्रायल करना चाहते हैं।

Q. 2024-25 में नूंह में कितने क्षेत्र में मूली की खेती हुई?
हरियाणा बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में मेवात क्षेत्र में 3,540 हेक्टेयर में मूली की खेती हुई।

Q. Pusa Jamuni मूली की खासियत क्या है?
Pusa Jamuni बैंगनी रंग के गूदे वाली मूली की किस्म है और इसकी रिपोर्टेड उपज करीब 50 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

Q. Pusa Gulabi किस तरह की मूली है?
Pusa Gulabi गुलाबी रंग के गूदे वाली मूली की किस्म है, जिसकी रिपोर्टेड उपज करीब 60 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

Q. किसान सरकार से क्या सहायता चाहते हैं?
किसान बेहतर और प्रमाणित बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रदर्शन प्लॉट, प्रीमियम किस्मों के लिए विशेष सब्सिडी और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था चाहते हैं।

Conclusion:

नूंह में सब्जी उत्पादन के बढ़ते आधार ने किसानों को पारंपरिक फसलों से अलग नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। सफेद मूली की स्थापित खेती के बाद अब प्रीमियम और रंगीन किस्मों की ओर बढ़ने की तैयारी इसी बदलाव का अगला चरण है। यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण, शुरुआती सहायता और मजबूत बाजार संपर्क मिलता है, तो नई किस्मों की खेती नूंह के सब्जी क्षेत्र में एक संभावित नया अवसर बन सकती है।Screenshot_86

Edited By: Atul Sharma

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