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अंबाला में धान की सीधी बिजाई को झटका! 25 हजार एकड़ का लक्ष्य, सिर्फ 8,097 एकड़ में हुई DSR खेती की पुष्टि
पिछले तीन साल में लगातार बढ़ा DSR का रकबा, लेकिन 2026-27 में आई मामूली गिरावट; किसानों को मिल रहा 4,500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन।
हरियाणा के अंबाला जिले में धान की सीधी बिजाई (DSR) का रकबा 2026-27 सीजन में घटकर 8,097 एकड़ रह गया है, जबकि लक्ष्य 25,000 एकड़ निर्धारित किया गया था। कृषि विभाग के अनुसार, 18,750 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए पंजीकरण हुआ, लेकिन भौतिक सत्यापन में कम क्षेत्र में DSR की पुष्टि हुई। इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को 4,500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन दिया जाता है।
हरियाणा के अंबाला जिले में धान की सीधी बिजाई यानी डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच 2026-27 के सीजन में इसके रकबे में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ने के बाद इस बार 25,000 एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल 8,097 एकड़ में DSR खेती की पुष्टि हुई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में 18,750 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए किसानों ने पंजीकरण कराया था। हालांकि, खेतों के भौतिक सत्यापन के बाद वास्तविक रकबा इससे काफी कम पाया गया। विभाग ने इसके पीछे बुवाई के दौरान प्रतिकूल मौसम और जलवायु परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है।
H2: तीन साल तक लगातार बढ़ा DSR का रकबा
अंबाला जिले में धान की सीधी बिजाई का चलन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा था। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि किसानों ने इस तकनीक को अपनाने के साथ सरकारी प्रोत्साहन का भी लाभ लिया।
वर्ष 2023-24 में लगभग 4,691 एकड़ में DSR खेती की गई थी। इस दौरान किसानों को 1.87 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि मिली।
वर्ष 2024-25 में DSR का रकबा बढ़कर करीब 6,100 एकड़ हो गया और किसानों को 2.44 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रोत्साहन के रूप में दी गई।
इसके बाद 2025-26 में क्षेत्रफल बढ़कर 8,653 एकड़ पहुंच गया। उस सीजन में किसानों को 3.89 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोत्साहन मिला।
हालांकि, 2026-27 में सत्यापन के बाद यह आंकड़ा घटकर 8,097 एकड़ रह गया।
H2: किसानों को प्रति एकड़ 4,500 रुपये का प्रोत्साहन
राज्य सरकार धान की सीधी बिजाई को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 4,500 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इसका उद्देश्य पानी की बचत करना, खेती की लागत कम करना और भूजल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
चालू सीजन में पंजीकरण का दायरा 18,750 एकड़ से अधिक था, लेकिन सत्यापन में केवल 8,097 एकड़ में इस तकनीक के इस्तेमाल की पुष्टि हुई। इससे निर्धारित लक्ष्य और वास्तविक खेती के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
H2: बराड़ा ब्लॉक DSR खेती में सबसे आगे
अंबाला जिले के विभिन्न ब्लॉकों में DSR खेती का रकबा अलग-अलग दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बराड़ा ब्लॉक सबसे आगे रहा।
ब्लॉकवार DSR क्षेत्रफल इस प्रकार है:
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बराड़ा: लगभग 2,573 एकड़
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अंबाला सिटी: लगभग 1,785 एकड़
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साहा: लगभग 1,670 एकड़
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अंबाला कैंट: 1,093 एकड़ से अधिक
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नारायणगढ़: लगभग 803 एकड़
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शहजादपुर: 171 एकड़ से अधिक
इन आंकड़ों से पता चलता है कि जिले के कुछ क्षेत्रों में किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, लेकिन पूरे जिले में इसका विस्तार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो पाया है।
H2: क्या है धान की सीधी बिजाई तकनीक?
