कमर्शियल LPG छोड़ डीजल भट्ठी और लकड़ी की ओर मुड़े कारोबारी

कैटरर्स और मिठाई-दूध उत्पाद बनाने वाले व्यापारियों के फैसले से घरेलू गैस उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत

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कई कैटरर्स, मिठाई दुकानदार और दूध उत्पाद बनाने वाले कारोबारी अब महंगी कमर्शियल एलपीजी की जगह डीजल भट्ठी, लकड़ी और भाप का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

सैकड़ों कमर्शियल LPG सिलेंडरों का इस्तेमाल करने वाले कैटरर्स, मिठाई दुकानदारों और दूध उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों के फैसले से अब घरेलू गैस उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।

दरअसल, इन कारोबारियों ने लगभग एलपीजी बर्नर का उपयोग बंद कर दिया है और इसकी जगह अब डीजल भट्ठियों या लकड़ी के ईंधन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इन यूनिटों के मालिकों का कहना है कि मिठाई, खोया और पनीर बनाने में भाप (स्टीम) का उपयोग ज्यादा किफायती है और इससे उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

दीपक शर्मा, जो अहमदगढ़ के देहलीज रोड पर स्थित एक दूध उत्पाद निर्माण इकाई के मालिक हैं, ने बताया कि पहले जो यूनिटें एलपीजी सिलेंडरों से सामान तैयार करती थीं, उन्होंने अब गैस बर्नर का उपयोग लगभग बंद कर दिया है।

उन्होंने कहा कि लकड़ी का ईंधन दूध उत्पाद और मिठाइयां बनाने के लिए सबसे किफायती है, जबकि एलपीजी काफी महंगी पड़ती है।
उनके अनुसार डीजल भट्ठियां भी अपेक्षाकृत महंगी हैं और उन्हें चलाने के लिए बिजली की भी जरूरत होती है।

रणजीत सिंह, जो संडौर गांव के निवासी हैं, ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन के रूप में लकड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। उन्होंने बताया कि छोटे कारोबारी अब व्यावसायिक खाना पकाने के लिए कृषि अवशेष और पेड़ों की टहनियों का इस्तेमाल भी करने लगे हैं।

 
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Edited By: Karan Singh

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