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अंबाला में दो दिवसीय ‘लिटरेरिया सीजन 2’ का समापन, साहित्य, कविता और देश के विभाजन की यादों पर हुई चर्चा
सिरहिंद क्लब में आयोजित साहित्य महोत्सव में हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा समेत लेखक, कवि, शिक्षाविद, सैन्य अधिकारी और कलाकार हुए शामिल; तीन कार्यशालाओं के जरिए रचनात्मकता और व्यक्तिगत कल्याण पर दिया गया जोर।
हरियाणा के अंबाला छावनी स्थित सिरहिंद क्लब में आयोजित दो दिवसीय ‘लिटरेरिया – अंबाला लिटरेचर फेस्टिवल’ के दूसरे सीजन का रविवार को समापन हो गया। कार्यक्रम में साहित्य, कविता, इतिहास, नेतृत्व और सामाजिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा सहित कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया।
हरियाणा के अंबाला छावनी में आयोजित दो दिवसीय ‘लिटरेरिया – अंबाला लिटरेचर फेस्टिवल’ के दूसरे सीजन का रविवार को समापन हो गया। सिरहिंद क्लब में आयोजित इस साहित्य महोत्सव में लेखकों, कवियों, शिक्षाविदों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, सैन्य हस्तियों, फिल्मकारों, कलाकारों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। महोत्सव का उद्देश्य साहित्य के विभिन्न रूपों को सामने लाना और विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम में हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा भी शामिल हुईं। उनके कविता से जुड़े सत्र में प्रशासनिक अनुभव और रचनात्मक अभिव्यक्ति के बीच संबंधों पर विचार किया गया। इस दौरान साहित्य की भूमिका को मानवीय भावनाओं, सामाजिक परिस्थितियों और जीवन की जटिलताओं को समझने के एक माध्यम के रूप में रेखांकित किया गया।
साहित्य और प्रशासन के बीच संबंधों पर चर्चा
महोत्सव के एक प्रमुख सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच कविता और साहित्य का महत्व किस तरह बना हुआ है।
प्रशासनिक कार्यों में तर्क, स्पष्टता और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है, जबकि कविता मानवीय भावनाओं, सामाजिक वास्तविकताओं और रोजमर्रा के अनुभवों को समझने का अवसर देती है। इस सत्र में साहित्य को केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि समाज और लोगों को बेहतर ढंग से समझने के माध्यम के रूप में भी देखा गया।
विभाजन की यादों, विस्थापन और पीड़ा पर विमर्श
लेखिका और पार्टिशन म्यूजियम की क्यूरेटर किश्वर देसाई तथा मोना वर्मा ने भारत के विभाजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान स्मृतियों, पलायन और नुकसान जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
चर्चा में ऐतिहासिक घटनाओं की यादों के महत्व और व्यक्तिगत जीवन पर उनके प्रभाव को समझने की कोशिश की गई। साथ ही, सामूहिक पहचान को समझने में इतिहास और स्मृतियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
प्रशासनिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन पर विचार
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के पूर्व निदेशक संजीव चोपड़ा ने सार्वजनिक जीवन और लेखन से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।
वहीं, कमांडेंट कुलप्रीत यादव (सेवानिवृत्त), अरुण शुक्ला और मेजर जनरल अमिल शोरी (सेवानिवृत्त) ने सशस्त्र बलों में नेतृत्व और मार्गदर्शन के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए।
इन सत्रों में प्रशासन, नेतृत्व, साहित्य और व्यक्तिगत अनुभवों के बीच संबंधों को समझने का अवसर मिला।
तीन कार्यशालाओं के जरिए रचनात्मकता को बढ़ावा
लिटरेरिया सीजन 2 में विचार-विमर्श के साथ प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी पर भी ध्यान दिया गया। महोत्सव के दौरान तीन कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
इन कार्यशालाओं में रचनात्मक अभिव्यक्ति, प्रदर्शन कला और व्यक्तिगत कल्याण जैसे विषयों पर गतिविधियां शामिल रहीं। विशेषज्ञों के सत्रों के साथ सीखने और भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराकर विद्यार्थियों और समुदाय के अन्य सदस्यों को भी साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
Key Highlights:
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अंबाला छावनी के सिरहिंद क्लब में लिटरेरिया सीजन 2 का समापन हुआ।
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साहित्य महोत्सव दो दिनों तक आयोजित किया गया।
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हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने कार्यक्रम में भाग लिया।
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किश्वर देसाई और मोना वर्मा ने विभाजन, स्मृतियों, विस्थापन और नुकसान पर चर्चा की।
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LBSNAA के पूर्व निदेशक संजीव चोपड़ा ने सार्वजनिक जीवन और लेखन से जुड़े विषयों पर विचार रखे।
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सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और अन्य वक्ताओं ने नेतृत्व और मार्गदर्शन पर अपने अनुभव साझा किए।
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प्रतिभागियों के लिए रचनात्मकता, प्रदर्शन और व्यक्तिगत कल्याण से जुड़ी तीन कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
FAQ Section:
सवाल 1: लिटरेरिया – अंबाला लिटरेचर फेस्टिवल सीजन 2 का आयोजन कहां हुआ?
जवाब: इसका आयोजन हरियाणा के अंबाला छावनी स्थित सिरहिंद क्लब में किया गया।
सवाल 2: साहित्य महोत्सव का समापन कब हुआ?
जवाब: दो दिवसीय महोत्सव का समापन रविवार को हुआ।
सवाल 3: कार्यक्रम में किन प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया?
जवाब: हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा, लेखिका किश्वर देसाई, मोना वर्मा, संजीव चोपड़ा और कई अन्य वक्ताओं ने भाग लिया।
सवाल 4: विभाजन पर चर्चा किन विषयों पर केंद्रित रही?
जवाब: चर्चा में विभाजन की स्मृतियों, विस्थापन, नुकसान और व्यक्तिगत व सामूहिक पहचान पर इसके प्रभाव को प्रमुखता दी गई।
सवाल 5: महोत्सव में कितनी कार्यशालाएं आयोजित हुईं?
जवाब: महोत्सव में तीन कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें रचनात्मक अभिव्यक्ति, प्रदर्शन कला और व्यक्तिगत कल्याण पर ध्यान दिया गया।
Conclusion:
लिटरेरिया – अंबाला लिटरेचर फेस्टिवल सीजन 2 ने साहित्य, कविता, इतिहास, प्रशासन और नेतृत्व से जुड़े विषयों पर संवाद के लिए मंच प्रदान किया। विशेषज्ञों के विचार-विमर्श और तीन कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति और नए दृष्टिकोणों से जुड़ने का अवसर मिला। महोत्सव ने साहित्य को मानवीय अनुभवों और सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया।

