उत्तर भारत के प्रमुख बांधों में पानी का स्तर पिछले साल से कम, भाखड़ा 71% और पोंग 79% भरा

15 सितंबर के साथ मानसून में जलभराव का दौर समाप्त, BBMB के आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में भाखड़ा और पोंग जलाशयों में बड़ा अंतर सामने आया।

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उत्तर भारत के प्रमुख जलाशय अब पोस्ट-मानसून सीजन में प्रवेश कर चुके हैं। 15 सितंबर को भाखड़ा जलाशय 1,644.47 फीट और पोंग 1,372.37 फीट पर दर्ज किया गया, जबकि दोनों में पिछले साल की तुलना में कम पानी है।

 

उत्तर भारत के प्रमुख जलाशयों के लिए मानसून में पानी भरने का आधिकारिक सीजन 15 सितंबर को समाप्त हो गया। भाखड़ा और पोंग समेत BBMB के अधीन प्रमुख जलाशय अब पोस्ट-मानसून अवधि में प्रवेश कर चुके हैं।

भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दोनों प्रमुख जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले पानी का स्तर और संचयी आवक कम रही है। हालांकि, BBMB से जुड़े सूत्रों के अनुसार मौजूदा आंकड़ों को सीधे तौर पर जल संकट का संकेत नहीं माना जा सकता।

भाखड़ा जलाशय में कितना पानी?

15 सितंबर को भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 1,644.47 फीट दर्ज किया गया। इसकी लाइव स्टोरेज क्षमता करीब 4.03 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है, जो कुल लाइव क्षमता का लगभग 71 प्रतिशत है।

भाखड़ा का पूर्ण जलाशय स्तर 1,680 फीट है। इस लिहाज से जलाशय फिलहाल अपने पूर्ण स्तर से करीब 35.5 फीट नीचे है।

पिछले साल की तुलना में बड़ा अंतर

15 सितंबर 2025 को भाखड़ा का जलस्तर 1,676.16 फीट था और यह करीब 97 प्रतिशत भरा हुआ था।

इस साल समान तारीख पर जलस्तर करीब 32 फीट कम है। लाइव स्टोरेज के लिहाज से भी इस वर्ष स्थिति पिछले साल के मुकाबले कमजोर रही है।

पोंग जलाशय की स्थिति

पोंग जलाशय में 15 सितंबर को जलस्तर 1,372.37 फीट दर्ज किया गया। इसमें करीब 4.54 BCM लाइव स्टोरेज मौजूद है, जो इसकी लाइव क्षमता का लगभग 79 प्रतिशत है।

पोंग का संशोधित पूर्ण जलाशय स्तर 1,390 फीट है। यानी जलाशय अपने पूर्ण स्तर से करीब 17.6 फीट नीचे है।

15 सितंबर 2025 को पोंग का जलस्तर 1,392.48 फीट था और BBMB के रिकॉर्ड में इसकी लाइव क्षमता 103 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस तरह इस वर्ष पोंग का जलस्तर पिछले साल की तुलना में 20 फीट से अधिक कम है।

जलाशयों में पानी की आवक भी घटी

इस साल सिर्फ मौजूदा जलस्तर ही नहीं, बल्कि मानसून के दौरान जलाशयों में पहुंचने वाली कुल पानी की मात्रा भी पिछले साल से कम रही।

BBMB के आंकड़ों के अनुसार, 21 मई से 15 सितंबर तक भाखड़ा में कुल संचयी आवक 3.77 मिलियन क्यूसेक रही, जबकि पिछले वर्ष यह 5.56 मिलियन क्यूसेक थी।

BCM के हिसाब से इस अवधि में भाखड़ा में करीब 9.22 BCM पानी आया, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 13.60 BCM था।

पोंग में भी कम रही आवक

पोंग जलाशय में 21 मई से अब तक संचयी आवक करीब 2.43 मिलियन क्यूसेक रही। यह लगभग 5.95 BCM के बराबर है।

पिछले वर्ष इसी अवधि में पोंग में संचयी आवक 5.73 मिलियन क्यूसेक, यानी करीब 14.01 BCM, दर्ज की गई थी।

क्या जल संकट की स्थिति बन रही है?

