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पंजाब रोडवेज और PRTC के ठेका कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, परिवहन सेवाएं ठप
27 डिपो के 8,000 कर्मचारी हड़ताल में शामिल; कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी को लेकर सरकार से वार्ता जारी
पंजाब रोडवेज और PRTC के ठेका कर्मचारियों ने बुधवार दोपहर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे पूरे राज्य में बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। “चक्का जाम” की स्थिति से हजारों यात्रियों को निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ा।
पंजाब रोडवेज और पनबस/PRTC के ठेका कर्मचारियों ने बुधवार दोपहर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे राज्यभर में परिवहन सेवाएं बाधित हो गईं। हड़ताल के चलते कई स्थानों पर “चक्का जाम” की स्थिति बन गई और हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों को मजबूरन निजी बस सेवाओं का सहारा लेना पड़ा।
PRTC कॉन्ट्रैक्चुअल एम्प्लॉइज यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष हरकेश विक्की ने बताया कि 27 डिपो के करीब 8,000 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यूनियन प्रतिनिधि चंडीगढ़ में परिवहन सचिव के साथ बैठक कर रहे हैं। यूनियन की मुख्य मांग है कि दिसंबर की शुरुआत में प्रदर्शन के दौरान हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में दर्ज मामलों में फंसे कर्मचारियों को रिहा किया जाए।
यूनियन नेताओं के अनुसार, नवंबर में संगरूर और पटियाला में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन के बाद कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गिरफ्तार कर्मचारी अब भी जेल में हैं। यूनियन का दावा है कि 20 से अधिक सदस्यों पर गैर-जमानती धाराएं लगाई गईं और 34 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
हरकेश विक्की ने आरोप लगाया कि 10 से 20 वर्षों से ठेके या आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्पेशल कैडर पॉलिसी 2023 के तहत असुरक्षा की स्थिति में धकेला जा रहा है। उन्होंने सरकार पर किलोमीटर स्कीम के माध्यम से परिवहन विभाग के निजीकरण की ओर बढ़ने का आरोप भी लगाया।
यूनियन सचिव जसदीप सिंह लाली ने कहा कि राज्य सरकार ने बार-बार आश्वासन देने के बावजूद कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं किया। उन्होंने बताया कि PRTC के पास करीब 1,200 बसें हैं, जबकि पंजाब रोडवेज के पास लगभग 1,600 बसें संचालित हो रही हैं। लाली ने यह भी कहा कि पिछले चार वर्षों में PRTC के बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं की गई।
हड़ताल के चलते राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है और यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
