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पश्चिम एशिया संकट के बीच PAU की चेतावनी: खाद और खाद्यान्न सुरक्षा पर दें विशेष ध्यान, किसानों को दी अहम सलाह
पीएयू कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल बोले- मानवता और कृषि सुरक्षा के लिए ‘फर्टिलाइजर’ व ‘फूड’ सबसे महत्वपूर्ण, फसल विविधीकरण अपनाने का आह्वान
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच खाद एवं खाद्यान्न सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग और फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी।
वैश्विक संकट के दौर में खाद और खाद्यान्न सुरक्षा पर जोर
पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चित परिस्थितियों और वैश्विक तनाव के बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कुलपति Dr Satbir Singh Gosal ने खाद (Fertiliser) और खाद्यान्न (Food) की उपलब्धता को कृषि उत्पादन और मानव कल्याण के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
मासिक शोध एवं विस्तार कार्य समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों, पशुओं और मानव समाज के कल्याण के लिए खाद और खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वैज्ञानिकों को दिया ‘दो F’ पर फोकस करने का संदेश
उर्वरक और खाद्य सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), फार्म एडवाइजरी सर्विस सेंटरों और विभागों के वैज्ञानिकों ने अपने-अपने जिलों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।इस दौरान डॉ. गोसल ने वैज्ञानिकों से कहा कि मानवता के अस्तित्व, दीर्घकालिक कृषि सुरक्षा और टिकाऊ खेती के लिए दो ‘F’ — फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फूड (खाद्यान्न) — पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने देश के खाद्य भंडार को मजबूत बनाने में किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के योगदान की भी सराहना की।
उर्वरकों के संतुलित उपयोग की दी सलाह
वैश्विक हालात को देखते हुए सावधानी जरूरी
डॉ. गोसल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच उर्वरकों का विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग बेहद आवश्यक है।
उन्होंने किसानों को संसाधनों की बचत और उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती पद्धतियां अपनाने का सुझाव दिया।
जल्दी पकने वाली धान किस्में अपनाने पर जोर
पानी और मजदूरों की समस्या का समाधान
कुलपति ने किसानों को जल्दी तैयार होने वाली ‘PR’ श्रेणी की धान किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अपनाने से श्रमिकों की कमी और पानी की बढ़ती समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
फसल विविधीकरण को बताया भविष्य की जरूरत
दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों पर फोकस
डॉ. गोसल ने कहा कि किसानों को केवल धान और गेहूं पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि किसान:
- ग्रीष्मकालीन दलहन फसलें
- तिलहन फसलें
- फल उत्पादन
- सब्जियां
- अन्य वैकल्पिक कृषि फसलें
अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं और कृषि को अधिक टिकाऊ बना सकते हैं।
कृषि विकास को आर्थिक प्रगति की कुंजी बताया
सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता
बैठक में स्वागत भाषण देते हुए Dr MS Bhullar, निदेशक विस्तार शिक्षा, ने कहा कि निरंतर कृषि विकास आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अतीत में किसानों और वैज्ञानिकों ने कई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और वर्तमान परिस्थितियों में भी सामूहिक प्रयासों से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाया जा सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से कृषि आदानों, खासकर उर्वरकों के समझदारीपूर्ण उपयोग पर जोर दिया।
Key Highlights:
- PAU में शोध एवं विस्तार कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित
- कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने खाद और खाद्यान्न सुरक्षा पर दिया जोर
- वैज्ञानिकों को ‘दो F’— फर्टिलाइजर और फूड पर फोकस करने की सलाह
- उर्वरकों के संतुलित उपयोग का संदेश
- जल्दी पकने वाली PR धान किस्मों को अपनाने की अपील
- DSR तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर
- फसल विविधीकरण को कृषि का भविष्य बताया
- दलहन, तिलहन, फल और सब्जियों की खेती बढ़ाने की सलाह
FAQ Section:
Q1. डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने किस मुद्दे पर जोर दिया?
उन्होंने खाद (Fertiliser) और खाद्यान्न (Food) सुरक्षा को कृषि और मानव कल्याण के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया।
Q2. किसानों को कौन-सी धान किस्में अपनाने की सलाह दी गई?
जल्दी तैयार होने वाली PR श्रेणी की धान किस्में अपनाने की सलाह दी गई।
Q3. DSR तकनीक क्या है?
डायरेक्ट सीडेड राइस (Direct Seeded Rice) तकनीक में धान की सीधी बुवाई की जाती है, जिससे पानी और श्रम दोनों की बचत होती है।
Q4. फसल विविधीकरण में किन फसलों पर जोर दिया गया?
दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और अन्य वैकल्पिक फसलों पर जोर दिया गया।
Q5. कृषि वैज्ञानिकों की बैठक में क्या समीक्षा की गई?
विभिन्न जिलों में चल रहे शोध और कृषि विस्तार कार्यों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई।
Conclusion:
वैश्विक अनिश्चितताओं और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों और वैज्ञानिकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि खाद और खाद्यान्न सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उर्वरकों का संतुलित उपयोग, जल संरक्षण, DSR तकनीक और फसल विविधीकरण जैसे कदम भविष्य की टिकाऊ और लाभकारी कृषि की दिशा तय करेंगे।

