- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- Gursharan Singh Birth Anniversary: पंजाबी रंगमंच के महान कलाकार को याद कर कलाकारों ने उठाई विरासत दर...
Gursharan Singh Birth Anniversary: पंजाबी रंगमंच के महान कलाकार को याद कर कलाकारों ने उठाई विरासत दर्जे की मांग
अमृतसर के Ranjit Pura स्थित पैतृक घर में 97वीं जयंती पर जुटे रंगकर्मी, बोले- आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक और सीखने का केंद्र बन सकता है यह स्थान
पंजाबी रंगमंच को आम लोगों की आवाज बनाने वाले प्रसिद्ध नाटककार गुरशरण सिंह की 97वीं जयंती पर कलाकार उनके पैतृक घर Ranjit Pura पहुंचे। इस दौरान उनके घर को Heritage Status देने की मांग उठाई गई।
पंजाबी रंगमंच को जनसरोकारों से जोड़ने वाले प्रसिद्ध नाटककार और रंगकर्मी गुरशरण सिंह को उनकी 97वीं जयंती पर याद किया गया। इस अवसर पर कई प्रमुख कलाकार और रंगमंच से जुड़े लोग अमृतसर के Ranjit Pura स्थित उनके पैतृक घर पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने गुरशरण सिंह के पैतृक घर को Heritage Status देने की मांग उठाई। रंगकर्मियों का कहना है कि इस स्थान को आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक, रचनात्मक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
पांच दशक तक पंजाबी रंगमंच को दी नई दिशा
गुरशरण सिंह ने अपने करीब पांच दशक के रंगमंचीय सफर में थिएटर को सामाजिक मुद्दों और आम लोगों की समस्याओं से जोड़ने का प्रयास किया। कलाकारों के अनुसार, उन्होंने मंच को सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर चर्चा तथा लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।उनके नाटकों, लेखन, गीतों और सांस्कृतिक गतिविधियों में समाज के वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
पैतृक घर को Heritage Status देने की मांग
गुरशरण सिंह की 97वीं जयंती के मौके पर Gursharan Singh Memorial Trust, Gursharan Singh Heritage Conservation Committee और Manch Rangmanch सहित विभिन्न संगठनों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
रंगमंच से जुड़े प्रसिद्ध कलाकार Kewal Dhaliwal ने कहा कि गुरशरण सिंह ने अपने जीवन और रचनात्मक कार्य का एक बड़ा हिस्सा इसी घर में बिताया। इसलिए इस स्थान को संरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक और सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
1958 में शुरू हुआ था रंगमंचीय सफर
Kewal Dhaliwal के अनुसार, गुरशरण सिंह का थिएटर करियर 1958 में शुरू हुआ था। उनके काम में महिलाओं, दलितों और भूमिहीन लोगों सहित समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों के मुद्दों को विशेष स्थान मिला।
उन्होंने कहा कि आज भी पंजाब कई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में गुरशरण सिंह के जनपक्षधर और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विचारों को आगे बढ़ाना जरूरी है।
थिएटर को बनाया सामाजिक बदलाव का माध्यम
गुरशरण सिंह ने पारंपरिक थिएटर मंच से आगे बढ़कर रंगमंच को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। उनके नाटकों और सांस्कृतिक गतिविधियों में सामाजिक असमानता और अन्याय जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए जाते थे।
रंगकर्मियों के अनुसार, उनका मानना था कि संस्कृति और कला का समाज से सीधा संवाद होना चाहिए और थिएटर को आम लोगों की पहुंच से बाहर नहीं रहना चाहिए।
बेटी Navsharan Singh ने भी साझा की यादें
मानवाधिकार कार्यकर्ता और गुरशरण सिंह की बेटी Dr Navsharan Singh ने कहा कि उनके पिता का रचनात्मक काम आम लोगों के साथ खड़े होने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से जुड़ा रहा।
उन्होंने कहा कि गुरशरण सिंह की सोच में संस्कृति समाज से अलग कोई गतिविधि नहीं थी, बल्कि समाज के सवालों से जुड़ने और उन पर संवाद करने का माध्यम थी।
आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे गुरशरण सिंह की विरासत
कार्यक्रम में मौजूद रंगकर्मियों ने कहा कि गुरशरण सिंह की विरासत को केवल स्मृति कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके पैतृक घर को संरक्षित कर इसे युवा कलाकारों और थिएटर से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी स्थान बनाया जा सकता है।
कलाकारों का मानना है कि ऐसा केंद्र नई पीढ़ी को पंजाबी रंगमंच के इतिहास और गुरशरण सिंह के सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में मदद कर सकता है।
Key Highlights:
- गुरशरण सिंह की 97वीं जयंती पर Ranjit Pura स्थित पैतृक घर में कार्यक्रम।
- कलाकारों और रंगकर्मियों ने Heritage Status देने की मांग उठाई।
- Gursharan Singh Memorial Trust सहित कई संगठनों ने हिस्सा लिया।
- गुरशरण सिंह का थिएटर करियर 1958 में शुरू हुआ था।
- उनके काम में महिलाओं, दलितों और भूमिहीन लोगों के मुद्दों को जगह मिली।
- उन्होंने थिएटर को सामाजिक सवालों और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।
- पैतृक घर को सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने का सुझाव।
- बेटी Dr Navsharan Singh ने भी उनके विचारों और कार्यों को याद किया।
FAQ Section:
Q1. गुरशरण सिंह कौन थे?
गुरशरण सिंह प्रसिद्ध पंजाबी नाटककार, रंगकर्मी और सामाजिक विचारक थे, जिन्होंने पंजाबी थिएटर को आम लोगों और सामाजिक मुद्दों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Q2. गुरशरण सिंह का थिएटर करियर कब शुरू हुआ?
उनके थिएटर करियर की शुरुआत 1958 में हुई थी।
Q3. गुरशरण सिंह के पैतृक घर को लेकर क्या मांग उठी है?
कलाकारों और विभिन्न संगठनों ने उनके पैतृक घर को Heritage Status देने की मांग की है।
Q4. उनका पैतृक घर कहां स्थित है?
गुरशरण सिंह का पैतृक घर अमृतसर के Ranjit Pura इलाके में स्थित है।
Q5. उनके थिएटर की खासियत क्या थी?
उनके थिएटर में सामाजिक असमानता, अन्याय और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जाती थी। उन्होंने थिएटर को सामाजिक संवाद और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।
Conclusion:
गुरशरण सिंह ने पंजाबी रंगमंच को सामाजिक सरोकारों और आम लोगों की आवाज से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी 97वीं जयंती पर Ranjit Pura स्थित पैतृक घर को Heritage Status देने की मांग ने उनकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की जरूरत को सामने रखा। कलाकारों का मानना है कि इस स्थान को भविष्य में युवा पीढ़ी के लिए सांस्कृतिक और सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