धान की सीधी बिजाई को Direct Seeded Rice यानी DSR कहा जाता है। पारंपरिक तरीके में पहले नर्सरी में धान की पौध तैयार की जाती है और फिर उसे खेत में रोपा जाता है। इसके विपरीत DSR तकनीक में धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं।
इस पद्धति में पौध की रोपाई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी, मजदूरी और खेती से जुड़ी अन्य लागतों में कमी आ सकती है।
H3: DSR से पानी की कितनी बचत होती है?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक रोपाई की तुलना में DSR तकनीक से लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती है। इससे भूजल संरक्षण में मदद मिलती है और सिंचाई पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है।
उपयुक्त खेत की स्थिति और सही प्रबंधन के साथ यह तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, इसका लाभ मिट्टी, मौसम, बीज की गुणवत्ता और खरपतवार नियंत्रण जैसे कारकों पर भी निर्भर करता है।
H2: खरपतवार और पैदावार की चिंता से किसान पीछे
पानी और लागत बचाने की संभावनाओं के बावजूद DSR तकनीक को अपनाने में किसानों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
खरपतवार पर नियंत्रण, बीजों का सही अंकुरण और फसल की पैदावार को लेकर चिंताएं इस तकनीक को अपनाने की गति प्रभावित करती हैं। बुवाई के समय मौसम अनुकूल नहीं रहने पर भी किसानों को परेशानी हो सकती है।
इन चुनौतियों के कारण कई किसान पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई को प्राथमिकता देते हैं।
H2: प्रतिकूल मौसम को बताया रकबा घटने का कारण
अंबाला के उपनिदेशक कृषि डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि विभाग को 18,750 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए पंजीकरण प्राप्त हुए थे, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान लगभग 8,097 एकड़ में ही DSR खेती की पुष्टि हुई।
उन्होंने कहा कि बुवाई के समय जलवायु और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इस बार रकबे में गिरावट आई। उनके अनुसार, किसान DSR तकनीक अपनाकर प्रति एकड़ लगभग 8,000 से 10,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं।
Key Highlights:
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अंबाला में 2026-27 सीजन में 8,097 एकड़ में DSR खेती की पुष्टि हुई।
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सरकार ने 25,000 एकड़ का लक्ष्य निर्धारित किया था।
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18,750 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए पंजीकरण कराया गया था।
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किसानों को DSR अपनाने पर 4,500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन मिलता है।
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2025-26 में DSR का रकबा 8,653 एकड़ था।
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बराड़ा ब्लॉक 2,573 एकड़ के साथ जिले में सबसे आगे रहा।
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DSR से पारंपरिक रोपाई की तुलना में 25-30 प्रतिशत तक पानी बचाने की संभावना है।
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खरपतवार नियंत्रण, अंकुरण और पैदावार से जुड़ी चिंताएं इसके विस्तार में बाधा हैं।
FAQ Section:
1. DSR तकनीक क्या है?
DSR यानी Direct Seeded Rice में धान की पौध को नर्सरी से खेत में रोपने के बजाय बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं।
2. अंबाला में 2026-27 में कितने एकड़ में DSR खेती हुई?
कृषि विभाग के भौतिक सत्यापन के अनुसार, लगभग 8,097 एकड़ में DSR खेती की पुष्टि हुई।
3. DSR अपनाने वाले किसानों को कितनी प्रोत्साहन राशि मिलती है?
किसानों को इस तकनीक को अपनाने पर 4,500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि मिलती है।
4. DSR तकनीक से कितना पानी बच सकता है?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक रोपाई की तुलना में DSR से लगभग 25-30 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है।
5. अंबाला में DSR का सबसे अधिक रकबा किस ब्लॉक में है?
बराड़ा ब्लॉक में लगभग 2,573 एकड़ क्षेत्र में DSR खेती दर्ज की गई, जो जिले में सबसे अधिक है।
6. इस साल अंबाला में DSR का रकबा क्यों घटा?
उपनिदेशक कृषि डॉ. वजीर सिंह के अनुसार, बुवाई के दौरान प्रतिकूल मौसम और जलवायु परिस्थितियों के कारण रकबे में गिरावट आई। खरपतवार और पैदावार संबंधी चिंताएं भी इस तकनीक को अपनाने में चुनौती बनी हुई हैं।
Conclusion:
अंबाला में धान की सीधी बिजाई का रकबा पिछले तीन वर्षों में बढ़ने के बाद 2026-27 सीजन में कुछ घट गया है। 25,000 एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले 8,097 एकड़ में ही खेती की पुष्टि होना बताता है कि DSR तकनीक को बढ़ावा देने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है। पानी और लागत बचाने की क्षमता के बावजूद किसानों की चिंताओं को दूर करना, सही तकनीकी मार्गदर्शन देना और बुवाई के अनुकूल परिस्थितियां सुनिश्चित करना इस पद्धति के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

