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आनंदपुर साहिब में होला मोहल्ला के अवसर पर हेरिटेज गेम्स का भव्य आगाज़
Punjab की समृद्ध सांस्कृतिक और युद्धक विरासत का जीवंत प्रदर्शन, निहंगों और छात्रों ने दिखाया उत्साह
Heritage Games का शुभारंभ रविवार को ऐतिहासिक Charan Ganga Stadium में हुआ। यह आयोजन वार्षिक Hola Mohalla के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिख युद्ध परंपराओं, लोक संस्कृति, गतका प्रदर्शन, घुड़सवारी, भांगड़ा-गिद्धा और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक और युद्धक विरासत को प्रदर्शित करने वाले हेरिटेज गेम्स का रविवार को ऐतिहासिक चरण गंगा स्टेडियम, आनंदपुर साहिब में उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ। यह आयोजन वार्षिक होला मोहल्ला समारोह के साथ आयोजित किया गया।
उद्घाटन समारोह में सिख युद्ध परंपराओं और जीवंत लोक संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। इस अवसर पर श्रद्धालु, पर्यटक, निहंग जत्थे तथा खालसा और आसपास के कॉलेजों के छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अतिरिक्त उपायुक्त (ग्रामीण विकास) चंद्र ज्योति सिंह ने पारंपरिक मशाल प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
स्टेडियम पंजाब की विरासत के रंगों से सराबोर दिखाई दिया। पारंपरिक परिधान, युद्धक कौशल और लोक प्रस्तुतियों ने राज्य की गहरी जड़ों से जुड़ी संस्कृति को उजागर किया।
सुबह से ही आयोजन स्थल सिख धर्म की युद्धक भावना से गूंज उठा। पारंपरिक नीले वस्त्रों में सजे निहंग योद्धाओं ने तलवार, भाला, ढाल और चक्कर जैसे हथियारों के साथ गतका और युद्धाभ्यास के रोमांचक प्रदर्शन किए। घुड़सवारी प्रदर्शन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें सजे-धजे घोड़ों पर सवार निहंगों ने तेज गति से नकली हमले, तीव्र मोड़ और हथियारों के अभ्यास को अद्भुत सटीकता के साथ प्रस्तुत किया। घोड़ों की टापों और तलवारों की टकराहट ने सिख इतिहास के दृश्यों को जीवंत कर दिया, जिससे दर्शकों ने बार-बार तालियां बजाईं।
छात्रों ने गतका प्रदर्शनी मुकाबलों और सामूहिक युद्धाभ्यास में भाग लिया, जिसमें उन्होंने किरपान और लाठियों के साथ फुर्ती, अनुशासन और समन्वय का प्रदर्शन किया। नेशनल गतका एसोसिएशन से जुड़े कलाकारों ने प्रतियोगिताओं के दौरान उत्कृष्ट तकनीक का प्रदर्शन किया और जोरदार सराहना प्राप्त की। आयोजकों ने कहा कि छात्रों की बड़ी भागीदारी पारंपरिक खेलों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि का संकेत है।
युद्धक प्रतियोगिताओं के अलावा, यह आयोजन सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी सामने आया। पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता, भव्य मार्च पास्ट, मसाल (पारंपरिक अग्नि प्रदर्शन), ढाडी दरबार और कविश्री पाठ ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक गहराई प्रदान की। ढाडी और कविश्री जत्थों की प्रस्तुतियों ने वीरता और बलिदान की गाथाओं को जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक प्रस्तुतियों ने युद्धक प्रदर्शनों को और भी रंगीन बना दिया। आसपास के कॉलेजों के छात्रों ने आकर्षक फुलकारी परिधानों में ऊर्जावान भांगड़ा और गरिमामय गिद्धा प्रस्तुत किया। ढोल की थाप पर पुरुष छात्रों ने जोशीला भांगड़ा किया, जबकि छात्राओं ने लय और संतुलन के साथ गिद्धा प्रस्तुत किया। घुड़ नृत्य, टेंट पेगिंग, रंगोली प्रदर्शनी और सजे-धजे हाथियों ने उत्सव के माहौल को और भव्य बना दिया।
