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‘पंजाब दा इतिहास’ की 3 खंडों में 1,980 पन्नों की किताब जारी, CM मान बोले- विरासत बचाना हमारी बड़ी जिम्मेदारी
चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया पुस्तक का विमोचन, नई पीढ़ी को पंजाब की जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने पर दिया जोर
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में तीन खंडों और 1,980 पन्नों वाली ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने पंजाब के सदियों पुराने इतिहास, कला, संस्कृति और साहित्य को संरक्षित करने की जरूरत पर जोर दिया।
चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में रविवार को पंजाब के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस अवसर पर तीन खंडों में प्रकाशित ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन किया।
करीब 1,980 पन्नों में संकलित यह पुस्तक पंजाब की सदियों पुरानी यात्रा, उपलब्धियों, उतार-चढ़ाव और समय के साथ हुए बदलावों को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री ने पंजाब के इतिहास को दर्ज करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।
पंजाब की विरासत को संरक्षित करने पर CM मान का जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब लंबे समय से कला, संस्कृति और साहित्य की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना इसलिए जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी अपने इतिहास और जड़ों से जुड़ी रहे।मान ने कहा कि पंजाब प्राचीन काल से ही सभ्यता और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमि रहा है। यहां के मेहनती और साहसी लोगों ने इस धरती पर इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण अध्याय देखे हैं।
इतिहास से जुड़ाव बनाए रखना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और विरासत से जुड़ी होती है। इसलिए आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत की जानकारी देना और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी संस्कृति और गौरवशाली अतीत को संभालकर रखता है, उसकी पहचान लंबे समय तक कायम रहती है। वहीं, अपनी विरासत से दूर होने पर समाज की सांस्कृतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है।
‘पंजाब दा इतिहास’ में दर्ज है सदियों का सफर
तीन खंडों में प्रकाशित ‘पंजाब दा इतिहास’ को पंजाब के इतिहास, सामाजिक बदलावों और सांस्कृतिक यात्रा के दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक के माध्यम से पंजाब के लंबे ऐतिहासिक सफर को दर्ज करने का प्रयास किया गया है, जिसमें राज्य की उपलब्धियों के साथ-साथ विभिन्न दौर में आए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी समझने का अवसर मिलता है।
गुरु साहिबानों की शिक्षाओं और बलिदान का उल्लेख
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाबियों को महान सिख गुरु साहिबानों से बलिदान, साहस और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की विरासत मिली है।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिबानों ने लोगों को अत्याचार, दमन और अन्याय का विरोध करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह भावना लंबे समय से पंजाबी समाज के चरित्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत
मान ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास और संस्कृति से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी जरूरी है।
Key Highlights:
- CM भगवंत सिंह मान ने ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन किया।
- पुस्तक तीन खंडों में कुल 1,980 पन्नों की है।
- विमोचन कार्यक्रम पंजाब कला भवन, चंडीगढ़ में हुआ।
- पुस्तक में पंजाब के सदियों पुराने सफर और बदलावों का दस्तावेजीकरण किया गया है।
- CM मान ने पंजाब की कला, संस्कृति और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने पर जोर दिया।
- नई पीढ़ी को पंजाब के इतिहास और अपनी जड़ों से जोड़ने की बात कही गई।
- गुरु साहिबानों की शिक्षाओं से मिली बलिदान और साहस की विरासत का भी उल्लेख किया गया।
- सरकार की ओर से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों पर जोर दिया गया।
FAQ Section:
‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक किसने जारी की?
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन किया।
‘पंजाब दा इतिहास’ कितने पन्नों की है?
यह पुस्तक तीन खंडों में प्रकाशित हुई है और इसमें कुल 1,980 पन्ने हैं।
पुस्तक में किस विषय को दर्ज किया गया है?
पुस्तक में पंजाब के सदियों पुराने इतिहास, उपलब्धियों, उतार-चढ़ाव, परिवर्तन और सांस्कृतिक यात्रा को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
CM मान ने पंजाब की संस्कृति को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पंजाब की कला, संस्कृति और साहित्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और इतिहास से जुड़ी रहे।
Conclusion:
‘पंजाब दा इतिहास’ के तीन खंडों का विमोचन राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस अवसर पर इतिहास, संस्कृति और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि पंजाब की पहचान उसकी समृद्ध विरासत से गहराई से जुड़ी है।

