मंडी अहमदगढ़ के 20 वर्षीय शहबाज ने घर लाए भगवान गणेश की मूर्ति, 10 दिन तक करेंगे पूजा

ऑटो चालक शहबाज ने कहा- माता-पिता को कोई आपत्ति नहीं; बोले, धर्म नफरत नहीं, प्यार सिखाता है

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पंजाब के मंडी अहमदगढ़ के 20 वर्षीय शहबाज ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की मूर्ति घर लाकर पूजा करने का फैसला किया है। वह 25 सितंबर को धार्मिक परंपरा के अनुसार मूर्ति का विसर्जन करेंगे।

 

पंजाब के मंडी अहमदगढ़ से धार्मिक सौहार्द और आपसी भाईचारे से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी सामने आई है। 20 वर्षीय ऑटो चालक शहबाज गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की मूर्ति अपने घर लेकर आए हैं।

शहबाज ने बताया कि वह मूर्ति को करीब 10 दिनों तक घर में रखेंगे और 25 सितंबर को गणेश उत्सव की परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन करेंगे। उनके मुताबिक, उनके माता-पिता को उनके इस निर्णय से कोई परेशानी नहीं है।

माता-पिता ने पूजा की दी अनुमति

शहबाज ने बताया कि परिवार के भीतर उनके माता-पिता ने भगवान गणेश की पूजा करने पर आपत्ति नहीं जताई है। हालांकि, कुछ रिश्तेदार उनके दूसरे धर्म के देवी-देवताओं की पूजा करने को लेकर विरोध करते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वह अपने फैसले पर कायम हैं और गणेश जी की मूर्ति को निर्धारित अवधि तक घर में रखकर पूजा करेंगे।

पहले भी घर में रख चुके हैं लड्डू गोपाल

शहबाज के अनुसार, वह इससे पहले भी भगवान कृष्ण के ‘लड्डू गोपाल’ की मूर्ति अपने घर में रख चुके हैं और रोजाना उसकी पूजा करते थे।

उन्होंने बताया कि करीब पांच साल बाद मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने उसे एक मंदिर में रख दिया।

रामलीला में निभा चुके हैं सीता का किरदार

शहबाज ने बताया कि वह लंबे समय से मंडी अहमदगढ़ और आसपास के इलाकों में आयोजित होने वाली रामलीला में भी हिस्सा लेते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रामलीला के दौरान उन्होंने सीता का किरदार निभाया है और कई अन्य भूमिकाएं भी निभाई हैं।

शहबाज के मुताबिक, उन्हें इन धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लेना पसंद है और उन्हें अलग-अलग किरदार निभाने में खुशी मिलती है।

‘इस्लाम को नहीं छोड़ा’

शहबाज ने स्पष्ट किया कि हिंदू देवी-देवताओं के प्रति उनकी आस्था का अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने इस्लाम को छोड़ दिया है।

उन्होंने बताया कि वह रोजाना नमाज पढ़ते हैं और इस्लाम से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाजों का भी पालन करते हैं।

‘धर्म प्यार सिखाता है, नफरत नहीं’

धर्म को लेकर अपने विचार साझा करते हुए शहबाज ने कहा कि धर्म लोगों को आपस में प्रेम करना सिखाता है, न कि नफरत करना।

उनका मानना है कि किसी भी धर्म की शिक्षाएं लोगों को बांटने के लिए नहीं हैं और धार्मिक आधार पर दूरी पैदा करना इंसानों की सोच का परिणाम है।

पहली बार पूजा करने पर हुआ था विरोध

शहबाज ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार गणेश उत्सव के दौरान पूजा में हिस्सा लिया था, तब कुछ रिश्तेदारों ने इसका कड़ा विरोध किया था।

हालांकि, उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला। शहबाज के मुताबिक, उनके माता-पिता ने उनका समर्थन किया और उन्हें अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने की स्वतंत्रता दी।

Key Highlights:

  • 20 वर्षीय शहबाज मंडी अहमदगढ़ में ऑटो चलाते हैं।
  • उन्होंने गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति घर में स्थापित की।
  • वह मूर्ति को 10 दिनों तक घर में रखने की बात कह रहे हैं।
  • 25 सितंबर को मूर्ति विसर्जन करने की योजना है।
  • उनके माता-पिता ने उनके फैसले का समर्थन किया है।
  • शहबाज पहले भी घर में लड्डू गोपाल की मूर्ति रखकर पूजा कर चुके हैं।
  • वह मंडी अहमदगढ़ की रामलीलाओं में भी हिस्सा लेते रहे हैं।
  • उन्होंने रामलीला में सीता सहित कई किरदार निभाए हैं।
  • शहबाज का कहना है कि वह नमाज भी पढ़ते हैं और इस्लामी परंपराओं का पालन करते हैं।
  • उन्होंने धर्म को प्रेम और भाईचारे से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

FAQ Section:

शहबाज कौन हैं?

शहबाज मंडी अहमदगढ़ के रहने वाले 20 वर्षीय ऑटो चालक हैं, जो धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी हिस्सा लेते हैं।

शहबाज ने भगवान गणेश की मूर्ति कितने दिनों के लिए रखी है?

उन्होंने बताया कि वह भगवान गणेश की मूर्ति को 10 दिनों तक घर में रखेंगे और 25 सितंबर को विसर्जन करेंगे।

क्या शहबाज के परिवार को उनकी पूजा से आपत्ति है?

शहबाज के अनुसार, उनके माता-पिता को उनकी पूजा से कोई आपत्ति नहीं है और वे उनके फैसले का समर्थन करते हैं। कुछ रिश्तेदारों ने हालांकि विरोध किया है।

क्या शहबाज पहले भी हिंदू देवी-देवताओं की पूजा कर चुके हैं?

हां। उनके अनुसार, उन्होंने पहले घर में लड्डू गोपाल की मूर्ति रखकर नियमित पूजा की थी।

क्या शहबाज इस्लाम का पालन करते हैं?

शहबाज ने कहा है कि वह रोजाना नमाज पढ़ते हैं और इस्लाम से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।

क्या शहबाज रामलीला में भी हिस्सा लेते हैं?

हां। उन्होंने बताया कि वह मंडी अहमदगढ़ और आसपास आयोजित रामलीला में हिस्सा लेते हैं और सीता समेत कई किरदार निभा चुके हैं।

Conclusion:

मंडी अहमदगढ़ के शहबाज की कहानी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक भागीदारी और पारिवारिक समर्थन की मिसाल के तौर पर सामने आई है। भगवान गणेश की मूर्ति घर में स्थापित करने के साथ वह अपनी इस्लामी धार्मिक परंपराओं का भी पालन करने की बात कहते हैं। रामलीला में उनकी भागीदारी और अलग-अलग धार्मिक आयोजनों से जुड़ाव ने उनकी कहानी को खास बना दिया है।Screenshot_10

Edited By: Atul Sharma

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