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GNDU में ‘पंजाब 2047’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, उद्यमिता और नवाचार पर जोर
विशेषज्ञों ने कहा—ज्ञान आधारित विकास, तकनीक और कौशल से ही साकार होगा ‘विकसित पंजाब 2047’ का लक्ष्य
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) में “पंजाब 2047: उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से भविष्य निर्माण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन शुरू हुआ। वक्ताओं ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की तर्ज पर पंजाब भी उद्यमिता, नवाचार और ज्ञान आधारित विकास से समृद्ध हो सकता है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) में बुधवार को “Punjab 2047: Forging the Future through Entrepreneurship and Innovation” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देशभर के शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विद्वानों ने भाग लिया।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप पंजाब भी उद्यमिता, नवाचार और ज्ञान-आधारित विकास के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
विशेषज्ञों के पैनल ने तकनीक आधारित उद्योग और कृषि अर्थव्यवस्था, कौशल अंतर को पाटने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका मत था कि बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता (Adaptability) ही पंजाब को 2047 तक एक सतत, समावेशी और प्रगतिशील राज्य बना सकती है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति डॉ. आलोक चक्रवाल, पंजाबी साहित्य के प्रख्यात विशेषज्ञ अमरजीत ग्रेवाल और AIU की अतिरिक्त सचिव डॉ. ममता रानी अग्रवाल सहित कई प्रमुख वक्ता उपस्थित रहे।
नवाचार आधारित विकास की जरूरत
GNDU के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह ने कहा कि ‘पंजाब 2047’ के विजन को साकार करने के लिए नवाचार-आधारित विकास, उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र (Entrepreneurial Ecosystem) और अकादमिक जगत व उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता है।
उन्होंने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए चार मार्गदर्शक सिद्धांतों—
किरत करो (ईमानदार श्रम), नाम जपो (ईश्वर स्मरण), वंड छको (साझा करना) और चढ़दी कला (सदैव सकारात्मकता)—को भविष्य निर्माण का आधार बताया।
युवा बनें जॉब क्रिएटर
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. आलोक चक्रवाल ने ‘नई शुरुआत’ पर बल देते हुए कहा कि विकसित पंजाब के लक्ष्य को पाने के लिए हर छात्र को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला (Job Creator) बनना होगा।
उन्होंने कहा,
“जब युवा नवाचार करेंगे, उद्यम स्थापित करेंगे और अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदान देंगे, तभी पंजाब 2047 तक पूर्ण रूप से विकसित राज्य बन सकेगा। लेकिन यह प्रक्रिया जागरूकता और नैतिक समझ के साथ होनी चाहिए।”
मजबूत राज्यों से बनेगा विकसित भारत
AIU की अतिरिक्त सचिव डॉ. ममता रानी अग्रवाल ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना मजबूत और प्रगतिशील राज्यों से ही शुरू होता है, जिसमें पंजाब की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मजबूत इन्क्यूबेशन पारिस्थितिकी तंत्र (Incubation Ecosystem) का निर्माण सीधे तौर पर विकसित राष्ट्र के निर्माण में योगदान देता है।
संगोष्ठी के पहले दिन विभिन्न विषयों पर चर्चा सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षा, तकनीक, कृषि, उद्योग और ग्रामीण विकास के आयामों पर विचार-विमर्श हुआ।
