चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब भी ‘प्वाइंट ऑफ कॉल’ के इंतजार में, सांसद ने संसद में उठाई मांग

बीजेपी सांसद सतनाम सिंह संधू ने लंदन, सिंगापुर और वैंकूवर के लिए सीधी उड़ानों की पैरवी की

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उद्घाटन के एक दशक से अधिक समय बाद भी शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, चंडीगढ़, वैश्विक कनेक्टिविटी के अपने पूरे सामर्थ्य तक नहीं पहुंच पाया है। ‘प्वाइंट ऑफ कॉल’ (PoC) का दर्जा न मिलने के कारण यहां से पूर्ण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हो पा रही हैं। यह मुद्दा मंगलवार को संसद में जोरदार तरीके से उठाया गया।

शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, चंडीगढ़ (मोहाली स्थित), अब भी ‘प्वाइंट ऑफ कॉल’ (PoC) दर्जे की कमी के कारण अपने पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वरूप से वंचित है। उद्घाटन के एक दशक से अधिक समय बाद भी यह हवाई अड्डा वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख प्रवेश द्वार (ग्लोबल गेटवे) बनने से पीछे रह गया है।

इस अहम मुद्दे को बीजेपी के राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने मंगलवार को संसद के शून्यकाल के दौरान उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट को तत्काल PoC का दर्जा दिया जाए, ताकि यहां से लंदन, सिंगापुर और वैंकूवर जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जा सकें।

वर्तमान में चंडीगढ़ एयरपोर्ट से केवल दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें—दुबई और अबूधाबी—संचालित हो रही हैं, जिन्हें इंडिगो एयरलाइंस संचालित करती है। सांसद संधू ने इसे क्षेत्र की जरूरतों के मुकाबले बेहद अपर्याप्त बताया। इसके साथ ही उन्होंने चंडीगढ़ और अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर कार्गो क्षमता बढ़ाने की भी मांग की, ताकि पंजाब से निर्यात को प्रोत्साहन मिल सके।

संधू ने सदन को बताया कि चंडीगढ़ हवाई अड्डा केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए भी एक प्रमुख विमानन केंद्र है, जो करीब 7 करोड़ की संयुक्त आबादी को सेवाएं देता है।
उन्होंने कहा,

“चंडीगढ़ एयरपोर्ट को सालाना 60 लाख यात्रियों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया था। फिलहाल यहां 40 से 42.5 लाख यात्री प्रतिवर्ष सफर कर रहे हैं और अभी भी कम से कम 20 लाख अतिरिक्त यात्रियों को संभालने की क्षमता मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की मांग वास्तविक, निरंतर और राज्यों में साझा है।”

उन्होंने बताया कि विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और यात्री संख्या में निरंतर वृद्धि के बावजूद, PoC अधिसूचित न होने के कारण विदेशी एयरलाइंस चंडीगढ़ के लिए उड़ानें शुरू नहीं कर पा रही हैं। भारत के द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौतों के तहत PoC का दर्जा अनिवार्य होता है, जिसके बिना कोई भी विदेशी एयरलाइन किसी भारतीय एयरपोर्ट से सेवाएं संचालित नहीं कर सकती।

इसी वजह से एमिरेट्स, लुफ्थांसा और एयर कनाडा जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस, बाजार में मांग होने के बावजूद, चंडीगढ़ के लिए उड़ानें निर्धारित नहीं कर पा रही हैं। इसका सीधा असर यह है कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के हजारों यात्रियों को आज भी दिल्ली या अमृतसर जाकर अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़नी पड़ती है।

सांसद ने कहा कि दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आज भी अधिकांश यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है, जिससे यात्रा का समय, खर्च और भीड़—तीनों बढ़ते हैं। जबकि चंडीगढ़ एयरपोर्ट का उद्देश्य ही इसी बोझ को कम करना था।

संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विमानन क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2014 में जहां देश में 74 हवाई अड्डे थे, वहीं आज इनकी संख्या 163 से अधिक हो चुकी है।
पंजाब में अब दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे—चंडीगढ़ और अमृतसर, और चार घरेलू हवाई अड्डे—आदमपुर, हलवारा, बठिंडा और पठानकोट हैं।

उन्होंने हाल ही में हलवारा हवाई अड्डे के उद्घाटन और आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट किए जाने को केंद्र सरकार की क्षेत्रीय विमानन नीति का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा,

“पंजाब को केंद्र सरकार से बहुत कुछ मिला है, लेकिन Punjabis ka dil maange more।”

इस बीच, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि बीते एक दशक में चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण किया गया है। अब यहां लगभग सभी परिचालन बाधाएं दूर हो चुकी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, हवाई अड्डा अब 24x7 संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम है। इसकी 10,400 फीट लंबी रनवे बिना किसी पेलोड प्रतिबंध के वाइड-बॉडी विमानों को संभाल सकती है। साथ ही, 53,000 वर्ग मीटर में फैला आधुनिक टर्मिनल, पर्याप्त इमिग्रेशन, कस्टम्स और सुरक्षा सुविधाओं से लैस है, जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।Screenshot_1043

Edited By: Karan Singh

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