नवांशहर के PAU-KVK ने बदली खेती की तस्वीर, उन्नत धान-गेहूं बीजों और प्रशिक्षण से किसानों की बढ़ी आय

PAU-कृषि विज्ञान केंद्र, नवांशहर ने आधुनिक खेती, प्रमाणित बीज और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के जरिए हजारों किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा।

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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) नवांशहर ने उन्नत फसल किस्मों, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और प्रमाणित बीजों के माध्यम से किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र की पहल से हजारों किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना रहे हैं।

PAU-KVK नवांशहर किसानों के लिए बना आधुनिक कृषि का प्रमुख केंद्र

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), नवांशहर जिले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने वाला प्रमुख संस्थान बन चुका है।

वर्ष 1995 में स्थापित यह केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के पूर्ण वित्तीय सहयोग से संचालित होता है। यह केंद्र नवांशहर शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर लंगड़ोया में स्थित है और जिले के किसानों के लिए कृषि संसाधन एवं प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।


42 एकड़ परिसर में शोध, प्रशिक्षण और तकनीक का प्रसार

करीब 42 एकड़ क्षेत्र में फैला यह कृषि विज्ञान केंद्र कृषि अनुसंधान, फसल प्रदर्शन, किसान प्रशिक्षण और नई कृषि तकनीकों के प्रसार का कार्य करता है।

केंद्र के विशेषज्ञ किसानों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिससे वे आधुनिक खेती की तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकें।


PR 126 धान और PBW 826 गेहूं की उन्नत किस्मों को मिला बढ़ावा

PAU-KVK नवांशहर की प्रमुख उपलब्धियों में PR 126 धान और PBW 826 गेहूं जैसी कम अवधि और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का सफल प्रचार-प्रसार शामिल है।

केंद्र ने किसानों तक इन उन्नत किस्मों की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यक्तिगत संपर्क, मोबाइल संदेश, टेलीविजन, रेडियो कार्यक्रमों और किसान बैठकों का व्यापक उपयोग किया, जिससे जिले में इन किस्मों को तेजी से अपनाया गया।


सस्ती दरों पर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए

कृषि विज्ञान केंद्र के एसोसिएट डायरेक्टर (ट्रेनिंग) डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष केंद्र ने लगभग—

  • 300 क्विंटल PR 126 धान का बीज
  • 400 क्विंटल PBW 826 गेहूं का बीज

उत्पादित कर किसानों को उपलब्ध कराया।

उन्होंने बताया कि प्रमाणित बीज 62.50 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर उपलब्ध कराए गए, जिससे किसानों को महंगे और अप्रमाणित बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ी। बाजार में ऐसे बीजों की कीमत 1,000 से 3,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है।


कम पानी, बेहतर गुणवत्ता और अधिक मुनाफा

डॉ. प्रदीप कुमार के अनुसार, इन उन्नत फसल किस्मों से किसानों को कई लाभ मिले हैं—

  • सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता।
  • फसल की अवधि में कमी।
  • अनाज की गुणवत्ता में सुधार।
  • खेती की लागत में कमी।
  • किसानों की आय और लाभ में वृद्धि।

प्रशिक्षण से किसान बने सफल बीज उद्यमी

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रयासों का सकारात्मक असर गहल माजरी गांव के किसान चरणजीत सिंह झज्ज की सफलता से भी देखा जा सकता है।

KVK से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने पांच एकड़ में PR 126 बीज उत्पादन का वैज्ञानिक मॉडल अपनाया और एक सफल बीज उद्यमी के रूप में पहचान बनाई।

उन्होंने धान की नर्सरी तैयार कर 2,000 से अधिक किसानों को पौध उपलब्ध कराई, जिससे जिले में उन्नत किस्मों का विस्तार तेजी से हुआ।


Key Highlights:

  • PAU-KVK नवांशहर 1995 से किसानों को आधुनिक कृषि प्रशिक्षण दे रहा है।
  • केंद्र 42 एकड़ परिसर में अनुसंधान और प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित करता है।
  • PR 126 धान और PBW 826 गेहूं की उन्नत किस्मों का सफल प्रचार।
  • पिछले वर्ष 300 क्विंटल धान और 400 क्विंटल गेहूं के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए।
  • किसानों को 62.50 रुपये प्रति किलो की दर से प्रमाणित बीज मिले।
  • प्रशिक्षण के बाद किसान चरणजीत सिंह झज्ज सफल बीज उद्यमी बने।
  • 2,000 से अधिक किसानों को धान की नर्सरी उपलब्ध कराई गई।

FAQ Section

Q1. PAU-KVK नवांशहर की स्थापना कब हुई थी?

कृषि विज्ञान केंद्र नवांशहर की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी।

Q2. यह केंद्र किस संस्था के सहयोग से संचालित होता है?

यह केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्ण वित्तीय सहयोग से संचालित होता है।

Q3. किन फसल किस्मों को बढ़ावा दिया गया है?

PR 126 धान और PBW 826 गेहूं की उन्नत किस्मों को बढ़ावा दिया गया है।

Q4. किसानों को प्रमाणित बीज किस कीमत पर उपलब्ध कराए गए?

प्रमाणित बीज 62.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराए गए।

Q5. प्रशिक्षण से किस किसान को विशेष सफलता मिली?

गहल माजरी गांव के किसान चरणजीत सिंह झज्ज ने प्रशिक्षण के बाद सफल बीज उद्यमी के रूप में पहचान बनाई।


Conclusion:

PAU-कृषि विज्ञान केंद्र, नवांशहर आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रमाणित बीजों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। केंद्र की पहल से जिले में उन्नत फसल किस्मों का विस्तार हुआ है और कई किसान आधुनिक खेती अपनाकर सफल उद्यमी बन रहे हैं।Screenshot_3270

Edited By: Karan Singh

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