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राज्यपाल की नशा विरोधी पदयात्रा पर कांग्रेस का तंज, “अकाली–बीजेपी गठबंधन को पुनर्जीवित करने की कवायद”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पदयात्रा को बताया “समझौता एक्सप्रेस”
पंजाब में नशे के खिलाफ राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि यह अभियान वास्तव में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अकाली दल और बीजेपी के संभावित गठबंधन को दोबारा खड़ा करने की कोशिश है।
पंजाब में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की नशा विरोधी पदयात्रा को लेकर सियासत और तेज हो गई है। मंगलवार को कांग्रेस ने इस पहल पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह अभियान अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
कांग्रेस ने याद दिलाया कि अकाली दल ने 2020 में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के मुद्दे पर बीजेपी से दशकों पुराना गठबंधन तोड़ दिया था। इन कानूनों के खिलाफ किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर एक साल तक आंदोलन किया था, जिसके बाद केंद्र सरकार को इन्हें वापस लेना पड़ा।
राज्यपाल की यह चार दिवसीय पदयात्रा, जो सीमावर्ती जिलों से होकर गुजर रही है, अप्रैल 2025 के बाद दूसरी ऐसी पहल है। कांग्रेस ने इस अभियान की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने एक बयान में पदयात्रा की तीखी आलोचना करते हुए इसे “समझौता एक्सप्रेस” करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“मेरा राज्यपाल महोदय से विनम्र सवाल है कि जिस पदयात्रा का वह नेतृत्व कर रहे हैं, क्या वह वास्तव में नशे के खिलाफ अभियान है या फिर ‘समझौता एक्सप्रेस’ चलाकर पंजाब में अकाली–बीजेपी गठबंधन के लिए जमीन तैयार करने की कोशिश?”
वड़िंग ने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले “मरती हुई अकाली दल” को बचाने के लिए CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) दिया जा रहा है। उन्होंने इस टिप्पणी के जरिए राज्य की राजनीति में चल रही अंदरूनी गतिविधियों की ओर इशारा किया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नशे जैसी गंभीर समस्या पर राजनीतिक संदेश देना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि इससे पहले बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र के विस्तार जैसे कदम भी नशे और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने में विफल रहे हैं।
हालांकि, राज्यपाल या संबंधित दलों की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस बयान के बाद यह स्पष्ट है कि नशा विरोधी अभियान अब पूरी तरह सियासी बहस का विषय बन चुका है, जिसके राजनीतिक निहितार्थ आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।
