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हिंदी दिवस पर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में राज्य स्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता, जल्द बनेगा देश का पहला साहित्यिक केंद्र
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण व शोध पर होगा जोर, ‘हिंदी काव्यधारा’ पुस्तक का भी विमोचन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस दौरान साहित्य, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए साहित्यिक केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई।
हिंदी दिवस के अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में साहित्य और भाषा को समर्पित विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग ने संयुक्त रूप से राज्य स्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित की, जिसमें विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालय के विभागों से आए विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी काव्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए आकर्षक नकद पुरस्कार भी रखे गए थे। इसके साथ ही पुलिस विभाग के अशोक कुमार द्वारा लिखित काव्य संग्रह ‘हिंदी काव्यधारा’ का विमोचन भी किया गया।
प्रतियोगिता में विजेताओं को मिले नकद पुरस्कारकाव्य पाठ प्रतियोगिता में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 5,100 रुपये, 3,100 रुपये और 2,100 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इसके अलावा पांच प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार के रूप में 1,100 रुपये दिए गए।
देश का पहला साहित्यिक केंद्र स्थापित करने की तैयारी
कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक जिमी शर्मा ने बताया कि साहित्य अकादमी के माध्यम से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक साहित्यिक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह देश में अपनी तरह का पहला केंद्र होगा। इसका उद्देश्य साहित्य, भाषा और शोध को बढ़ावा देना होगा। केंद्र में हिंदी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण, संवर्धन तथा शोध पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
क्षेत्रीय बोलियों के संरक्षण पर रहेगा फोकस
प्रस्तावित साहित्यिक केंद्र में हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में प्रचलित विभिन्न भाषाओं और बोलियों को भी महत्व दिया जाएगा।
इनमें प्रमुख रूप से:
- कौरवी
- बांगरू
- बागड़ी
- ब्रज
- मेवाती
- अहीरवाटी
जैसी क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और शोध को बढ़ावा देने की योजना है।
हिंदी को एक दायरे में सीमित नहीं किया जा सकता: वरुण गुलाटी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी के सचिव वरुण गुलाटी ने कहा कि हिंदी को किसी एक परिभाषा या एक भाषाई स्वरूप तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंदी की विविध परंपराएं, बोलियां और भाषाई अभिव्यक्तियां अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के योगदान से विकसित हुई हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदी की इस विविधता को समझने और उसका सम्मान करने की जरूरत है। भारतेंदु हरिश्चंद्र की चर्चित पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाषा, मिट्टी, मातृभूमि और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ व्यक्ति के संबंध पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
वरुण गुलाटी ने कहा कि हिंदी दिवस केवल हिंदी भाषा को याद करने का अवसर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सोचने का भी अवसर है कि आज के जीवन में हिंदी कितनी गहराई से जुड़ी हुई है।
हिंदी लगातार विकसित होने वाली भाषा: कुलसचिव
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि हिंदी केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक समृद्ध और निरंतर विकसित होने वाली भाषा है।
उन्होंने कहा कि हिंदी ने समय के साथ दूसरी भाषाओं के शब्दों को सहजता से अपनाया है और उन्हें अपनी भाषाई संरचना का हिस्सा बनाया है। यह हिंदी की व्यापकता और स्वीकार करने की क्षमता को दर्शाता है।
Key Highlights:
- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर राज्य स्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता हुई।
- हिंदी विभाग और युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग ने संयुक्त रूप से आयोजन किया।
- विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालय विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
- प्रथम पुरस्कार 5,100 रुपये, द्वितीय 3,100 रुपये और तृतीय 2,100 रुपये रहा।
- पांच सांत्वना पुरस्कार 1,100 रुपये प्रत्येक के दिए गए।
- अशोक कुमार की काव्य पुस्तक ‘हिंदी काव्यधारा’ का विमोचन हुआ।
- विश्वविद्यालय में साहित्य अकादमी के माध्यम से साहित्यिक केंद्र स्थापित करने की योजना है।
- केंद्र हिंदी के साथ कौरवी, बांगरू, बागड़ी, ब्रज, मेवाती और अहीरवाटी जैसी बोलियों पर भी काम करेगा।
- साहित्य, भाषा और शोध को बढ़ावा देना केंद्र का प्रमुख उद्देश्य होगा।
FAQ Section:
Q: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर क्या कार्यक्रम आयोजित हुआ?
A: हिंदी दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न संस्थानों और विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
Q: काव्य पाठ प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार कितना था?
A: प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 5,100 रुपये का पुरस्कार दिया गया।
Q: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रस्तावित साहित्यिक केंद्र का उद्देश्य क्या है?
A: साहित्यिक केंद्र का उद्देश्य साहित्य, भाषा और शोध को बढ़ावा देना तथा हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं व बोलियों के संरक्षण और संवर्धन पर काम करना है।
Q: किन क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों पर केंद्र में काम होगा?
A: कौरवी, बांगरू, बागड़ी, ब्रज, मेवाती और अहीरवाटी सहित क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण व शोध पर ध्यान दिया जाएगा।
Q: ‘हिंदी काव्यधारा’ के लेखक कौन हैं?
A: ‘हिंदी काव्यधारा’ काव्य संग्रह के लेखक पुलिस विभाग के अशोक कुमार हैं।
Conclusion:
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह ने हिंदी साहित्य के साथ क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल को सामने रखा। प्रस्तावित साहित्यिक केंद्र के माध्यम से भाषा, साहित्य और शोध को एक व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदी को विविध भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं से समृद्ध होने वाली जीवंत भाषा के रूप में देखने पर जोर दिया।
