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‘सोच के रंग’ कार्यक्रम के जरिए ऑटिज़्म जागरूकता का संदेश, जालंधर में कला और संस्कृति का संगम
वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे पर आयोजित कार्यक्रम में ऑटिस्टिक बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच
सोच ऑटिज़्म सोसायटी पंजाब द्वारा जालंधर के जुल्लुंदर जिमखाना क्लब में ‘सोच के रंग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों और कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से जागरूकता का संदेश दिया।
Soch Autism Society of Punjab द्वारा ‘सोच के रंग’ नामक एक पहल का आयोजन गुरुवार शाम जुल्लुंदर जिमखाना क्लब में किया गया। यह कार्यक्रम World Autism Awareness Day के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम के दौरान पेंटिंग्स, सजावटी गार्डन आइटम्स और मिट्टी के बर्तनों (पॉटरी) के स्टॉल लगाए गए, जिन्हें बच्चों और पेशेवर कलाकारों दोनों ने प्रस्तुत किया। विशेष रूप से ऑटिस्टिक बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों के स्टॉल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
कैलीग्राफी कलाकार Manpreet Khanna ने गुरबाणी और अन्य धार्मिक ग्रंथों के श्लोकों से सजे वॉल हैंगिंग्स प्रदर्शित किए, जबकि कलाकार Kimi Juneja ने पोर्ट्रेट, रोमांस और धार्मिक गुरुओं से संबंधित विषयों पर आधारित कैनवास पेंटिंग्स प्रस्तुत कीं।
इस कार्यक्रम में लाइव सिंगिंग और ओपन माइक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें कविता पाठ शामिल था।
एनजीओ की प्रमुख Anjali Dada ने बताया कि 2008 में स्थापित सोच ऑटिज़्म सोसायटी का उद्देश्य ऑटिज़्म से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को सशक्त बनाना और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करना है।

