76 साल की उम्र में भी शोध में सक्रिय डॉ. धर्म सिंह, गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ हस्तलिपियों को बचाने की उठाई आवाज

पंजाबी साहित्य, भाषा और इतिहास के संरक्षण में चार दशक से अधिक समय से योगदान दे रहे वरिष्ठ विद्वान ने दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण पर दिया जोर

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पंजाबी साहित्य और शोध जगत के प्रतिष्ठित विद्वान डॉ. धर्म सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ हस्तलिपियों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक धरोहर नहीं बल्कि पंजाब के साहित्य, इतिहास, भाषा और कला का अमूल्य खजाना हैं।

पंजाबी साहित्य, भाषा और इतिहास के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक समय से महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ विद्वान Dharam Singh एक बार फिर चर्चा में हैं। 76 वर्ष की आयु में भी शोध कार्यों में सक्रिय डॉ. धर्म सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ हस्तलिपियों (पांडुलिपियों) के संरक्षण की आवश्यकता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

पूर्व में Guru Nanak Dev University के स्कूल ऑफ पंजाबी स्टडीज के प्रमुख रह चुके डॉ. धर्म सिंह का मानना है कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों का संरक्षण पंजाब की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को बचाने के लिए बेहद जरूरी है।

चार दशक से अधिक समय से शोध और साहित्य सेवा

डॉ. धर्म सिंह लंबे समय से पंजाबी साहित्यिक शोध के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने साहित्य, भाषा, इतिहास और संस्कृति से जुड़े अनेक विषयों पर गहन अध्ययन किया है।

16 पुस्तकों के लेखक हैं डॉ. धर्म सिंह

उन्होंने अब तक 16 महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं। उनकी कई पुस्तकें विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का हिस्सा हैं।

शैक्षणिक क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों में पंजाबी शोध के लिए बाह्य परीक्षक (External Examiner) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

पाकिस्तान में पंजाबी शोध पर लिख रहे नई पुस्तक

उम्र के इस पड़ाव पर भी डॉ. धर्म सिंह लगातार शोध कार्यों में व्यस्त हैं।

नई किताब पर कर रहे काम

वर्तमान में वह "Pakistan Vich Punjabi Khoj" (पाकिस्तान में पंजाबी शोध) शीर्षक से एक नई पुस्तक पर कार्य कर रहे हैं। यह पुस्तक सीमा पार पंजाबी भाषा और साहित्य पर हो रहे शोध कार्यों को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।

गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण की मांग

डॉ. धर्म सिंह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब की पुरानी हस्तलिपियों की पहचान, संरक्षण और व्यवस्थित अध्ययन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, ऐतिहासिक धरोहर भी

उनके अनुसार ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें साहित्य, इतिहास, भाषा और कला से जुड़ी अमूल्य जानकारियां भी सुरक्षित हैं।

उन्होंने बताया कि कई हस्तलिपियों में दुर्लभ पद्य और गद्य रचनाएं मिलती हैं, जो पंजाबी साहित्य और गुरमुखी लिपि के विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इतिहास और भूगोल के अध्ययन में भी महत्वपूर्ण

डॉ. धर्म सिंह का कहना है कि इन पांडुलिपियों में दर्ज तिथियां और ऐतिहासिक संदर्भ शोधकर्ताओं के लिए बेहद उपयोगी हैं।

ऐतिहासिक तथ्यों को समझने में मददगार

इन दस्तावेजों के माध्यम से:

  • सिख साहित्यिक परंपराओं की समयरेखा निर्धारित की जा सकती है।
  • पंजाब के प्राचीन स्थानों और भूगोल संबंधी जानकारियां प्राप्त होती हैं।
  • ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन आसान होता है।
  • भाषा और लिपि के विकास को समझा जा सकता है।

कला और सुलेख का भी अनमोल खजाना

डॉ. धर्म सिंह ने इन हस्तलिपियों के कलात्मक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

दुर्लभ कलात्मक विरासत

उन्होंने बताया कि कई पांडुलिपियों में:

  • सुंदर सुलेख (Calligraphy)
  • आकर्षक सजावटी बॉर्डर
  • कलात्मक पृष्ठ डिजाइन
  • पारंपरिक हस्तलिपि शैली

देखने को मिलती है, जो उन्हें दृश्य कला और पांडुलिपि कला का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बनाती है।

भाषा अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण स्रोत

इन हस्तलिपियों में मिलने वाले शब्दों, वर्तनी और लेखन शैली में अंतर भाषा वैज्ञानिकों के लिए बहुमूल्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं।

गुरमुखी लिपि के विकास को समझने में सहायक

भाषाविदों और शोधकर्ताओं के लिए ये पांडुलिपियां:

  • गुरमुखी लिपि के विकास
  • प्राचीन पंजाबी भाषा
  • लेखन शैली में बदलाव
  • भाषाई इतिहास

के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं।


Key Highlights:

  • डॉ. धर्म सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण की मांग की।
  • 76 वर्ष की उम्र में भी शोध कार्यों में सक्रिय हैं।
  • अब तक 16 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं।
  • वर्तमान में "Pakistan Vich Punjabi Khoj" पुस्तक पर काम कर रहे हैं।
  • पांडुलिपियों को साहित्य, इतिहास, भाषा और कला का अमूल्य स्रोत बताया।
  • पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों में पंजाबी शोध के बाह्य परीक्षक नियुक्त किए गए हैं।
  • हस्तलिपियों में दुर्लभ साहित्यिक और ऐतिहासिक सामग्री संरक्षित है।

FAQ Section:

Q1. डॉ. धर्म सिंह कौन हैं?

उत्तर: डॉ. धर्म सिंह पंजाबी साहित्य के वरिष्ठ शोधकर्ता और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ पंजाबी स्टडीज के पूर्व प्रमुख हैं।

Q2. उन्होंने किस मुद्दे पर चिंता जताई है?

उत्तर: उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ हस्तलिपियों और पांडुलिपियों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Q3. डॉ. धर्म सिंह ने कितनी पुस्तकें लिखी हैं?

उत्तर: उन्होंने अब तक 16 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें से कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।

Q4. उनकी नई पुस्तक किस विषय पर है?

उत्तर: उनकी आगामी पुस्तक "Pakistan Vich Punjabi Khoj" पाकिस्तान में पंजाबी शोध पर आधारित है।

Q5. पांडुलिपियां क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर: इनमें साहित्य, इतिहास, भाषा, गुरमुखी लिपि, कला और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी संरक्षित है।


Conclusion:

डॉ. धर्म सिंह का योगदान केवल पंजाबी साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पंजाब की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गुरु ग्रंथ साहिब की दुर्लभ हस्तलिपियों के संरक्षण की उनकी अपील आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास, भाषा और साहित्य की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।Screenshot_1992

Edited By: Karan Singh

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