करनाल फ्लाइंग क्लब में कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग फीस में भारी बढ़ोतरी, प्रशिक्षुओं ने शुरू किया विरोध प्रदर्शन

22 लाख रुपये से बढ़कर 42-45 लाख पहुंची प्रशिक्षण लागत, छात्रों ने फीस वृद्धि वापस लेने की मांग उठाई

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हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन के तहत संचालित करनाल फ्लाइंग क्लब में कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण की फीस में भारी बढ़ोतरी के विरोध में प्रशिक्षु सड़कों पर उतर आए हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशिक्षण के बीच में फीस दोगुनी कर दी गई, जिससे उनके सपनों पर आर्थिक संकट मंडरा गया है।

कमर्शियल पायलट बनने का सपना हुआ महंगा

हरियाणा के करनाल फ्लाइंग क्लब में कमर्शियल पायलट बनने का सपना अब पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है। हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन (HICA) के अंतर्गत संचालित इस संस्थान में प्रशिक्षण शुल्क में भारी वृद्धि के विरोध में प्रशिक्षुओं ने सोमवार से प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने क्लब परिसर में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और संशोधित फीस संरचना को तत्काल वापस लेने की मांग की।

फीस 22 लाख से बढ़कर 45 लाख रुपये तक पहुंची

प्रशिक्षुओं का आरोप है कि 200 घंटे की अनिवार्य कमर्शियल फ्लाइंग ट्रेनिंग की कुल लागत पहले करीब 22 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 42 से 45 लाख रुपये कर दिया गया है।

बीच कोर्स में बढ़ाई गई फीस

छात्रों का कहना है कि फीस वृद्धि उस समय लागू की गई जब वे पहले से प्रशिक्षण ले रहे थे। उनका आरोप है कि न तो प्रशिक्षण घंटों में कोई वृद्धि हुई और न ही पाठ्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव किया गया, फिर भी शुल्क को दोगुने से अधिक कर दिया गया।

एक प्रशिक्षु ने बताया कि उसने वर्ष 2022 में यह सोचकर प्रवेश लिया था कि पूरी ट्रेनिंग पर लगभग 20 से 22 लाख रुपये का खर्च आएगा, लेकिन अब बीच कोर्स में फीस में भारी इजाफा कर दिया गया है।

प्रति घंटे उड़ान शुल्क भी हुआ दोगुना

प्रशिक्षुओं के अनुसार, प्रति घंटे उड़ान प्रशिक्षण शुल्क भी बढ़ा दिया गया है।

10 हजार से बढ़कर 20 हजार रुपये हुआ चार्ज

एक महिला प्रशिक्षु ने बताया कि पहले प्रति घंटे की उड़ान का शुल्क 10,000 रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है। जबकि कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए आवश्यक 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि समान रहने के बावजूद फीस दोगुनी करना उचित नहीं है।

निजी अकादमियों के बराबर पहुंची लागत

छात्रों का कहना है कि उन्होंने निजी एविएशन अकादमियों की तुलना में कम शुल्क होने के कारण करनाल फ्लाइंग क्लब को चुना था।

अब नहीं रहा लागत का अंतर

एक प्रशिक्षु ने बताया कि प्रवेश के समय निजी संस्थानों में कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग की लागत 30 से 35 लाख रुपये के बीच थी, जबकि करनाल फ्लाइंग क्लब अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प था। लेकिन अब यहां की फीस भी 40 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिससे दोनों के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो गया है।

उन्होंने कहा कि वह 120 घंटे की ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं और इस स्तर पर कोर्स छोड़ना उनके लिए वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये की बर्बादी होगी।

युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि लगातार बढ़ती प्रशिक्षण लागत युवाओं के लिए एविएशन क्षेत्र में करियर बनाना मुश्किल कर सकती है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

प्रशिक्षुओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि फीस वृद्धि के फैसले की समीक्षा की जाए और छात्रों को राहत देने के लिए इसे वापस लिया जाए।

उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कई छात्रों के लिए कमर्शियल पायलट बनने का सपना अधूरा रह सकता है।


Key Highlights:

  • करनाल फ्लाइंग क्लब में कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग फीस में भारी बढ़ोतरी
  • कुल प्रशिक्षण लागत 22 लाख से बढ़कर 42-45 लाख रुपये हुई
  • प्रशिक्षुओं ने सोमवार से विरोध प्रदर्शन शुरू किया
  • प्रति घंटे फ्लाइंग चार्ज 10,000 से बढ़कर 20,000 रुपये हुआ
  • 200 घंटे की अनिवार्य ट्रेनिंग अवधि में कोई बदलाव नहीं
  • छात्रों ने फीस वृद्धि को कोर्स के बीच लागू करने पर जताई नाराजगी
  • सरकार से तत्काल फीस वृद्धि वापस लेने की मांग

FAQ Section:

Q1. करनाल फ्लाइंग क्लब में फीस कितनी बढ़ी है?
प्रशिक्षुओं के अनुसार कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग की कुल लागत करीब 22 लाख रुपये से बढ़कर 42-45 लाख रुपये हो गई है।

Q2. छात्र विरोध क्यों कर रहे हैं?
छात्रों का आरोप है कि कोर्स के बीच में फीस दोगुनी कर दी गई, जबकि ट्रेनिंग घंटे और पाठ्यक्रम में कोई बदलाव नहीं हुआ।

Q3. प्रति घंटे फ्लाइंग चार्ज कितना हो गया है?
प्रशिक्षुओं के अनुसार प्रति घंटे का शुल्क 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है।

Q4. कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग के लिए कितने घंटे की फ्लाइंग जरूरी है?
कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग अनिवार्य है।

Q5. छात्रों की मुख्य मांग क्या है?
छात्र फीस वृद्धि को वापस लेने और पुराने शुल्क ढांचे को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।


Conclusion:

करनाल फ्लाइंग क्लब में फीस वृद्धि का मुद्दा अब छात्रों के विरोध प्रदर्शन का कारण बन गया है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि अचानक बढ़ी लागत ने उनके करियर और आर्थिक योजनाओं पर गंभीर असर डाला है। अब सभी की नजर सरकार और संस्थान के अगले कदम पर टिकी है कि क्या छात्रों की मांगों पर कोई राहत मिलती है या नहीं।Screenshot_1954

Edited By: Karan Singh

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