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पंजाब में शिक्षकों की कमी पर बढ़ा विवाद, यूनियनों ने सड़कों पर उतरने का किया ऐलान
सरकारी स्कूलों में 31,370 पद खाली होने का दावा, नियमितीकरण और न्यूनतम वेतन समेत लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन 10 अक्टूबर की रैली की तैयारी में
पंजाब में शिक्षकों के खाली पदों और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। शिक्षक यूनियनों ने आंदोलन की घोषणा की है, जबकि अमृतसर के कर्मचारी व पेंशनर संगठन 10 अक्टूबर को संगरूर में होने वाली रैली के लिए लामबंद हो रहे हैं।
शिक्षकों की कमी बना नया विवाद
पंजाब में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर कर्मचारी और शिक्षक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षक यूनियनों ने सड़क पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है, वहीं कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 10 अक्टूबर को संगरूर में होने वाली रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने की योजना बनाई है।
यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। अमृतसर के सरकारी डेंटल कॉलेज में ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ द एम्प्लॉइज फोरम की बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने लंबित मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
सरकारी स्कूलों में हजारों पद खाली होने का दावा
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) ने सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों को जल्द भरने की मांग की है। संगठन ने नियमित किए गए कंप्यूटर शिक्षकों को शिक्षा विभाग में मर्ज करने और सरकार की नियमितीकरण नीति में जरूरी संशोधन करने की मांग भी उठाई।DTF के जिला इकाई प्रमुख अश्वनी अवस्थी ने कहा कि अगस्त में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पंजाब विधानसभा में जानकारी दी थी कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 31,370 पद खाली हैं।
मास्टर कैडर के 20 हजार से अधिक पद रिक्त
संगठन के अनुसार, इन रिक्त पदों में 20,000 से अधिक पद मास्टर कैडर से जुड़े हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में पद खाली रहने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
DTF ने सरकार से इन सभी रिक्त पदों को जल्द भरने और भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने की मांग की है।
संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग
शिक्षक संगठनों ने विभिन्न श्रेणियों के संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी दोहराई है। अश्वनी अवस्थी के अनुसार, कर्मचारी संगठन लंबे समय से खाली पदों को भरने के साथ-साथ विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग करते आ रहे हैं।
मानदेय पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन की मांग
बैठक में मिड-डे मील वर्कर्स, आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर्स, सफाई कर्मचारियों, चौकीदारों और सेवादारों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए।
यूनियनों ने मांग की कि मानदेय या प्रोत्साहन राशि पर काम कर रहे इन कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाया जाए, ताकि उन्हें अधिक बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
10 अक्टूबर की संगरूर रैली पर नजर
कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 10 अक्टूबर को संगरूर में प्रस्तावित रैली को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। अमृतसर में हुई बैठक में नेताओं ने रैली को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
यूनियनों का कहना है कि लंबित सेवा और पेंशन संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह लामबंदी की जा रही है।
Key Highlights:
- पंजाब में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर कर्मचारी संगठनों का विरोध बढ़ा।
- सरकारी स्कूलों में 31,370 शिक्षक पद खाली होने का दावा किया गया।
- इनमें 20,000 से अधिक पद मास्टर कैडर के बताए गए।
- DTF ने कंप्यूटर शिक्षकों को शिक्षा विभाग में मर्ज करने की मांग की।
- संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग उठी।
- मिड-डे मील, आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स समेत अन्य कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन की मांग की गई।
- कर्मचारी और पेंशनर संगठन 10 अक्टूबर की संगरूर रैली के लिए लामबंद हो रहे हैं।
FAQ Section:
पंजाब में शिक्षकों की कमी को लेकर क्या विवाद है?
शिक्षक यूनियनों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं और इन्हें जल्द भरा जाना चाहिए।
सरकारी स्कूलों में कितने शिक्षक पद खाली बताए गए हैं?
शिक्षा मंत्री द्वारा अगस्त में विधानसभा में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए 31,370 पद खाली होने की बात कही गई है।
मास्टर कैडर में कितने पद खाली बताए गए हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 20,000 से अधिक रिक्तियां मास्टर कैडर में हैं।
DTF की प्रमुख मांगें क्या हैं?
DTF ने खाली पदों को भरने, नियमित किए गए कंप्यूटर शिक्षकों को शिक्षा विभाग में मर्ज करने और नियमितीकरण नीति में संशोधन की मांग की है।
कर्मचारी संगठन 10 अक्टूबर को क्या करेंगे?
कर्मचारी और पेंशनर संगठन 10 अक्टूबर को संगरूर में प्रस्तावित रैली में बड़ी संख्या में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।
Conclusion:
पंजाब में शिक्षकों के हजारों खाली पदों, कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतन जैसे मुद्दों ने सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। शिक्षक यूनियनों के आंदोलन के ऐलान और 10 अक्टूबर की संगरूर रैली की तैयारियों से आने वाले दिनों में कर्मचारी आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

