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Jalandhar News: HRMMV में ‘बीज से विरासत’ वर्कशॉप, छात्राओं ने सीखा Seed Balls बनाकर जैव विविधता बचाने का तरीका
पर्यावरण संरक्षण और देशी पौधों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को जापानी Seed Ball तकनीक की दी गई जानकारी
Hans Raj Mahila Maha Vidyalaya में ‘Beej Se Virasat: Seed Balls & Native Biodiversity’ विषय पर वर्कशॉप आयोजित की गई। छात्राओं को Seed Balls तैयार करने और जैव विविधता संरक्षण की तकनीक सिखाई गई।
जालंधर स्थित Hans Raj Mahila Maha Vidyalaya (HRMMV) में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘Beej Se Virasat: Seed Balls & Native Biodiversity’ विषय पर विशेष वर्कशॉप आयोजित की गई। कार्यक्रम में छात्राओं को देशी पौधों के संरक्षण, बीज रोपण और जैव विविधता को मजबूत करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई।
वर्कशॉप का आयोजन Eco Club, NSS, DD Pant Botanical Society और Environment Club ने संस्थान के Innovation Council के सहयोग से किया। कार्यक्रम के लिए राज्य की Nodal Agency Environmental Information, Awareness, Capacity Building and Livelihood Programme (EIACP), Punjab State Council for Science and Technology थी। इसमें Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India का भी सहयोग रहा।
पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी हर व्यक्ति की
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज की Principal Dr Ekta Khosla ने पृथ्वी के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जीवन को बनाए रखने में Biodiversity की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।उन्होंने छात्राओं से कहा कि पृथ्वी को हरा-भरा रखना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्राओं को पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया।
बीज बोना भविष्य के प्रति उम्मीद का प्रतीक
Principal Dr Ekta Khosla ने बीज रोपण को आस्था और भविष्य के प्रति उम्मीद से जोड़ते हुए कहा कि एक बीज लगाना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण की दिशा में कदम है।
उन्होंने इच्छा जताई कि आने वाली पीढ़ियों को आज दिखाई दे रही पर्यावरणीय समस्याओं का सामना न करना पड़े। इसके लिए उन्होंने छात्राओं से पेड़ और बीज लगाने को केवल एक दिन की गतिविधि न मानकर जीवनभर की आदत बनाने का आह्वान किया।
Biodiversity Index का महत्व समझाया
IQAC Coordinator Dr Anjana Bhatia ने छात्राओं को Biodiversity Index की अवधारणा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी क्षेत्र में स्वस्थ जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन, मजबूती और स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
उन्होंने बीज को जीवन का वाहक बताते हुए कहा कि उसके भीतर भविष्य में पौधों और पूरे Ecosystem के विकास की संभावनाएं मौजूद होती हैं।
जापानी तकनीक से सीखा Seed Ball बनाना
वर्कशॉप के दौरान छात्राओं को जापान की Seed Ball Making Technique से भी परिचित कराया गया। बताया गया कि यह तकनीक प्राकृतिक खेती से जुड़ी एक पुरानी विधि है, जिसका इस्तेमाल मिट्टी को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना वनस्पति बहाली के लिए किया जाता रहा है।
आज Seed Balls को जैव विविधता बहाली और पौधों के विस्तार के लिए सरल एवं प्रभावी तरीका माना जाता है।
छात्राओं को दी गई Practical Training
Green Sparrows Project की Director Ramanpreet Kaur ने Seed Ball बनाने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इसके लिए किस तरह के बीज उपयुक्त होते हैं और Seed Balls तैयार करने में किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है।
प्रतिभागियों को मुख्य रूप से मिट्टी, Compost और Clay के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। इसके बाद छात्राओं को चरणबद्ध तरीके से Seed Ball तैयार करने का Practical Demonstration दिया गया, ताकि वे इस तकनीक को स्वयं समझकर अपना सकें।
Key Highlights:
- HRMMV में ‘Beej Se Virasat’ विषय पर वर्कशॉप आयोजित हुई।
- कार्यक्रम का फोकस Seed Balls और Native Biodiversity पर रहा।
- Eco Club, NSS, DD Pant Botanical Society और Environment Club ने आयोजन किया।
- संस्थान के Innovation Council ने भी सहयोग किया।
- EIACP, Punjab State Council for Science and Technology कार्यक्रम की राज्य Nodal Agency रही।
- Principal Dr Ekta Khosla ने पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया।
- Dr Anjana Bhatia ने Biodiversity Index का महत्व समझाया।
- छात्राओं को जापानी Seed Ball Making Technique के बारे में बताया गया।
- Ramanpreet Kaur ने Seed Ball बनाने की Practical Training दी।
- मिट्टी, Compost और Clay से Seed Balls तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई।
FAQ Section:
HRMMV में वर्कशॉप का आयोजन किस विषय पर हुआ?
वर्कशॉप ‘Beej Se Virasat: Seed Balls & Native Biodiversity’ विषय पर आयोजित की गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण, Native Plants और Biodiversity Conservation के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
Seed Ball क्या होता है?
Seed Ball बीज, मिट्टी, Compost और Clay जैसी सामग्री से तैयार किया गया छोटा गोला होता है, जिसे उपयुक्त स्थान पर फैलाकर पौधों के प्राकृतिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।
Seed Ball तकनीक की खासियत क्या है?
यह अपेक्षाकृत सरल तकनीक है, जिसका उपयोग पौधों और वनस्पति को बढ़ावा देने तथा जैव विविधता बहाली में किया जा सकता है।
वर्कशॉप में Seed Ball बनाने की ट्रेनिंग किसने दी?
Green Sparrows Project की Director Ramanpreet Kaur ने प्रतिभागियों को Seed Ball बनाने की प्रक्रिया की Practical Training दी।
Conclusion:
Hans Raj Mahila Maha Vidyalaya में आयोजित ‘Beej Se Virasat’ वर्कशॉप ने छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की अहमियत समझाने के साथ-साथ Seed Ball बनाने का व्यावहारिक अनुभव भी दिया। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि छोटे स्तर पर बीज रोपण और पौधों की देखभाल जैसे प्रयास भी भविष्य में Ecosystem को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
