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GMADA ने सरकारी खजाने में जमा कराए ₹6,210 करोड़, फिर भी 14 विकास परियोजनाओं के लिए ₹17,686 करोड़ की जरूरत
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में सामने आई जानकारी, GMADA ने कर्ज लेने के प्रस्ताव के समर्थन में कानून का दिया हवाला
पंजाब में आवास एवं शहरी विकास विभाग के अधीन आने वाले प्राधिकरणों ने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत राज्य के खजाने में कुल ₹6,400 करोड़ जमा कराए हैं। इनमें ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) का योगदान ₹6,210 करोड़ है। दूसरी ओर, GMADA ने 14 विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों पर ₹17,686 करोड़ की जरूरत बताई है। इस बीच, प्रस्तावित कर्ज और वित्तीय सलाहकार को दी जाने वाली फीस का मुद्दा भी चर्चा में है।
पंजाब में शहरी विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाने को लेकर GMADA का वित्तीय मामला चर्चा में है। आवास विभाग के अधीन आने वाले विकास प्राधिकरणों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े कानून के तहत राज्य के खजाने में कुल ₹6,400 करोड़ जमा कराए हैं। इनमें से ₹6,210 करोड़ ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) ने जमा किए हैं।
यह जानकारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रस्तावित कर्ज से संबंधित मामले में दाखिल हलफनामे के जरिए सामने आई है। GMADA के मुख्य प्रशासक ने अदालत को बताया कि प्राधिकरण ने 14 विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं के लिए चिन्हित जमीन पर भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों के लिए कुल ₹17,686 करोड़ की आवश्यकता है।
GMADA की 14 परियोजनाओं के लिए ₹17,686 करोड़ की जरूरत
GMADA के मुख्य प्रशासक की ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार, प्राधिकरण ने 14 विकास परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। इन परियोजनाओं में चिन्हित भूमि का अधिग्रहण और विकास संबंधी कार्य शामिल हैं।इन कार्यों को पूरा करने के लिए ₹17,686 करोड़ की जरूरत बताई गई है। इसी वित्तीय आवश्यकता के मद्देनजर प्राधिकरण की ओर से कर्ज लेने के प्रस्ताव को उचित ठहराया गया है।
राज्य के खजाने में जमा हैं ₹6,400 करोड़
आवास विभाग के अंतर्गत आने वाले प्राधिकरणों ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानून के तहत राज्य के खजाने में ₹6,400 करोड़ जमा कराए हैं। इनमें GMADA की हिस्सेदारी ₹6,210 करोड़ बताई गई है।
यह रकम भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से संबंधित कानून के तहत जमा कराई गई है। इतनी बड़ी राशि जमा होने के बावजूद विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त धन जुटाने की जरूरत ने प्रस्तावित कर्ज को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि खजाने में जमा पूरी राशि को GMADA अपनी विकास परियोजनाओं पर सीधे खर्च कर सकता है या नहीं। इसलिए जमा रकम और परियोजनाओं के लिए उपलब्ध धन को एक समान मानना उचित नहीं होगा।
कर्ज लेने के लिए किस कानून का दिया गया हवाला?
GMADA के अधिकारियों ने कर्ज लेने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए पंजाब क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन और विकास अधिनियम, 1955 की धारा 51 का हवाला दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रावधान प्राधिकरण को ऋण, डिबेंचर या बॉन्ड के माध्यम से धन जुटाने का अधिकार देता है। GMADA ने इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर प्रस्तावित वित्तीय व्यवस्था को उचित ठहराया है।
टिपसन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज की फीस पर भी ध्यान
प्रस्तावित धन जुटाने की प्रक्रिया के साथ गुजरात स्थित मर्चेंट बैंकर टिपसन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दी जाने वाली फीस का मुद्दा भी सामने आया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कंपनी को दी जाने वाली फीस की सटीक राशि, भुगतान की शर्तों और उसकी भूमिका से संबंधित पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होगी।
हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे से सामने आया मामला
प्रस्तावित कर्ज से संबंधित मामले में GMADA के मुख्य प्रशासक ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। इसमें विकास परियोजनाओं की वित्तीय जरूरत और कर्ज जुटाने के कानूनी आधार का उल्लेख किया गया है।
मामले का मुख्य पहलू यह है कि एक तरफ विकास प्राधिकरणों की ओर से राज्य के खजाने में बड़ी रकम जमा कराए जाने की जानकारी है, वहीं दूसरी तरफ GMADA अपनी परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत बता रहा है।
Key Highlights:
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आवास विभाग के अधीन प्राधिकरणों ने राज्य के खजाने में ₹6,400 करोड़ जमा कराए।
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GMADA ने इसमें से ₹6,210 करोड़ जमा किए।
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GMADA ने 14 विकास परियोजनाओं के लिए ₹17,686 करोड़ की जरूरत बताई।
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यह जानकारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे से सामने आई।
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कर्ज लेने के प्रस्ताव के समर्थन में पंजाब क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन और विकास अधिनियम, 1955 की धारा 51 का हवाला दिया गया।
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गुजरात स्थित टिपसन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दी जाने वाली फीस का मुद्दा भी चर्चा में है।
FAQ Section:
1. GMADA ने राज्य के खजाने में कितनी राशि जमा कराई है?
दाखिल हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार, GMADA ने राज्य के खजाने में ₹6,210 करोड़ जमा कराए हैं।
2. आवास विभाग के अधीन प्राधिकरणों ने कुल कितनी राशि जमा की?
सभी संबंधित प्राधिकरणों की ओर से कुल ₹6,400 करोड़ जमा कराए गए हैं।
3. GMADA को अपनी विकास परियोजनाओं के लिए कितने पैसे की जरूरत है?
GMADA के अनुसार, 14 विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों पर ₹17,686 करोड़ की जरूरत है।
4. GMADA किस कानून के तहत कर्ज जुटाने की बात कर रहा है?
प्राधिकरण ने पंजाब क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन और विकास अधिनियम, 1955 की धारा 51 का हवाला दिया है, जिसके तहत ऋण, डिबेंचर या बॉन्ड के माध्यम से धन जुटाया जा सकता है।
5. टिपसन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज का मामला क्या है?
गुजरात स्थित इस मर्चेंट बैंकर को प्रस्तावित धन जुटाने की प्रक्रिया में दी जाने वाली फीस का मुद्दा सामने आया है। उपलब्ध जानकारी में फीस की सटीक राशि नहीं बताई गई है।
Conclusion:
GMADA की वित्तीय स्थिति और प्रस्तावित कर्ज को लेकर सामने आई जानकारी ने पंजाब में शहरी विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण पर ध्यान केंद्रित किया है। एक ओर प्राधिकरण ने राज्य के खजाने में ₹6,210 करोड़ जमा कराए हैं, वहीं दूसरी ओर 14 विकास परियोजनाओं के लिए ₹17,686 करोड़ की जरूरत बताई है। इस मामले में जमा राशि के उपयोग, कर्ज की शर्तों और मर्चेंट बैंकर की फीस से जुड़े विवरण महत्वपूर्ण होंगे।

