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सेवा केंद्र कर्मचारियों का प्रदर्शन तेज, नियमितीकरण और सरकारी नियंत्रण की मांग को लेकर निकाला मार्च
AAP विधायक को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर 3 जून को रोजगार कार्यालय के घेराव की चेतावनी
जिले भर के सेवा केंद्र कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन मार्च निकाला। कर्मचारियों ने सरकार से सेवाओं को सीधे सरकारी नियंत्रण में लेने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सेवा केंद्र कर्मचारियों ने निकाला विरोध मार्च
जिले के विभिन्न सेवा केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन मार्च निकाला। यह प्रदर्शन यूनियन अध्यक्ष गुरसेवक सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
विधायक को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक हरमीत सिंह संधू को सौंपा।कई यूनियन नेताओं ने किया संबोधन
इस अवसर पर यूनियन अध्यक्ष गुरसेवक सिंह के अलावा वरिंदर सिंह, हरमन सिंह, कंवलप्रीत सिंह, बियंत कौर और अन्य पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को संबोधित किया।
नेताओं ने कहा कि सेवा केंद्र कर्मचारियों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग
यूनियन नेताओं ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सेवा केंद्रों को सीधे सरकारी नियंत्रण में लाने पर कोई गंभीर विचार नहीं किया जा रहा।
10 वर्षों से कम वेतन पर काम करने का दावा
कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले एक दशक से सेवा केंद्रों में कम वेतन पर कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार और संबंधित कंपनी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रही।
नेताओं ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
नियमितीकरण के मुद्दे पर बढ़ी नाराजगी
यूनियन ने हाल ही में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी सरकारी घोषणाओं का भी उल्लेख किया।
सेवा केंद्र कर्मचारी सूची से बाहर
कर्मचारियों का कहना है कि कुछ दिन पहले सरकार ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को नियमित करने का प्रचार किया, लेकिन सेवा केंद्र कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
उनके अनुसार इस फैसले से कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष पैदा हुआ है।
3 जून को घेराव की चेतावनी
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
रोजगार कार्यालय के घेराव का ऐलान
नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा नहीं होने की स्थिति में 3 जून को रोजगार कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने सरकार से जल्द बातचीत कर समाधान निकालने की मांग भी की।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
सेवा केंद्र कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं।
क्या चाहते हैं कर्मचारी?
- सेवा केंद्र कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- सेवा केंद्रों को सीधे सरकारी नियंत्रण में लिया जाए
- कर्मचारियों को बेहतर वेतन और सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए
- लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए
- कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए
Key Highlights:
- सेवा केंद्र कर्मचारियों ने जिले में विरोध मार्च निकाला
- यूनियन ने AAP विधायक हरमीत सिंह संधू को ज्ञापन सौंपा
- कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग उठाई
- सेवा केंद्रों को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग
- 10 वर्षों से कम वेतन पर काम करने का दावा
- सरकार पर कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप
- 3 जून को रोजगार कार्यालय घेराव की चेतावनी
FAQ Section:
Q1. सेवा केंद्र कर्मचारियों ने प्रदर्शन क्यों किया?
कर्मचारियों ने नियमितीकरण, बेहतर वेतन और सेवा केंद्रों को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
Q2. ज्ञापन किसे सौंपा गया?
यूनियन नेताओं ने अपनी मांगों का ज्ञापन AAP विधायक हरमीत सिंह संधू को सौंपा।
Q3. कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
सेवा केंद्र कर्मचारियों को नियमित करना और उनकी सेवाओं को सीधे सरकारी नियंत्रण में लेना।
Q4. कर्मचारियों ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है और उनके हितों की रक्षा नहीं कर रही।
Q5. आगे क्या आंदोलन की योजना है?
मांगें पूरी नहीं होने पर 3 जून को रोजगार कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।
Conclusion:
सेवा केंद्र कर्मचारियों का यह विरोध प्रदर्शन उनकी लंबे समय से लंबित मांगों और रोजगार सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उजागर करता है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और कर्मचारियों को कोई राहत मिलती है या नहीं।

