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दिवाली पर पटाखों का शोर बढ़ा, बाजार में बिक रहे तेज आवाज वाले पटाखे; सुनने की क्षमता को नुकसान का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ पटाखों की आवाज 136 डेसीबल तक पहुंच सकती है। नियमों के बावजूद बाजार में निर्धारित सीमा से अधिक शोर करने वाले पटाखों की बिक्री पर चिंता जताई गई है।
दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। बाजार में अलग-अलग तीव्रता वाले पटाखे बिक रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने तेज आवाज वाले पटाखों से बच्चों और आम लोगों की सुनने की क्षमता को होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताई है।
दिवाली पर बढ़ा ध्वनि प्रदूषण, बाजार में तेज आवाज वाले पटाखे
दिवाली के त्योहार के साथ ही पटाखों की आवाज और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। बाजार में अलग-अलग तीव्रता वाले पटाखे उपलब्ध हैं। हालांकि संबंधित अधिकारियों ने कुछ अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन कई अन्य इकाइयों और बाजार में बिक रहे तेज आवाज वाले पटाखों पर निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज न केवल आसपास के लोगों को परेशान कर सकती है, बल्कि इससे सुनने की क्षमता पर भी गंभीर असर पड़ने का खतरा रहता है।
एटम बम की आवाज 136 डेसीबल तक पहुंचने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, एटम बम जैसे पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज की तीव्रता दूरी के आधार पर लगभग 130 से 136 डेसीबल तक हो सकती है। वहीं, ट्रिपल शॉट और पैरट बम जैसे पटाखों की आवाज करीब 100 डेसीबल बताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रशिक्षित कारीगरों द्वारा खराब गुणवत्ता वाली सामग्री से बनाए गए पटाखे निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक शोर कर सकते हैं। ऐसी आवाज से लोगों को असहजता हो सकती है और तेज ध्वनि के संपर्क में आने पर सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है।
बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं तेज आवाज वाले पटाखे
पर्यावरण कार्यकर्ता पीएस भट्टी ने बाजार में तेज आवाज वाले पटाखों की बिक्री पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अधिक तीव्रता वाले पटाखे नुकसानदायक हो सकते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से बच्चों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चे कई बार पटाखे बहुत नजदीक से जलाते हैं, जिससे उनके कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
PPCB ने 135 डेसीबल बताई अधिकतम निर्धारित सीमा
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के अधिकारियों के अनुसार, पटाखों की अधिकतम अनुमत ध्वनि तीव्रता 135 डेसीबल है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी माना कि बाजार में ऐसे पटाखे उपलब्ध होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, जो निर्धारित सीमा से अधिक आवाज करते हैं।
नियमों के बावजूद ऐसे पटाखों की बिक्री होना चिंता का विषय है। इससे बाजार में उपलब्ध पटाखों की गुणवत्ता और उनकी ध्वनि तीव्रता की जांच तथा निगरानी की जरूरत सामने आती है।
Key Highlights
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दिवाली के दौरान पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की चिंता।
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एटम बम की आवाज 130 से 136 डेसीबल तक बताई गई।
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ट्रिपल शॉट और पैरट बम की आवाज करीब 100 डेसीबल बताई गई।
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खराब गुणवत्ता वाले पटाखे निर्धारित सीमा से अधिक शोर कर सकते हैं।
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पर्यावरण कार्यकर्ता पीएस भट्टी ने बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताई।
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PPCB अधिकारियों के अनुसार अधिकतम अनुमत ध्वनि तीव्रता 135 डेसीबल है।
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नियमों के बावजूद बाजार में तेज आवाज वाले पटाखों की उपलब्धता पर सवाल।
FAQ Section
1. दिवाली पर पटाखों से किस तरह का नुकसान हो सकता है?
तेज आवाज वाले पटाखों से ध्वनि प्रदूषण, कानों में असहजता और सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है।
2. एटम बम की आवाज कितनी हो सकती है?
रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी आवाज दूरी के आधार पर लगभग 130 से 136 डेसीबल तक हो सकती है।
3. ट्रिपल शॉट और पैरट बम की आवाज कितनी बताई गई है?
इन पटाखों की आवाज करीब 100 डेसीबल बताई गई है।
4. PPCB के अधिकारियों ने पटाखों की अधिकतम अनुमत ध्वनि सीमा कितनी बताई है?
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, अधिकतम अनुमत ध्वनि तीव्रता 135 डेसीबल है।
5. बच्चों को तेज आवाज वाले पटाखों से ज्यादा खतरा क्यों है?
बच्चे कई बार पटाखे बहुत नजदीक से जलाते हैं। इससे तेज आवाज के सीधे संपर्क में आने और कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
Conclusion
दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन तेज आवाज वाले पटाखे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन सुनिश्चित करना और बाजार में बिकने वाले पटाखों की निगरानी करना जरूरी है। खासकर बच्चों को पटाखों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और तेज आवाज वाले पटाखों से बचने के लिए जागरूक करना महत्वपूर्ण है।
