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हरियाणा में पराली जलाने पर लगेगी सख्ती, इस जिले में 4.5 लाख एकड़ धान से 9 लाख MT पराली का अनुमान
फसल कटाई से पहले प्रशासन की तैयारियां तेज, 750 अधिकारी-कर्मचारी करेंगे निगरानी; किसानों को पराली प्रबंधन के लिए ₹1,200 प्रति एकड़ की मदद
धान की कटाई शुरू होने से पहले कृषि विभाग ने पराली प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार खेतों में आग की घटनाओं को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 9 लाख मीट्रिक टन पराली निकलने का अनुमान है।
धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले हरियाणा के संबंधित जिले में प्रशासन ने पराली प्रबंधन को लेकर कमर कस ली है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का लक्ष्य इस सीजन में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य तक लाना है। इसके लिए किसानों को पराली जलाने के बजाय इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
4.5 लाख एकड़ में धान की खेती, 9 लाख MT पराली का अनुमान
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जिले में करीब 4.5 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती हुई है। कटाई के बाद लगभग 9 लाख मीट्रिक टन (MT) फसल अवशेष निकलने का अनुमान है।
विभाग ने पहले से ही इस अवशेष के इस्तेमाल और प्रबंधन की योजना तैयार कर ली है, ताकि किसानों को पराली जलाने की जरूरत न पड़े।पशु चारे और पैकेजिंग उद्योग में इस्तेमाल होगी पराली
अनुमानित पराली में से करीब 1 लाख MT का इस्तेमाल पशु चारे और पैकेजिंग से जुड़े कारखानों में किया जाएगा।
वहीं, लगभग 1.5 लाख MT धान का भूसा किसानों द्वारा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के पानीपत स्थित 2G एथेनॉल प्लांट को उपलब्ध कराया जाएगा। बाकी फसल अवशेष को विभिन्न इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीकों के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा।
IOCL ने बनाए 7 कलेक्शन सेंटर
अधिकारियों के अनुसार, IOCL ने धान के भूसे की खरीद के लिए जिले में 7 कलेक्शन सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा अलग-अलग गांवों में किसानों और किसान समूहों की ओर से करीब 70 अन्य कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं।
इन केंद्रों के जरिए पराली को खेतों से बाहर निकालकर उसके वैकल्पिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
पराली जलाने की निगरानी के लिए 750 अधिकारी-कर्मचारी तैनात
जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से करीब 750 कर्मचारियों और अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा के अनुसार, गांव, ब्लॉक, उपमंडल और जिला स्तर पर समितियां गठित की गई हैं।
इन समितियों में संबंधित:
- एसडीएम
- तहसीलदार
- बीडीपीओ
- कृषि अधिकारी
- बागवानी अधिकारी
- पशुपालन विभाग के अधिकारी
- प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी
शामिल हैं। पुलिस कर्मियों को भी इन टीमों का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि पराली जलाने के मामलों में कानून का सख्ती से पालन कराया जा सके।
किसानों को मिलेगी ₹1,200 प्रति एकड़ सहायता
उप निदेशक कृषि डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि IOCL को आवश्यक मात्रा में धान का भूसा उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। विभिन्न स्थानों पर कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं और संबंधित क्षेत्रों के किसानों को इनके बारे में जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने के बजाय स्टबल मैनेजमेंट अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से ₹1,200 प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी।
Key Highlights:
- जिले में करीब 4.5 लाख एकड़ में धान की खेती।
- कटाई के बाद करीब 9 लाख MT पराली निकलने का अनुमान।
- लगभग 1 लाख MT पराली पशु चारे और पैकेजिंग उद्योग में इस्तेमाल होगी।
- करीब 1.5 लाख MT पराली IOCL के पानीपत 2G एथेनॉल प्लांट को दी जाएगी।
- IOCL ने 7 कलेक्शन सेंटर बनाए हैं।
- किसानों और किसान समूहों ने करीब 70 अतिरिक्त सेंटर स्थापित किए हैं।
- पराली प्रबंधन की निगरानी के लिए करीब 750 अधिकारी-कर्मचारी तैनात।
- पराली जलाने के बजाय प्रबंधन अपनाने पर ₹1,200 प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान।
- प्रशासन का लक्ष्य इस सीजन में फार्म-फायर की घटनाओं को शून्य करना है।
FAQ Section:
पराली प्रबंधन के लिए किसानों को कितनी सहायता मिलेगी?
पराली जलाने के बजाय स्टबल मैनेजमेंट अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से ₹1,200 प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी।
जिले में कितनी पराली निकलने का अनुमान है?
इस साल धान की खेती करीब 4.5 लाख एकड़ में होने के कारण लगभग 9 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष निकलने का अनुमान है।
IOCL को कितनी पराली दी जाएगी?
करीब 1.5 लाख मीट्रिक टन धान का भूसा IOCL के पानीपत स्थित 2G एथेनॉल प्लांट को उपलब्ध कराया जाएगा।
पराली खरीदने के लिए कितने कलेक्शन सेंटर हैं?
IOCL ने 7 कलेक्शन सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा किसानों और किसान समूहों की ओर से करीब 70 अन्य कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं।
पराली जलाने की निगरानी कौन करेगा?
गांव से लेकर जिला स्तर तक गठित समितियां पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखेंगी। इन टीमों में प्रशासन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस भी कार्रवाई में सहयोग करेगी।
Conclusion:
धान की कटाई से पहले प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध कराना और खेतों में आग की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। पराली को पशु चारे, औद्योगिक उपयोग और 2G एथेनॉल उत्पादन जैसे विकल्पों से जोड़ने के साथ किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।
