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कुरुक्षेत्र में पराली जलाने पर जीरो टॉलरेंस की तैयारी, 680 से अधिक नोडल अधिकारी मैदान में तैनात
धान कटाई सीजन से पहले प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने की घटनाएं शून्य करने का लक्ष्य रखा; किसान संगठनों ने भी सहयोग का भरोसा दिया
कुरुक्षेत्र प्रशासन और कृषि विभाग ने धान की पराली जलाने पर रोक के लिए 680 से अधिक नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। किसान संगठनों ने मशीनरी और समय पर पराली उठाने की मांग की है।
धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले कुरुक्षेत्र जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन ने जिले में 680 से अधिक नोडल अधिकारियों को मैदान में उतारा है और इस सीजन में खेतों में आग लगने की घटनाओं को शून्य तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्रशासन की इस मुहिम को किसान संगठनों का भी समर्थन मिला है। किसान नेताओं ने किसानों से धान की पराली नहीं जलाने की अपील की है। हालांकि, उन्होंने सरकार से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध कराने और खेतों से तैयार पराली की गांठें समय पर उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
680 से अधिक नोडल अधिकारी संभालेंगे जिम्मेदारी
धान कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध कराने के लिए 680 से अधिक नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।प्रशासन का उद्देश्य केवल पराली जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों को समय पर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है, ताकि खेत खाली करने की जल्दबाजी में उन्हें फसल अवशेष जलाने की जरूरत न पड़े।
किसान संगठनों ने भी दिया सहयोग का भरोसा
भारतीय किसान यूनियन (चरूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धान के अवशेषों को खेत की मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की सेहत बनाए रखने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि पराली जलाना मिट्टी और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक है। हालांकि, इसके साथ सरकार को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनें उपलब्ध करानी होंगी।
मशीनरी और पराली उठाने की व्यवस्था जरूरी
गुरनाम सिंह के मुताबिक, यदि किसानों को समय पर पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध हों और खेतों से तैयार गांठें समय पर उठा ली जाएं तो किसानों के सामने पराली जलाने की स्थिति नहीं आएगी।
इसलिए प्रशासन और कृषि विभाग के लिए मशीनरी की उपलब्धता के साथ-साथ पराली की गांठों के समय पर उठान की व्यवस्था करना भी अहम होगा।
15 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है धान कटाई
BKU (शहीद भगत सिंह) के प्रवक्ता तेजवीर सिंह ने बताया कि धान की शुरुआती किस्मों की कटाई करीब 15 सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है।
उन्होंने खास तौर पर आलू उत्पादक किसानों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि धान की कटाई और अगली फसल की बुवाई के बीच उनके पास समय का अंतर काफी कम होता है। ऐसे किसानों को खेत जल्दी खाली करने के लिए समय पर प्रशासनिक और तकनीकी सहायता की जरूरत होगी।
तीन दिन में पराली उठाने की मांग
तेजवीर सिंह ने कृषि विभाग से ब्लॉक स्तर पर पर्याप्त फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने आलू उत्पादक किसानों की पहचान कर उनके खेतों से पराली हटाने में मदद करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में नोडल अधिकारी रणनीति तैयार करें और खेतों से पराली की गांठें तीन दिन के भीतर उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
किसानों के लिए 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन की मांग
किसान संगठन ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की मांग भी उठाई है।
किसान नेताओं का कहना है कि पराली प्रबंधन की व्यवस्था जितनी आसान और समयबद्ध होगी, किसानों के लिए खेतों में फसल अवशेष जलाने से बचना उतना ही संभव होगा।
Key Highlights:
- कुरुक्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करने का लक्ष्य।
- 680 से अधिक नोडल अधिकारी खेतों में निगरानी और समन्वय करेंगे।
- किसान संगठनों ने प्रशासन के अभियान को समर्थन दिया।
- किसानों से धान की पराली नहीं जलाने की अपील।
- फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध कराने की मांग।
- खेतों से पराली की गांठें समय पर उठाने की व्यवस्था पर जोर।
- शुरुआती धान किस्मों की कटाई करीब 15 सितंबर से शुरू होने की संभावना।
- आलू उत्पादकों के लिए धान कटाई के बाद खेत खाली करने की समयसीमा महत्वपूर्ण।
- ब्लॉक स्तर पर मशीनरी और नोडल अधिकारियों की रणनीति बनाने की मांग।
- किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ फसल अवशेष प्रबंधन प्रोत्साहन देने की मांग।
FAQ Section:
Q1. कुरुक्षेत्र प्रशासन ने पराली को लेकर क्या लक्ष्य रखा है?
A1. प्रशासन ने इस सीजन में खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को शून्य करने का लक्ष्य रखा है।
Q2. पराली जलाने पर रोक के लिए कितने नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं?
A2. कुरुक्षेत्र में 680 से अधिक नोडल अधिकारियों को मैदान में तैनात किया गया है।
Q3. धान की कटाई कब शुरू होने की उम्मीद है?
A3. किसान संगठन के अनुसार, शुरुआती धान की किस्मों की कटाई करीब 15 सितंबर से शुरू हो सकती है।
Q4. किसान संगठनों ने सरकार से क्या मांग की है?
A4. किसान संगठनों ने पर्याप्त फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी, पराली की गांठों का समय पर उठान और किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने की मांग की है।
Q5. पराली को खेत में मिलाने का क्या फायदा बताया गया है?
A5. BKU चरूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह के अनुसार, धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की सेहत बनाए रखने में मदद मिलती है।
Conclusion:
कुरुक्षेत्र में धान कटाई से पहले प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। 680 से अधिक नोडल अधिकारियों की तैनाती के साथ प्रशासन का लक्ष्य इस सीजन में खेतों में आग की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करना है। किसान संगठनों ने भी सहयोग का भरोसा दिया है, लेकिन उनका कहना है कि किसानों को समय पर मशीनरी, पराली उठाने की सुविधा और उचित प्रोत्साहन मिलना जरूरी है।
