74 वर्षीय सिख इतिहासकार अमरजीत कौर जल्द लाएंगी संत बिधी चंद पर नई शोध पुस्तक, संघर्ष से रची प्रेरणादायक पहचान

पति की असमय मृत्यु के बाद कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई पूरी की, अब तक सिख इतिहास पर 30 से अधिक पुस्तकों का कर चुकी हैं लेखन।

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प्रख्यात सिख इतिहासकार और शोधकर्ता अमरजीत कौर जल्द ही गुरु हरगोबिंद साहिब के समकालीन संत बिधी चंद पर नई शोध पुस्तक प्रकाशित करने जा रही हैं। विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा पूरी कर उन्होंने सिख इतिहास और विरासत के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

सिख इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटीं अमरजीत कौर

प्रसिद्ध सिख विद्वान, इतिहासकार और लेखिका अमरजीत कौर (74) जल्द ही सुर सिंह के प्रसिद्ध सिख संत बिधी चंद पर आधारित नई शोध पुस्तक प्रकाशित करने जा रही हैं। संत बिधी चंद, गुरु हरगोबिंद साहिब के समकालीन माने जाते हैं और सिख इतिहास में उनका विशेष स्थान है।

अमरजीत कौर अब तक सिख इतिहास पर 30 से अधिक पुस्तकें लिख चुकी हैं। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से उन कई सिख विभूतियों के जीवन और योगदान को सामने लाया है, जिनके बारे में आम लोगों को अपेक्षाकृत कम जानकारी है।


पत्रकारिता से लेकर शोध लेखन तक का लंबा सफर

अमरजीत कौर ने पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान एक पंजाबी दैनिक समाचार पत्र में पत्रकार के रूप में भी कार्य किया। उस समय उन्होंने भिखीविंड क्षेत्र से रिपोर्टिंग की और कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया।

उनकी कई पुस्तकें पंजाब सरकार के भाषा विभाग और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) द्वारा प्रकाशित की जा चुकी हैं।


सिख इतिहास की कई महत्वपूर्ण हस्तियों पर किया शोध

अमरजीत कौर ने अपने लेखन के जरिए सिख इतिहास और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में शामिल हैं—

  • इतिहास बीबी वीरो जी
  • भाई सुखा सिंह (1702-1752)
  • संत बिलास शहीद बाबा बीर सिंह
  • सिख पंथ च वापसी बाबा वड भाग सिंह जी दी

इन पुस्तकों में उन्होंने सिख समाज की कई ऐतिहासिक और प्रेरणादायक हस्तियों के जीवन को विस्तार से प्रस्तुत किया है।


व्यक्तिगत त्रासदी ने बदल दी जिंदगी की दिशा

अमरजीत कौर ने मैट्रिक की पढ़ाई कालका से पूरी करने के बाद शिक्षा बीच में छोड़ दी थी। वर्ष 1968 में उनका विवाह अमृतसर निवासी जगदेव सिंह से हुआ। दंपति के दो बेटियां और एक बेटा हुआ।

लेकिन 1974 में सड़क दुर्घटना में पति की मृत्यु के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। परिवार की जिम्मेदारियां अचानक उनके कंधों पर आ गईं।


25 पैसे प्रति पीस सिलाई कर संभाला परिवार, फिर पूरी की पढ़ाई

पति के निधन के बाद परिवार का पालन-पोषण करने के लिए अमरजीत कौर ने अपनी सास के कहने पर शर्ट और सूट के कफ सिलने का काम शुरू किया, जिसके बदले उन्हें प्रति पीस 25 पैसे मिलते थे।

आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 1976 में प्रथम श्रेणी से गियानी परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने रोजगार कार्यालय में पंजीकरण कराया और सरकारी स्कूल, खेमकरण में क्लर्क के रूप में नियुक्ति प्राप्त की।


नई पुस्तक में संत बिधी चंद के जीवन पर होगा विस्तृत शोध

अमरजीत कौर की आगामी पुस्तक गुरु हरगोबिंद साहिब के समकालीन संत बिधी चंद के जीवन, योगदान और सिख इतिहास में उनके महत्व पर आधारित होगी।

यह पुस्तक सिख इतिहास के शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और धार्मिक साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।


Key Highlights:

  • 74 वर्षीय इतिहासकार अमरजीत कौर जल्द प्रकाशित करेंगी नई शोध पुस्तक।
  • पुस्तक गुरु हरगोबिंद साहिब के समकालीन संत बिधी चंद पर आधारित होगी।
  • अब तक सिख इतिहास पर 30 से अधिक पुस्तकें लिख चुकी हैं।
  • पंजाब में उग्रवाद के दौर में पत्रकारिता भी की।
  • पति की मृत्यु के बाद संघर्ष करते हुए पढ़ाई पूरी की।
  • 1976 में प्रथम श्रेणी से गियानी परीक्षा पास कर सरकारी सेवा में आईं।

FAQ Section

Q1. अमरजीत कौर कौन हैं?

अमरजीत कौर सिख इतिहास की प्रख्यात विद्वान, इतिहासकार और लेखिका हैं, जिन्होंने 30 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं।

Q2. उनकी नई पुस्तक किस विषय पर आधारित है?

नई शोध पुस्तक गुरु हरगोबिंद साहिब के समकालीन सिख संत बिधी चंद के जीवन और योगदान पर आधारित है।

Q3. अमरजीत कौर ने कितनी पुस्तकें लिखी हैं?

उन्होंने अब तक सिख इतिहास और विरासत पर 30 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं।

Q4. उन्होंने पत्रकारिता कब की थी?

उन्होंने पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान एक पंजाबी दैनिक समाचार पत्र के लिए पत्रकार के रूप में कार्य किया था।

Q5. उनके जीवन का सबसे कठिन दौर कौन-सा था?

1974 में सड़क दुर्घटना में पति की मृत्यु के बाद उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के बीच परिवार संभालते हुए पढ़ाई पूरी की और सरकारी नौकरी हासिल की।


Conclusion:

अमरजीत कौर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और शोध के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि सिख इतिहास के संरक्षण और शोध में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। संत बिधी चंद पर उनकी आगामी पुस्तक सिख इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।Screenshot_3267

Edited By: Karan Singh

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