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पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य होने पर पंजाब भर में शिक्षकों का विरोध
20–25 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों ने बताया फैसला अन्यायपूर्ण, 22 फरवरी से बड़े आंदोलन की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पंजाब में पदोन्नति के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ राज्यभर में शिक्षकों के संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बुधवार को जिला प्रशासनिक परिसर में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
पंजाब में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले के बाद राज्यभर में विरोध तेज हो गया है। यह कदम पिछले सितंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।
पंजाब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो शिक्षक TET उत्तीर्ण नहीं हैं, उन्हें उच्च पदों पर पदोन्नति नहीं दी जाएगी।
इस निर्णय के विरोध में बुधवार को जिला प्रशासनिक परिसर में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा विभाग द्वारा 7 फरवरी 2026 को जारी उस पत्र की प्रतियां जलाईं, जिसमें मास्टर कैडर में पदोन्नति के लिए TET योग्यता अनिवार्य की गई है।
राज्य के सभी प्रमुख शिक्षक संगठनों ने इस आदेश का विरोध करते हुए इसे “थोपे जाने वाला” और 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के साथ अन्याय बताया है।
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला अध्यक्ष अश्वनी अवस्थी ने कहा कि 20-25 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर TET पास करने की शर्त लगाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा, “शिक्षकों ने उस समय लागू भर्ती नियमों और शर्तों को पूरा कर सेवा जॉइन की थी। इतने लंबे समय बाद नए नियम लागू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।”
वहीं, सूचा सिंह तरपाई ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर जल्दबाजी में इस परीक्षा को लागू कर रही हैं। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करे और प्रक्रिया में जल्दबाजी न करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 22 फरवरी से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें पंजाब भर के शिक्षक आनंदपुर साहिब तक मार्च करेंगे।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार कर वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षकों को राहत देनी चाहिए।
