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चीनी के दाम बढ़े, फिर भी गन्ना किसान परेशान; MSP ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
बढ़ती खाद, मजदूरी, सिंचाई और डीजल लागत से किसानों पर दबाव, गोहाना बैठक में तैयार हुई आंदोलन की रणनीति
चीनी की कीमतों में हालिया तेजी के बावजूद गन्ना किसानों की आमदनी और बढ़ती लागत का मुद्दा सामने आया है। किसान संगठनों ने गन्ने का MSP बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल करने समेत कई मांगें उठाई हैं।
सोनीपत: चीनी के बाजार भाव में पिछले कुछ हफ्तों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसका फायदा गन्ना किसानों तक पहुंचता नजर नहीं आ रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि खाद, मजदूरी, सिंचाई, डीजल और अन्य कृषि इनपुट की लागत लगातार बढ़ने से गन्ने की खेती किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
किसान संगठनों ने गन्ना उत्पादकों को लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य देने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि चीनी उद्योग की पूरी श्रृंखला में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने के बावजूद उन्हें उत्पादन लागत और बाजार मूल्य के अनुपात में पर्याप्त आय नहीं मिल रही है।
₹600 प्रति क्विंटल MSP की मांग
ऑल इंडिया किसान सभा के राज्य महासचिव सुमित दलाल ने गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग की है। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की C2+50 प्रतिशत लागत आधारित सिफारिश का हवाला देते हुए कहा कि किसानों को उत्पादन की पूरी लागत के ऊपर उचित लाभ मिलना चाहिए।दलाल के अनुसार, किसानों से गन्ना करीब ₹4.15 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है, जबकि बाजार में चीनी का भाव करीब ₹60 प्रति किलोग्राम बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गन्ने से एथेनॉल उत्पादन करने वाली कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि बढ़ती कृषि लागत के बीच गन्ना उत्पादकों की आय पर दबाव बना हुआ है।
गन्ने की खेती कम होने का दावा
किसान संगठन के प्रतिनिधि ने दावा किया कि राज्य में गन्ने की खेती का रुझान घट रहा है। उनके मुताबिक, बढ़ती उत्पादन लागत और किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के कारण यह फसल उत्पादकों के लिए कम लाभकारी होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार गन्ने की खेती को बढ़ावा देना चाहती है तो किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना जरूरी है।
गोहाना में किसानों ने बनाई आंदोलन की रणनीति
गन्ना किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के लिए 19 सितंबर को गोहाना, सोनीपत में राज्यस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी आंदोलन को लेकर रणनीति तैयार की गई।
किसानों ने तय किया कि सबसे पहले वे सहकारिता मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेंगे। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने सहित उनकी मांगों पर उचित कदम नहीं उठाया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
MSP के अलावा ये भी हैं प्रमुख मांगें
किसान संगठनों ने केवल गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी की मांग नहीं की है। उनकी अन्य मांगों में फसल सुरक्षा और उत्पादन से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल हैं।
सुमित दलाल के अनुसार किसानों को निम्न सुविधाएं मिलनी चाहिए:
- गन्ने की फसल में बीमारी की निगरानी के लिए चीनी मिलों की ओर से उन्नत ड्रोन उपलब्ध कराए जाएं।
- जलभराव और बीमारियों से फसल खराब होने पर पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
- उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएं।
- गन्ने की कटाई के लिए किसानों को मशीनें उपलब्ध कराई जाएं।
- मिलों तक गन्ना पहुंचाने में होने वाली देरी दूर की जाए।
- किसानों को गन्ने का पर्याप्त और लाभकारी मूल्य मिले।
- किसानों को चीनी नियंत्रित दरों पर उपलब्ध कराने की पुरानी व्यवस्था पर भी विचार किया जाए।
- गन्ना किसानों के लिए व्यापक और किसान-केंद्रित नीति तैयार की जाए।
बढ़ती लागत ने बढ़ाई किसानों की चिंता
गन्ना किसान सुनील ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में फसल की लागत में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन कृषि आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। उन्होंने बताया कि मजदूरी में बढ़ोतरी और फसल में बीमारी के कारण नुकसान का जोखिम किसानों की परेशानी और बढ़ा रहा है।
उनके मुताबिक, गन्ना उत्पादक मौजूदा परिस्थितियों में आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं और अब राज्य सरकार से सहायता की उम्मीद कर रहे हैं।
किसानों का सवाल- लाभकारी मूल्य के बिना कैसे बढ़ेगा रकबा?
एक अन्य गन्ना किसान बिजेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार और चीनी मिलें किसानों से गन्ने का रकबा बढ़ाने की अपील कर रही हैं। लेकिन उनका सवाल है कि यदि उत्पादन की पूरी लागत को ध्यान में रखते हुए किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं दिया जाएगा तो वे गन्ने की खेती का क्षेत्रफल कैसे बढ़ाएंगे।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गन्ने का रकबा बढ़ाना चाहती है तो उसे तत्काल गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी करनी चाहिए।
Key Highlights:
- चीनी के बाजार भाव में हालिया तेजी के बावजूद गन्ना किसान बढ़ती लागत से परेशान हैं।
- किसान संगठनों ने गन्ने का MSP ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग की।
- मांग को स्वामीनाथन आयोग की C2+50% लागत आधारित सिफारिश से जोड़ा गया।
- खाद, मजदूरी, सिंचाई और डीजल की लागत बढ़ने का हवाला दिया गया।
- 19 सितंबर को गोहाना में गन्ना किसानों की राज्यस्तरीय बैठक हुई।
- किसानों ने सहकारिता मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बनाई है।
- मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई।
- किसानों ने फसल सुरक्षा के लिए ड्रोन, मुआवजा और कटाई मशीनों की मांग की।
- गन्ने का रकबा बढ़ाने से पहले लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग उठी।
FAQ Section:
Q. गन्ना किसान कितने MSP की मांग कर रहे हैं?
किसान संगठनों ने गन्ने का MSP बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
Q. किसान MSP बढ़ाने की मांग क्यों कर रहे हैं?
किसानों का कहना है कि खाद, मजदूरी, सिंचाई, डीजल और अन्य कृषि लागत बढ़ने के कारण मौजूदा कीमत पर गन्ने की खेती आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो रही है।
Q. गन्ना किसानों की बैठक कहां हुई?
राज्यस्तरीय गन्ना किसान बैठक 19 सितंबर को गोहाना, सोनीपत में आयोजित की गई।
Q. किसानों की MSP के अलावा क्या मांगें हैं?
किसानों ने फसल रोगों की निगरानी के लिए ड्रोन, फसल नुकसान का पर्याप्त मुआवजा, उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और कटाई मशीनों की उपलब्धता समेत कई मांगें रखी हैं।
Q. सरकार ने गन्ने का रकबा बढ़ाने के लिए क्या कहा है?
किसानों के अनुसार, राज्य सरकार और चीनी मिलें गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही हैं। किसान चाहते हैं कि इसके साथ लाभकारी मूल्य भी सुनिश्चित किया जाए।
Conclusion:
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद गन्ना किसानों की बढ़ती उत्पादन लागत का मुद्दा अब प्रमुखता से सामने आया है। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल MSP के साथ फसल सुरक्षा, मुआवजे और मशीनरी जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। गोहाना में हुई बैठक के बाद किसानों ने पहले सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से बातचीत करने और मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन का रास्ता अपनाने की बात कही है।