जलाशयों के मौजूदा आंकड़े पिछले साल की तुलना में कमजोर जरूर हैं, लेकिन BBMB से जुड़े सूत्रों के अनुसार इसका अर्थ यह नहीं है कि 2026 को स्वतः जल संकट वाला वर्ष माना जाए

सूत्रों के मुताबिक, भाखड़ा में अभी भी 4 BCM से अधिक लाइव स्टोरेज उपलब्ध है, जबकि पोंग में करीब 4.54 BCM पानी मौजूद है।

आने वाले समय में जलाशयों से पानी की निकासी, बिजली उत्पादन, सिंचाई जरूरतों और मौसम की स्थिति जैसे कारक जल उपलब्धता को प्रभावित करेंगे।

Key Highlights:

  • 15 सितंबर के साथ प्रमुख जलाशयों का मानसूनी filling season समाप्त हो गया।
  • 15 सितंबर को भाखड़ा का जलस्तर 1,644.47 फीट रहा।
  • भाखड़ा में करीब 4.03 BCM लाइव स्टोरेज, यानी 71% क्षमता उपलब्ध रही।
  • पोंग का जलस्तर 1,372.37 फीट दर्ज किया गया।
  • पोंग में करीब 4.54 BCM, यानी 79% लाइव क्षमता में पानी रहा।
  • पिछले साल की तुलना में दोनों जलाशयों का स्तर काफी कम है।
  • भाखड़ा में इस साल संचयी आवक 9.22 BCM, जबकि 2025 में 13.60 BCM थी।
  • पोंग में इस साल संचयी आवक 5.95 BCM, जबकि पिछले साल 14.01 BCM रही।
  • BBMB सूत्रों के अनुसार कम जलस्तर को फिलहाल सीधे तौर पर जल संकट नहीं माना जा सकता।

FAQ Section:

भाखड़ा बांध में 15 सितंबर को कितना पानी था?

15 सितंबर को भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 1,644.47 फीट था और इसमें करीब 4.03 BCM लाइव स्टोरेज था।

पोंग बांध कितना भरा हुआ है?

15 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार पोंग जलाशय अपनी लाइव क्षमता का लगभग 79 प्रतिशत भरा हुआ था।

क्या भाखड़ा और पोंग में पिछले साल से कम पानी है?

हां। 15 सितंबर 2025 की तुलना में इस वर्ष दोनों जलाशयों के जलस्तर और संचयी आवक कम रही।

इस साल भाखड़ा में कितनी पानी की आवक हुई?

21 मई से 15 सितंबर तक भाखड़ा में करीब 9.22 BCM पानी की संचयी आवक दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह 13.60 BCM थी।

क्या कम जलस्तर का मतलब जल संकट है?

BBMB से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मौजूदा आंकड़े पिछले साल से कमजोर हैं, लेकिन इन्हें अपने आप 2026 के जल संकट का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जल उपलब्धता आगे मौसम और पानी की मांग सहित कई कारकों पर निर्भर करेगी।

Conclusion:

उत्तर भारत के प्रमुख जलाशयों में इस साल मानसून के दौरान पानी की आवक पिछले वर्ष की तुलना में कम रही है। 15 सितंबर को भाखड़ा 71 प्रतिशत और पोंग 79 प्रतिशत लाइव क्षमता पर थे। आंकड़े पिछले साल की तुलना में कमजोर तस्वीर दिखाते हैं, लेकिन दोनों जलाशयों में अभी पर्याप्त लाइव स्टोरेज मौजूद है। पोस्ट-मानसून अवधि में पानी की मांग, मौसम और जलाशयों से होने वाली निकासी आगे की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।

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Edited By: Atul Sharma

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