नशे के खिलाफ राज्यपाल की पदयात्रा में सियासी संकेत, अकाली–बीजेपी मंच साझा करने से पंजाब की राजनीति गरमाई

डेरा राधा स्वामी प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों की मौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय; AAP ने राज्यपाल को दी नसीहत

On

फिरोजपुर में नशे के खिलाफ निकाली गई राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की पदयात्रा के दौरान डेरा राधा स्वामी ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों, शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की एक साथ मौजूदगी ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

पंजाब में नशे के खिलाफ माहौल बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को फिरोजपुर में आयोजित राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की पदयात्रा एक सामाजिक संदेश से कहीं आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई। इसकी वजह रही डेरा राधा स्वामी ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की एक साथ सार्वजनिक मौजूदगी।

यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2020 के कृषि कानून विवाद के बाद अकाली दल के एनडीए से अलग होने के बाद यह पहला मौका है जब अकाली और बीजेपी के वरिष्ठ नेता एक ही मंच पर नजर आए। इसने राज्य में इस अटकल को और हवा दे दी है कि क्या दोनों दल आगामी महीनों में फिर से गठबंधन की ओर बढ़ सकते हैं, खासकर तब जब पंजाब में विधानसभा चुनाव को अभी करीब एक वर्ष का समय शेष है।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। डेरा राधा स्वामी प्रमुख की मौजूदगी ने भी इस पदयात्रा को अतिरिक्त महत्व दे दिया, क्योंकि उनका पंजाब के सामाजिक और आध्यात्मिक परिदृश्य में गहरा प्रभाव माना जाता है।

इस बीच, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने राज्यपाल से “सावधानी बरतने” की अपील करते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की समस्या फैलने के लिए अकाली दल जिम्मेदार रहा है। AAP ने सवाल उठाया कि नशे के खिलाफ अभियान में ऐसे नेताओं की मौजूदगी क्या सही संदेश देती है, जिनके शासनकाल में यह समस्या गंभीर हुई।

विपक्षी दलों का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को राजनीतिक मंच में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए, जबकि अकाली और बीजेपी खेमे की ओर से इसे सामाजिक मुद्दे पर एकजुटता करार दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, नशे के खिलाफ एक प्रतीकात्मक पदयात्रा ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित गठबंधनों को लेकर बहस छेड़ दी है, जिसके असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना है।Screenshot_1101

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

राज्यपाल की नशा विरोधी पदयात्रा पर कांग्रेस का तंज, “अकाली–बीजेपी गठबंधन को पुनर्जीवित करने की कवायद”

नवीनतम

राज्यपाल की नशा विरोधी पदयात्रा पर कांग्रेस का तंज, “अकाली–बीजेपी गठबंधन को पुनर्जीवित करने की कवायद” राज्यपाल की नशा विरोधी पदयात्रा पर कांग्रेस का तंज, “अकाली–बीजेपी गठबंधन को पुनर्जीवित करने की कवायद”
पंजाब में नशे के खिलाफ राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस...
‘बॉर्डर’ फिल्म पर फिर विवाद, 1971 युद्ध के दो जीवित वीर सैनिकों ने “शहीद दिखाने” पर जताई आपत्ति
नशे के खिलाफ राज्यपाल की पदयात्रा में सियासी संकेत, अकाली–बीजेपी मंच साझा करने से पंजाब की राजनीति गरमाई
चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब भी ‘प्वाइंट ऑफ कॉल’ के इंतजार में, सांसद ने संसद में उठाई मांग
सरकारी स्कूल के छात्रों का पहला हवाई सफर, जयपुर यात्रा बनी ‘आउट ऑफ द वर्ल्ड’ अनुभव
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software