रेवाड़ी सिविल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था से मरीज परेशान, डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती

200 बेड वाले अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़; एक ही रेडियोलॉजिस्ट पर अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन का जिम्मा, पुरानी इमारत का पुनर्निर्माण भी अटका

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रेवाड़ी के सर शादी लाल जिला सिविल अस्पताल में बुनियादी ढांचे, दवाओं और स्टाफ की कमी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। पुरानी इमारत के पुनर्निर्माण का काम भी लंबे समय से लंबित है।

 

हरियाणा के रेवाड़ी स्थित सर शादी लाल जिला सिविल अस्पताल में खराब बुनियादी ढांचे और पर्याप्त सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार अधिक रहने के बावजूद डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता जरूरत के मुताबिक नहीं है।

अस्पताल के पुराने ब्लॉक के पुनर्निर्माण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन तकनीकी और आधिकारिक अड़चनों के कारण यह काम अब तक आगे नहीं बढ़ पाया है।

एक रेडियोलॉजिस्ट पर बड़ी जिम्मेदारी

अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों, खासकर लैब टेक्नीशियन और रेडियोग्राफर की संख्या मरीजों की भीड़ के अनुपात में कम बताई जा रही है।

फिलहाल अस्पताल में केवल एक रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध है। उसे रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों के अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन करने पड़ते हैं। इसके चलते इन जांचों की जरूरत वाले मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

हालांकि अस्पताल में एक और रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की गई है, लेकिन उसे कोसली/कोरियावास मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। इससे रेवाड़ी अस्पताल में उपलब्ध विशेषज्ञ संसाधनों पर दबाव और बढ़ गया है।

200 बेड, लेकिन मरीजों की संख्या ज्यादा

मरीजों और उनके तीमारदारों ने अस्पताल में दवाओं की कमी की भी शिकायत की है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के अनुसार, अस्पताल में 200 बेड हैं, लेकिन मरीजों की संख्या को देखते हुए इनकी क्षमता ideally दोगुनी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों के सिविल अस्पतालों में भी देखने को मिलती है। उनके मुताबिक, अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाने की सरकारी प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है।

कागजों पर पद भरे, अस्पताल में डॉक्टर कम

डॉ. अनिल यादव ने बताया कि रेवाड़ी सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के सभी स्वीकृत पद कागजों पर भरे हुए हैं और कोई पद रिक्त नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल में वास्तव में मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों की संख्या काफी कम है।

उनके अनुसार, रेवाड़ी सिविल अस्पताल में मूल रूप से तैनात छह डॉक्टर फिलहाल कोरियावास और भिवानी के मेडिकल कॉलेजों में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं।

इसके अलावा कई विशेषज्ञ डॉक्टरों को नियमित रूप से मेडिको-लीगल मामलों, प्रशासनिक कार्यों और VIP ड्यूटी में लगाया जाता है। इससे OPD में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों पर काम का अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी

HCMSA अध्यक्ष के अनुसार, निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवा की तुलना में काफी अधिक वेतन पैकेज मिलते हैं। यही वजह है कि बहुत कम विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आने के लिए इच्छुक होते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवा में बनाए रखना चाहती है तो उन्हें बेहतर प्रोत्साहन और अच्छा कार्य वातावरण उपलब्ध कराना होगा।

दवाओं और नई इमारत की जरूरत

अस्पताल में मरीजों की मदद और उन्हें सुविधाएं दिलाने का काम करने वाले NGO सेवा भारती के स्वयंसेवक नरेंद्र कुमार शर्मा ने भी दवाओं की कमी का मुद्दा उठाया है।

उन्होंने अस्पताल के लिए नई इमारत की तत्काल जरूरत बताई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।

बारिश में और बढ़ जाती है मरीजों की परेशानी

नरेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक, अस्पताल निचले इलाके में स्थित है। बारिश के दौरान अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर पानी जमा हो जाता है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल के अंदर पहुंचने में काफी परेशानी होती है।

बारिश के मौसम में जलभराव के कारण अस्पताल तक पहुंचना विशेष रूप से मुश्किल हो जाता है, जिससे पहले से परेशान मरीजों की दिक्कत और बढ़ जाती है।

Key Highlights:

  • रेवाड़ी के सर शादी लाल जिला सिविल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी।
  • पुराने अस्पताल भवन के पुनर्निर्माण का काम लंबे समय से अटका हुआ है।
  • अस्पताल में फिलहाल 200 बेड की क्षमता है, जिसे बढ़ाने की जरूरत बताई गई।
  • केवल एक रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन का काम संभाल रहा है।
  • दूसरा रेडियोलॉजिस्ट कोरियावास मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर है।
  • छह डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं।
  • मेडिको-लीगल, प्रशासनिक और VIP ड्यूटी से मरीजों की OPD सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव।
  • मरीजों और तीमारदारों ने दवाओं की कमी की शिकायत की।
  • अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और बारिश के दौरान जलभराव भी चिंता का विषय।
  • HCMSA ने डॉक्टरों को सरकारी सेवा में बनाए रखने के लिए बेहतर प्रोत्साहन और कार्य वातावरण की मांग की।

FAQ Section:

Q1. रेवाड़ी सिविल अस्पताल में कितने बेड हैं?
A1. सर शादी लाल जिला सिविल अस्पताल में वर्तमान में 200 बेड हैं। HCMSA के अनुसार, मरीजों की संख्या को देखते हुए बेड क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है।

Q2. अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की क्या स्थिति है?
A2. फिलहाल केवल एक रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध है, जो बड़ी संख्या में अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन करता है। दूसरा रेडियोलॉजिस्ट मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर है।

Q3. रेवाड़ी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी क्यों बताई गई है?
A3. HCMSA के अनुसार, छह डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों में प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों को मेडिको-लीगल, प्रशासनिक और VIP ड्यूटी में भी लगाया जाता है।

Q4. अस्पताल की इमारत को लेकर क्या समस्या है?
A4. अस्पताल के पुराने ब्लॉक के पुनर्निर्माण की जरूरत है, लेकिन तकनीकी और आधिकारिक कारणों से यह काम लंबे समय से अटका हुआ है।

Q5. बारिश के दौरान अस्पताल में क्या समस्या होती है?
A5. अस्पताल निचले इलाके में होने के कारण बारिश का पानी प्रवेश द्वार पर जमा हो जाता है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को अंदर आने में परेशानी होती है।

Conclusion:

रेवाड़ी सिविल अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच अंतर स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा रहा है। डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति, विशेषज्ञों पर अतिरिक्त ड्यूटी, सीमित रेडियोलॉजी सुविधा, दवाओं की कमी और पुराने भवन की समस्या को दूर किए बिना मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। अस्पताल के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन को मजबूत करना अब प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जरूरत बन गया है।Screenshot_1359

Edited By: Atul Sharma

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