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जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने की मांग, जम्मू पंजाबी मोर्चा ने निकाली शांतिपूर्ण रैली
स्कूलों के पाठ्यक्रम में पंजाबी को शामिल करने और समुदाय की भाषा के तौर पर बढ़ावा देने की उठी मांग
जम्मू में सिख समुदाय के लोगों ने जम्मू पंजाबी मोर्चा के बैनर तले शांतिपूर्ण विरोध रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने और उसे आधिकारिक स्तर पर बढ़ावा देने की मांग की।
जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर सिख समुदाय के सदस्यों ने जम्मू में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जम्मू पंजाबी मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पंजाबी भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) प्रशासन और सरकार से स्कूलों के पाठ्यक्रम में पंजाबी भाषा को शामिल करने तथा इसे समुदाय की भाषा के रूप में बढ़ावा देने की अपील की।
स्कूलों में पंजाबी को फिर शामिल करने की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा का पुराना शैक्षणिक और सामाजिक महत्व रहा है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई को दोबारा शुरू किया जाए और विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा सीखने का अवसर मिले।लंबे समय से लंबित है मांग
जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के महासचिव सुरजन सिंह ने कहा कि रैली का उद्देश्य स्कूलों में पंजाबी भाषा को बहाल करने की लंबे समय से लंबित मांग को सामने लाना है।
उन्होंने कहा कि 1947 से पहले स्कूलों में पंजाबी पढ़ाई जाती थी, लेकिन बाद में पंजाब से बाहर के क्षेत्रों में इसे पाठ्यक्रम से हटा दिया गया।
सुरजन सिंह के अनुसार, समुदाय लंबे समय से उपराज्यपाल प्रशासन से पंजाबी भाषा को स्कूलों में लागू करने की मांग करता आ रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाया गया।
‘पंजाबी हमारी मातृभाषा है’
प्रदर्शन के दौरान सुरजन सिंह ने पंजाबी भाषा को समुदाय की पहचान और मातृभाषा से जोड़ते हुए कहा कि पंजाबी को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पंजाबी को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के साथ-साथ समुदाय की भाषा के तौर पर भी प्रोत्साहित किया जाए।
भाषा को लेकर समुदाय ने उठाई आवाज
जम्मू में आयोजित इस रैली के जरिए प्रदर्शनकारियों ने भाषा संरक्षण और नई पीढ़ी तक पंजाबी को पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि स्कूलों में भाषा की शिक्षा उपलब्ध होने से बच्चे अपनी भाषाई विरासत और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रह सकेंगे।
Key Highlights:
- जम्मू में सिख समुदाय ने पंजाबी भाषा के समर्थन में शांतिपूर्ण रैली निकाली।
- प्रदर्शन जम्मू पंजाबी मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया।
- स्कूलों के पाठ्यक्रम में पंजाबी को शामिल करने की मांग की गई।
- प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी को समुदाय की भाषा के तौर पर बढ़ावा देने की अपील की।
- जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के महासचिव सुरजन सिंह ने लंबे समय से लंबित मांग का मुद्दा उठाया।
- प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 1947 से पहले स्कूलों में पंजाबी पढ़ाई जाती थी।
- समुदाय ने पंजाबी को अपनी मातृभाषा बताते हुए इसके संरक्षण की मांग की।
FAQ Section
1. जम्मू में पंजाबी भाषा को लेकर प्रदर्शन क्यों हुआ?
प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के पाठ्यक्रम में पंजाबी भाषा को शामिल करने और जम्मू-कश्मीर में इसे बढ़ावा देने की मांग को लेकर रैली निकाली।
2. प्रदर्शन किस संगठन के बैनर तले हुआ?
रैली का आयोजन जम्मू पंजाबी मोर्चा के बैनर तले किया गया।
3. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से क्या मांग की?
उन्होंने पंजाबी को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने और समुदाय की भाषा के रूप में इसे बढ़ावा देने की मांग की।
4. सुरजन सिंह ने क्या कहा?
जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के महासचिव सुरजन सिंह ने कहा कि स्कूलों में पंजाबी को बहाल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है और पंजाबी उनकी मातृभाषा है।
Conclusion:
जम्मू में पंजाबी भाषा को लेकर आयोजित शांतिपूर्ण रैली में समुदाय ने सरकार और उपराज्यपाल प्रशासन से स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई दोबारा शुरू करने तथा भाषा को बढ़ावा देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पंजाबी को शिक्षा व्यवस्था में स्थान मिलने से नई पीढ़ी अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सकेगी।

