अमृतसर में दो किशोरियों की आत्महत्या से मचा हड़कंप, स्कूलों में कथित उत्पीड़न और फीस विवाद पर उठे सवाल

15 और 17 साल की छात्राओं की मौत के बाद परिवारों ने स्कूल स्तर पर कथित प्रताड़ना के आरोप लगाए, विशेषज्ञों ने किशोरों की मानसिक सेहत पर जताई चिंता

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अमृतसर में दो किशोरियों की आत्महत्या के मामलों ने शहर में चिंता बढ़ा दी है। एक मामले में छात्रा के परिवार ने स्कूल में कथित अपमान और निलंबन की बात कही, जबकि दूसरे मामले में ₹20,000 फीस बकाया को लेकर कथित दबाव के आरोप लगाए गए हैं।

 

अमृतसर में कम उम्र की दो छात्राओं की आत्महत्या के मामलों ने परिवारों, स्कूल प्रशासन और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में परिवारों ने स्कूल से जुड़े कथित व्यवहार और दबाव को लेकर चिंता जताई है।

पहला मामला 15 वर्षीय छात्रा का है, जिसकी 29 सितंबर को आत्महत्या से मौत हो गई। परिवार के मुताबिक, वह शांत स्वभाव की थी और ज्यादा लोगों से घुलती-मिलती नहीं थी।

15 वर्षीय छात्रा की मौत के बाद परिवार ने उठाए सवाल

मृतका के पिता अशोक कुमार (60) ने बताया कि उनकी बेटी बहुत कम बोलती थी और अपने तक ही रहती थी। परिवार आर्थिक रूप से साधारण स्थिति में है। पिता रोजाना साइकिल से लंबी दूरी तय कर जलेबी बेचते हैं।

परिवार में पांच सदस्यों के लिए केवल दो मोबाइल फोन होने की बात भी पिता ने बताई। परिवार का कहना है कि बेटी की मौत के पीछे की वास्तविक वजह जानना उनके लिए सबसे बड़ा सवाल है।

परिवार ने स्कूल में कथित अपमान का लगाया आरोप

मामले की पड़ताल में सामने आया कि छात्रा को स्कूल में कथित तौर पर अपमान का सामना करना पड़ा था। वह उन चार छात्राओं में शामिल थी जिन्हें एक महीने के लिए निलंबित किया गया था।

परिवार ने आरोप लगाया कि इस घटना से छात्रा मानसिक रूप से प्रभावित हुई हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की जांच के निष्कर्ष अलग से महत्वपूर्ण होंगे।

दूसरे मामले में फीस को लेकर कथित उत्पीड़न का आरोप

दूसरा मामला 17 वर्षीय छात्रा का है, जिसकी मौत 30 मई को आत्महत्या के बाद हुई। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि स्कूल फीस को लेकर कथित तौर पर उसे परेशान किया जा रहा था।

मृतका की मौसी के अनुसार, छात्रा ने 22 मई, यानी स्कूल के अंतिम दिन, कोई जहरीला पदार्थ लेने के बाद तबीयत बिगड़ने की स्थिति का सामना किया था।

परिवार ने आरोप लगाया कि करीब ₹20,000 की फीस बकाया होने के कारण स्कूल स्टाफ, जिसमें प्रिंसिपल भी शामिल थे, ने छात्रा पर कथित दबाव बनाया।

परिवार ने स्कूल स्टाफ पर लगाए गंभीर आरोप

परिवार का कहना है कि फीस जमा न कर पाने की वजह से छात्रा को कथित तौर पर परेशान किया गया। इन आरोपों को लेकर परिवार ने चिंता जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग का मुद्दा उठाया है।

दोनों घटनाओं ने शहर में बढ़ाई चिंता

दोनों मामलों ने अमृतसर में किशोरों की मानसिक सेहत, स्कूल के माहौल और विद्यार्थियों पर पड़ने वाले सामाजिक एवं आर्थिक दबाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

परिवारों की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि स्कूलों में विद्यार्थियों की भावनात्मक परेशानियों को समय रहते कैसे पहचाना जाए और उन्हें उचित सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाए।

विशेषज्ञ ने किशोरों की मानसिक सेहत पर जताई चिंता

किशोरियों की मानसिक स्थिति और आत्महत्या के जोखिम को समझने के लिए गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. रुपम ढिल्लों से बात की गई।

उन्होंने किशोर आयु वर्ग में आत्महत्या को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में रेखांकित किया। ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, परिवार का सहयोग और समय पर पेशेवर हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बच्चों में बदलाव को नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों में व्यवहार, पढ़ाई, सामाजिक संपर्क या भावनात्मक स्थिति में अचानक बदलाव को गंभीरता से लेना जरूरी है। परिवार और स्कूल यदि किसी बच्चे को लगातार तनाव में देखते हैं, तो समय रहते काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।

Key Highlights:

  • अमृतसर में 15 और 17 साल की दो छात्राओं की आत्महत्या के मामलों ने चिंता बढ़ाई।
  • 15 वर्षीय छात्रा की मौत 29 सितंबर को हुई।
  • परिवार के अनुसार, छात्रा शांत स्वभाव की थी और कम लोगों से मिलती-जुलती थी।
  • पड़ताल में छात्रा के स्कूल में कथित अपमान और एक महीने के निलंबन की बात सामने आई।
  • दूसरे मामले में 17 वर्षीय छात्रा की मौत 30 मई को हुई।
  • परिवार ने करीब ₹20,000 फीस बकाया को लेकर स्कूल स्टाफ पर कथित उत्पीड़न का आरोप लगाया।
  • दोनों मामलों में परिवारों ने स्कूल से जुड़े घटनाक्रम को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • विशेषज्ञों ने किशोरों की मानसिक सेहत और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया।

FAQ Section:

अमृतसर में कितनी छात्राओं की आत्महत्या के मामले सामने आए?

दी गई जानकारी के अनुसार, 15 और 17 वर्ष की दो छात्राओं की आत्महत्या से मौत के मामले सामने आए हैं।

15 वर्षीय छात्रा के मामले में परिवार ने क्या आरोप लगाए?

परिवार ने स्कूल में कथित अपमान और छात्रा के एक महीने के निलंबन को लेकर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

दूसरे मामले में परिवार ने किस मुद्दे को लेकर आरोप लगाए?

17 वर्षीय छात्रा के परिवार ने करीब ₹20,000 की स्कूल फीस को लेकर कथित उत्पीड़न और दबाव के आरोप लगाए हैं।

किशोरों की मानसिक सेहत के लिए परिवार क्या कर सकते हैं?

बच्चे के व्यवहार या भावनात्मक स्थिति में अचानक बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खुले संवाद, परिवार का सहयोग और जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना महत्वपूर्ण है।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता कहां मिल सकती है?

भारत में Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 के जरिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता ली जा सकती है। तत्काल खतरे की स्थिति में स्थानीय आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करना चाहिए।

Conclusion:

अमृतसर में दो किशोरियों की आत्महत्या के मामलों ने स्कूलों में विद्यार्थियों की मानसिक सेहत, फीस और अनुशासन से जुड़े दबाव तथा समय पर भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। परिवारों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, जबकि स्कूलों और अभिभावकों के लिए यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि तनाव से गुजर रहे बच्चों को समय रहते सुरक्षित और संवेदनशील सहायता मिले।Screenshot_414

Edited By: Atul Sharma

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