पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी अनिवार्य विषय बनाने की मांग तेज, सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्र को लिखा पत्र

रक्षामंत्री और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की अपील, कहा- पंजाबी भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता जरूरी

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राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।

आर्मी स्कूलों में पंजाबी को लेकर उठी नई बहस

पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में नहीं पढ़ाए जाने के मुद्दे ने नया राजनीतिक और सामाजिक रंग ले लिया है। राज्यसभा सांसद Balbir Singh Seechewal ने इस मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

उन्होंने इस संबंध में रक्षा मंत्री Rajnath Singh और केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को पत्र लिखकर उचित कदम उठाने की मांग की है।


'पंजाब सीमा राज्य है, भाषा और संस्कृति से जुड़े प्रयोग न हों'

सीचेवाल ने जताई चिंता

अपने पत्र में सीचेवाल ने कहा कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, इसलिए यहां की भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार के नए प्रयोग से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाबी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि राज्य के लोगों की भावनाओं, इतिहास और पहचान से गहराई से जुड़ा विषय है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति का किया हवाला

स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात

सांसद ने अपने पत्र में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) स्थानीय और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर देती है।

उनका कहना है कि इस नीति की भावना के अनुरूप छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा और अध्ययन के अवसर मिलने चाहिए। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में नीति की मूल भावना का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।


पंजाब भाषा संशोधन अधिनियम का भी किया उल्लेख

कानून की भावना के विपरीत बताया फैसला

सीचेवाल ने कहा कि मौजूदा स्थिति Punjab Language (Amendment) Act, 2008 की भावना और प्रावधानों के भी अनुरूप नहीं दिखाई देती।

उन्होंने कहा कि पंजाब में पंजाबी भाषा को उचित महत्व मिलना चाहिए और शैक्षणिक संस्थानों में इसकी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।


छात्रों और अभिभावकों में बढ़ रही है उलझन

संस्कृत चुनने की सलाह दिए जाने का दावा

राज्यसभा सांसद ने चिंता जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पंजाबी पढ़ना चाहने वाले कुछ छात्रों को कथित तौर पर संस्कृत को अनिवार्य विषय के रूप में चुनने की सलाह दी जा रही है।

उनके अनुसार इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।


केंद्र सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

पंजाबी भाषा के अधिकारों की रक्षा पर जोर

सीचेवाल ने पंजाब के लोगों की ओर से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के विद्यार्थियों को पंजाबी भाषा पढ़ने का पूरा अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों का समाधान संवेदनशीलता और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।


Key Highlights:

  • राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र
  • पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी को अनिवार्य विषय बनाने की मांग
  • रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से हस्तक्षेप की अपील
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने का दिया हवाला
  • पंजाब भाषा संशोधन अधिनियम 2008 का भी किया उल्लेख
  • छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पर जताई चिंता

FAQ Section:

Q1. बलबीर सिंह सीचेवाल ने किस मुद्दे को उठाया है?

उन्होंने पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने की मांग उठाई है।

Q2. सीचेवाल ने किन मंत्रियों को पत्र लिखा है?

उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र भेजा है।

Q3. सांसद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्यों उल्लेख किया?

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्थानीय और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर देती है।

Q4. छात्रों को लेकर क्या चिंता जताई गई है?

उनका कहना है कि कुछ छात्रों को पंजाबी के बजाय संस्कृत चुनने की सलाह दिए जाने से भ्रम की स्थिति बन रही है।

Q5. पंजाब भाषा संशोधन अधिनियम का क्या संदर्भ है?

सीचेवाल का मानना है कि पंजाबी को पर्याप्त महत्व न देना अधिनियम की भावना के विपरीत है।


Conclusion:

पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी भाषा की अनिवार्यता का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा केंद्र सरकार को लिखे गए पत्र के बाद इस मामले पर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित निर्णय पर सभी की नजरें रहेंगी।Screenshot_2031

Edited By: Karan Singh

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