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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का आह्वान
हरियाणा के मंत्री कृष्ण बेदी बोले- महर्षि कश्यप का दर्शन ज्ञान, संयम और लोक कल्याण के मूल्यों को दर्शाता है
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के सीनेट हॉल में महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि और उनके विचारों के विभिन्न आयामों पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने और युवाओं को महर्षि कश्यप के विचारों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में महर्षि कश्यप पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के संस्कृत-पाली-प्राकृत विभाग और महर्षि कश्यप पीठ के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को सीनेट हॉल में ‘महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि: विविध आयाम’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारतीय ऋषि परंपरा में महर्षि कश्यप के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके दर्शन में ज्ञान, संयम और लोक कल्याण के मूल्यों को रेखांकित किया।
युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर जोर
कृष्ण बेदी ने युवाओं से महर्षि कश्यप की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप के विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं।उन्होंने महर्षि कश्यप पीठ के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
कश्यप समाज से विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम करने की अपील
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर इंद्री विधायक राम कुमार कश्यप मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों की परंपरा भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रही है।
उन्होंने कश्यप समाज से आह्वान किया कि वह कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर महर्षि कश्यप के विचारों और शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए काम करे।
भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख स्तंभ हैं महर्षि कश्यप
संगोष्ठी के संरक्षक और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने महर्षि कश्यप को भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख स्तंभों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि विवेकपूर्ण सोच और उचित निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। शिक्षा और शिक्षण को लेकर उनके विचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की दृष्टि से भी प्रासंगिक नजर आते हैं।
वेदों और भारतीय परंपरा में महर्षि कश्यप का योगदान
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता और साहित्य अकादमी, पंचकूला के उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने महर्षि कश्यप को वेदों के ऋषि और मंत्रों के रचयिता के रूप में वर्णित किया।
उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि को बेहतर ढंग से समझने के लिए पुराणों और इतिहास का अध्ययन समकालीन समाज के संदर्भ में किया जाना चाहिए।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से जोड़ा महर्षि कश्यप का दर्शन
प्रो. अग्निहोत्री ने महर्षि कश्यप के विचारों की प्रासंगिकता को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भारतीय अवधारणा से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि महर्षि कश्यप की विचारधारा को वर्तमान सामाजिक संदर्भों में समझना भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यापक रूप से देखने में मदद कर सकता है।
Key Highlights:
- कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।
- कार्यक्रम का विषय ‘महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि: विविध आयाम’ रहा।
- मंत्री कृष्ण बेदी ने महर्षि कश्यप के दर्शन को ज्ञान, संयम और लोक कल्याण से जोड़ा।
- युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया गया।
- महर्षि कश्यप पीठ के लिए वित्तीय सहायता का आश्वासन दिया गया।
- कश्यप समाज से विश्वविद्यालय के साथ मिलकर महर्षि कश्यप के विचारों का प्रचार-प्रसार करने की अपील।
- प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने महर्षि कश्यप के विचारों को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ से जोड़ा।
FAQ Section:
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में संगोष्ठी का विषय क्या था?
संगोष्ठी का विषय ‘महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि: विविध आयाम’ था।
संगोष्ठी का आयोजन किसने किया?
इसका आयोजन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के संस्कृत-पाली-प्राकृत विभाग और महर्षि कश्यप पीठ ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौन थे?
हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।
महर्षि कश्यप के दर्शन को किन मूल्यों से जोड़ा गया?
उनके दर्शन को ज्ञान, संयम, विवेकपूर्ण निर्णय और लोक कल्याण जैसे मूल्यों से जोड़ा गया।
महर्षि कश्यप के विचारों को किस भारतीय अवधारणा से जोड़ा गया?
प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने उनके विचारों की प्रासंगिकता को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा से जोड़ा।
Conclusion:
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में महर्षि कश्यप की जीवन-दृष्टि और भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ महर्षि कश्यप के विचारों को वर्तमान सामाजिक संदर्भों में समझने की जरूरत पर जोर दिया।

