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अमृतसर में ‘सिख संघर्ष दे दस्तावेज 1920-2022’ पुस्तक का विमोचन, बोले GNDU VC- इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है
वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह की पुस्तक में 1920 से 2022 तक के सिख इतिहास और पंजाब के राजनीतिक-सामाजिक सफर से जुड़े मूल दस्तावेज संकलित
अमृतसर में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जगतार सिंह की पुस्तक ‘सिख संघर्ष दे दस्तावेज 1920-2022’ का विमोचन किया गया। GNDU के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने कहा कि इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है, किसी नैरेटिव से नहीं।
अमृतसर में सिख इतिहास और पंजाब के राजनीतिक-सामाजिक घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर आधारित पुस्तक ‘सिख संघर्ष दे दस्तावेज 1920-2022 (Sikh Struggle Documents)’ का विमोचन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जगतार सिंह द्वारा लिखी गई इस पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने इतिहास को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में पुस्तक के विमोचन के बाद ऐतिहासिक दस्तावेजों के महत्व और सिख इतिहास को समझने में उनकी भूमिका पर चर्चा भी हुई।
‘इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है, नैरेटिव से नहीं’
GNDU के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने कहा कि इतिहास तथ्यात्मक होता है और उसे किसी नैरेटिव के अनुसार आकार नहीं दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि पुस्तक में सिख इतिहास से संबंधित दस्तावेजों को एक जगह उपलब्ध कराया गया है। शोधकर्ता पुस्तक में दिए गए संदर्भों और स्रोतों का इस्तेमाल अपने अध्ययन और शोध में कर सकते हैं।
शोधार्थियों के लिए उपयोगी सामग्री
कुलपति ने पुस्तक में शामिल दस्तावेजों और संदर्भों को शोध के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि मूल स्रोतों तक पहुंच इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समझने में शोधकर्ताओं की मदद कर सकती है।
1920 से 2022 तक के दस्तावेजों का संकलन
पुस्तक के लेखक और वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह ने बताया कि इस पुस्तक को तैयार करने का उद्देश्य सिख इतिहास के मूल दस्तावेजों के साथ-साथ पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री को एक जगह संकलित करना है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक में वर्ष 1920 से 2022 तक की ऐतिहासिक अवधि से संबंधित दस्तावेजों को शामिल किया गया है। इन दस्तावेजों के माध्यम से उस समय की घटनाओं और उनके पीछे मौजूद राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है।
घटनाओं के समय की परिस्थितियों को समझने में मदद
जगतार सिंह के अनुसार, ऐतिहासिक दस्तावेज किसी घटना के समय मौजूद राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें विभिन्न पक्षों द्वारा उस समय अपनाए गए रुख और उनके विचारों की जानकारी भी मिलती है।
उन्होंने कहा कि मूल दस्तावेजों को पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराना पुस्तक तैयार करने के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रहा है।
विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के लिए उपयोगी पुस्तक
वरिष्ठ पत्रकार गुरदर्शन सिंह बहिया ने पुस्तक के संकलन के लिए जगतार सिंह द्वारा किए गए व्यापक शोध की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
बहिया ने कहा कि लेखक ने केवल दस्तावेजों को एकत्र करने का काम नहीं किया, बल्कि उनके ऐतिहासिक संदर्भ को समझाने का भी प्रयास किया है। इससे पाठकों को यह समझने में सहायता मिलती है कि दस्तावेज किन परिस्थितियों में तैयार किए गए थे और उस समय की राजनीतिक स्थिति क्या थी।
Key Highlights:
- अमृतसर में ‘सिख संघर्ष दे दस्तावेज 1920-2022’ पुस्तक का विमोचन हुआ।
- पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जगतार सिंह हैं।
- GNDU VC प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने इतिहास को तथ्यों के आधार पर समझने पर जोर दिया।
- पुस्तक में वर्ष 1920 से 2022 तक के दस्तावेज शामिल किए गए हैं।
- पुस्तक में सिख इतिहास तथा पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा से जुड़े मूल दस्तावेज संकलित हैं।
- लेखक के अनुसार दस्तावेज घटनाओं के समय की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझने में मदद करते हैं।
- GNDU के कुलपति ने पुस्तक को शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी बताया।
- वरिष्ठ पत्रकार गुरदर्शन सिंह बहिया ने पुस्तक को विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
FAQ Section:
‘सिख संघर्ष दे दस्तावेज 1920-2022’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
इस पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जगतार सिंह हैं।
पुस्तक में किस अवधि के दस्तावेज शामिल हैं?
पुस्तक में वर्ष 1920 से 2022 तक की ऐतिहासिक अवधि से संबंधित दस्तावेज शामिल किए गए हैं।
पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पुस्तक का उद्देश्य सिख इतिहास और पंजाब के राजनीतिक-सामाजिक सफर से जुड़े मूल दस्तावेजों को एक जगह संकलित कर पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराना है।
GNDU VC करमजीत सिंह ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है और इसे नैरेटिव के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने पुस्तक में दिए गए स्रोतों और संदर्भों को शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी बताया।
पुस्तक शोधकर्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
इसमें मूल ऐतिहासिक दस्तावेज और उनके संदर्भ दिए गए हैं, जो किसी घटना के समय की राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों तथा विभिन्न पक्षों के रुख को समझने में मदद कर सकते हैं।
Conclusion:
‘सिख संघर्ष दे दस्तावेज 1920-2022’ पुस्तक का विमोचन सिख इतिहास और पंजाब के राजनीतिक-सामाजिक अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। 1920 से 2022 तक के मूल दस्तावेजों को एक जगह संकलित करने के प्रयास से पाठकों और शोधार्थियों को ऐतिहासिक घटनाओं को उनके समकालीन संदर्भ में समझने के लिए सामग्री उपलब्ध होगी। कार्यक्रम में वक्ताओं ने तथ्य आधारित इतिहास और मूल स्रोतों के अध्ययन के महत्व पर जोर दिया।
